मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:47 IST

स्पेसएक्स का स्टारशिप रॉकेट पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा, 14वां टेस्ट फ्लाइट

स्पेसएक्स के स्टारशिप-सुपर हैवी रॉकेट ने अपनी 14वीं टेस्ट फ्लाइट में पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचने की कोशिश की, साथ में 26 स्टारलिंक सैटेलाइट भी भेजे गए।

स्पेसएक्स का स्टारशिप रॉकेट पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा, 14वां टेस्ट फ्लाइट
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अंतरिक्ष की दुनिया में स्पेसएक्स ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। कंपनी का विशालकाय स्टारशिप-सुपर हैवी रॉकेट 28 सितंबर 2026 को अपनी 14वीं टेस्ट फ्लाइट के लिए अंतरिक्ष में रवाना हुआ। इस मिशन पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी थीं, क्योंकि स्टारशिप के इतिहास में पहली बार इसे पृथ्वी की कक्षा तक ले जाने की कोशिश की जा रही थी। स्पेसएक्स का मकसद है कि आगे चलकर चांद और मंगल की मुहिमों में यह रॉकेट अहम भूमिका निभाए।

इससे पहले स्टारशिप की 13 टेस्ट फ्लाइट में कई तकनीकी दिक्कतें सामने आ चुकी हैं। कुछ मिशन में रॉकेट ने कामयाबी से उड़ान भरी, तो कुछ टेस्ट में उड़ान के दौरान ही यान तबाह हो गया। लेकिन हर टेस्ट से मिली जानकारी के आधार पर स्पेसएक्स ने रॉकेट के डिजाइन और टेक्नोलॉजी में बदलाव किए हैं। अब फ्लाइट 14 मिशन में स्टारशिप को पृथ्वी के चारों तरफ कक्षा में पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

इस मिशन में सुपर हैवी नाम का पहला स्टेज स्टारशिप को जबरदस्त रफ्तार से अंतरिक्ष में लेकर जाएगा। इसके बाद स्टारशिप का दूसरा स्टेज अलग होकर अपने आगे के सफर पर निकलेगा। कक्षा में दाखिल होने के लिए स्टारशिप के इंजन का खास बर्न बहुत जरूरी माना जा रहा है।

इस मिशन की एक और खास बात यह है कि स्टारशिप के साथ 26 स्टारलिंक वी3 सैटेलाइट भी भेजे जा रहे हैं। इन सैटेलाइट को आने वाले वक्त में स्टारलिंक नेटवर्क को बढ़ाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। स्पेसएक्स की योजना है कि बड़े आकार और ज्यादा क्षमता वाले सैटेलाइट एक ही बार में भेजने के लिए स्टारशिप का इस्तेमाल किया जाए। स्टारशिप के कक्षा में पहुंचने के बाद सैटेलाइट छोड़ने की प्रक्रिया पूरी करने का प्लान है। इससे यह भी पता चलेगा कि भविष्य में बड़े पैमाने पर सैटेलाइट भेजने के लिए यह रॉकेट कितना कारगर साबित हो सकता है।

स्पेसएक्स का आखिरी मकसद सिर्फ पृथ्वी की कक्षा में सैटेलाइट भेजना नहीं है। चांद पर इंसान भेजना और आगे चलकर मंगल पर भी इंसानी मुहिम चलाना, इन बड़ी योजनाओं के केंद्र में स्टारशिप को रखा गया है। इसीलिए कक्षीय उड़ान का कामयाब होना इन महत्वाकांक्षी योजनाओं की तरफ एक अहम कदम माना जा सकता है।

स्टारशिप की बड़ी क्षमता, दोबारा इस्तेमाल हो सकने की सोच और भारी सामान ले जाने की ताकत, यही इसकी मुख्य खासियतें हैं। लेकिन नियमित और सुरक्षित कक्षीय उड़ानें, रीयूजेबिलिटी और लंबे वक्त तक भरोसेमंद बने रहना साबित करना, यही आगे की बड़ी चुनौतियां हैं।

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