मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:56 IST

श्मशान से लौटकर नहाने की परंपरा: सफाई, संक्रमण से बचाव और मन को संभालने से जुड़ी वजहें

अंतिम संस्कार के बाद घर आकर स्नान करने की प्रथा अनेक जगहों पर निभाई जाती है। इसके पीछे सफाई, धार्मिक शुद्धीकरण और मानसिक वजहें गिनाई जाती हैं।

श्मशान से लौटकर नहाने की परंपरा: सफाई, संक्रमण से बचाव और मन को संभालने से जुड़ी वजहें
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अंतिम संस्कार से लौटने के बाद नहाना और कपड़े बदलना अनेक जगहों पर निभाई जाने वाली प्रथा है। इसे शरीर की सफाई और धार्मिक शुद्धीकरण, दोनों के लिए अहम माना जाता है। सवाल यह है कि लोग अंतिम संस्कार के बाद नहाते क्यों हैं। इसकी वजहें सिर्फ धार्मिक नहीं हैं, वैज्ञानिक वजहें भी बताई जाती हैं।

श्मशान से लौटने पर शरीर और कपड़ों पर धूल, धुआं और राख लग जाती है। इसे साफ करने के लिए स्नान जरूरी माना गया है।

वैज्ञानिक वजहों में सबसे पहली है संक्रमण से बचाव। मौत के बाद शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत काम करना बंद कर देती है। इस वजह से मृत शरीर में बैक्टीरिया और सूक्ष्म जीवाणु तेजी से बढ़ते हैं। श्मशान की हवा और मृत शरीर के संपर्क में आने से ये नुकसानदेह बैक्टीरिया और वायरस कपड़ों और त्वचा से चिपक जाते हैं। नहाने से ये संक्रामक जीवाणु पानी से तुरंत धुल जाते हैं और बीमारी का खतरा घटता है। सेहत की हिफाजत भी उतनी ही अहम है। पुराने जमाने में जब इलाज की सुविधाएं और टीके नहीं थे, तब संक्रमण से बचने के लिए यह सख्त नियम लागू किया गया था।

अब धार्मिक और आध्यात्मिक वजह की बात। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक गहरे दुख और श्मशान में बार-बार होने वाले अंतिम संस्कारों से नकारात्मक ऊर्जा का असर पड़ता है। स्नान करने से शरीर और मन पर पड़ा यह असर खत्म होने में मदद मिलती है। पानी को पवित्रता का प्रतीक और पवित्र माना जाता है। इसीलिए अंतिम संस्कार से लौटकर घर में दाखिल होने से पहले सिर से नहाकर साफ कपड़े पहनने को कहा जाता है।

इस प्रथा का एक मानसिक पहलू भी है। अंतिम संस्कार भावनात्मक रूप से बेहद मुश्किल प्रक्रिया होती है। किसी करीबी के निधन के बाद परिवार के लोग शोक में डूबे होते हैं। ऐसे में स्नान की परंपरा सिर्फ शरीर की सफाई तक सीमित नहीं रहती, वह खुद को संभालने की मानसिक प्रक्रिया से भी जुड़ जाती है। नहाकर कपड़े बदलने और कुछ देर शांत बैठने से अंतिम संस्कार के माहौल से धीरे-धीरे रोजमर्रा की जिंदगी में लौटने की मानसिक तैयारी हो सकती है।

तो इस परंपरा का मुख्य मकसद क्या है? अंतिम संस्कार के बाद स्नान की परंपरा धार्मिक आस्था, शुद्धीकरण, सफाई और मानसिक बदलाव, इन सभी पहलुओं से जुड़ी है। इसलिए इस प्रथा को सिर्फ अंधविश्वास या सिर्फ वैज्ञानिक नियम की नजर से देखने के बजाय एक पारंपरिक धार्मिक तरीके के रूप में समझना जरूरी है।

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