श्रद्धांजलि देने वालों को भगवान बचाए!
मानकापुर श्मशान घाट का जर्जर भवन दे रहा हादसे को न्योता.
श्रद्धांजलि देने वालों को भगवान बचाए!
मानकापुर श्मशान घाट का जर्जर भवन दे रहा हादसे को न्योता
नागपुर। पश्चिम नागपुर के मानकापुर स्थित श्मशान घाट की जर्जर हालत ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतिम विदाई देने के लिए जहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, वहीं इसी परिसर का एक प्रमुख हॉल लंबे समय से बदहाल स्थिति में नजर आ रहा है। छत में दरारें, टूटे हिस्से, झड़ता प्लास्टर और जगह-जगह दिखाई दे रही सरिया इस भवन की खराब हालत की तस्वीर सामने रखती है।
सदर, छावनी, मानकापुर, गिट्टीखदान, बोरगांव, सिमनेरी हिल, गोधनी, झिंगाबाई टाकली, ओमनगर सहित आसपास के अनेक क्षेत्रों के नागरिक अंतिम संस्कार के लिए इसी श्मशान घाट का उपयोग करते हैं। ऐसे में परिसर में मौजूद जर्जर ढांचा चिंता का विषय बना हुआ है।
छत की हालत चिंताजनक
श्मशान घाट परिसर में बना सीमेंट-कंक्रीट का हॉल अंतिम श्रद्धांजलि और प्रार्थना के दौरान लोगों के एकत्र होने के लिए उपयोग किया जाता है। तस्वीरों में छत के कई हिस्सों में दरारें और क्षतिग्रस्त कंक्रीट दिखाई दे रहा है। कुछ स्थानों पर स्लैब के भीतर लगी लोहे की सरिया भी बाहर निकलती नजर आ रही है। छत से टूटकर गिरा मलबा और प्लास्टर भी परिसर में दिखाई देता है।
अंतिम विदाई के बीच मंडरा रहा खतरा
सबसे गंभीर पहलू यह है कि अंतिम संस्कार के दौरान इसी हॉल और उसके आसपास बड़ी संख्या में परिजन व नागरिक मौजूद रहते हैं। जर्जर संरचना की वास्तविक मजबूती का तकनीकी परीक्षण किए बिना उसकी सुरक्षा को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है, लेकिन तस्वीरों में दिखाई दे रही क्षति को देखते हुए तत्काल विशेषज्ञ निरीक्षण की जरूरत जरूर सामने आती है।
हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय संबंधित विभाग तत्काल मौके का निरीक्षण कराए। भवन की संरचनात्मक स्थिति की विशेषज्ञों से जांच कराकर आवश्यक मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण का निर्णय लिया जाए।
नागरिकों का कहना है कि श्मशान घाट जैसी संवेदनशील जगह पर आने वाले लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि भवन सुरक्षित नहीं है तो प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थायी समाधान की दिशा में तत्काल कदम उठाने चाहिए।
सवाल सीधा है, क्या प्रशासन इस जर्जर भवन का निरीक्षण हादसे से पहले करेगा, या फिर किसी दुर्घटना के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी?
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