सोमालिया के राष्ट्रपति का दावा: इस्रायल के सिवा किसी देश ने सोमालीलैंड को मान्यता नहीं दी
सोमालिया के राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में सोमालीलैंड पर इस्रायल के रुख पर कड़ी आपत्ति जताई है।
सोमालिया के राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद ने सोमालीलैंड के मुद्दे पर इस्रायल के रुख पर कड़ा ऐतराज जताया है। अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि इस्रायल के मान्यता देने से पहले पिछले तीन दशक से ज्यादा वक्त में किसी भी देश ने सोमालीलैंड को आजाद मुल्क के तौर पर मान्यता नहीं दी थी।
सोमालिया आज भी सोमालीलैंड को अपने देश का अभिन्न हिस्सा मानता है। इसी वजह से इस्रायल की मान्यता और उसके बाद हुई घटनाओं का असर हॉर्न ऑफ अफ्रीका इलाके के राजनीतिक और सुरक्षा समीकरणों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
सोमालीलैंड ने 1991 में सोमालिया से अलग होने का ऐलान किया था। लेकिन कई दशकों तक उसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली। दिसंबर 2025 में इस्रायल ने सोमालीलैंड को आजाद मुल्क के तौर पर मान्यता दे दी और उसके साथ राजनयिक संबंध कायम करने का ऐलान किया।
इसके बाद सोमालिया ने इस फैसले का जोरदार विरोध किया। राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद के मुताबिक, सोमालीलैंड को मान्यता देने के पीछे सिर्फ राजनयिक वजह नहीं है। इस्रायल के कुछ बड़े रणनीतिक हित भी हो सकते हैं।
राष्ट्रपति मोहम्मद ने दावा किया है कि सोमालीलैंड के रहने वाले लोग इस्रायली मौजूदगी के खिलाफ हैं। सोमालिया में भी इस्रायल की मान्यता के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। सोमाली सरकार का रुख है कि वह इस्रायल को सोमाली इलाके का इस्तेमाल किसी भी फौजी या दूसरे रणनीतिक मकसद के लिए नहीं करने देगी।
सोमालीलैंड की भौगोलिक स्थिति लाल समुद्र और अदन की खाड़ी के पास होने की वजह से बेहद अहम है। इसलिए इस इलाके में किसी भी विदेशी फौजी मौजूदगी का मतलब पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज से बड़ा हो सकता है।
सोमालिया की सरकार को चिंता है कि इस्रायल सोमालीलैंड में फौजी अड्डा बनाने की कोशिश कर सकता है। दूसरी तरफ, सोमालीलैंड ने शुरुआत में साफ किया था कि इस्रायल के साथ उसके संबंध सिर्फ राजनयिक हैं। बाद में संभावित फौजी सहयोग पर बातचीत चलने की खबरें भी सामने आईं।
इससे सोमाली सरकार की चिंता और बढ़ गई है। इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रपति अपने देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं। सोमालीलैंड की आगे की राजनीतिक स्थिति को लेकर अब अफ्रीकी देशों समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय का रुख अहम होगा।