शी जिनपिंग ने फिर उठाया ताइवान से राष्ट्रीय एकीकरण का मुद्दा, शांतिपूर्ण संबंधों की बात कही
चीन के राष्ट्रीय दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान के साथ एकीकरण की बात दोहराई। ताइवान ने इसका विरोध किया है।
चीन और ताइवान के बीच तनाव के बीच राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक बार फिर ताइवान के साथ राष्ट्रीय एकीकरण का मुद्दा उठाया है। चीन के राष्ट्रीय दिवस की पूर्व संध्या पर हुए कार्यक्रम में जिनपिंग ने ताइवान के साथ संबंध और मजबूत करने के लिए कोशिश करने की अपील की। बीजिंग की तरफ से लगातार यही कहा जाता रहा है कि ताइवान का सवाल चीन की राष्ट्रीय एकता और संप्रभुता से जुड़ा है।
जिनपिंग ने ताइवान स्ट्रेट के आर-पार आपसी लेन-देन और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने ताइवान की आजादी के लिए काम करने वाली ताकतों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की अपील की। बाहरी ताकतों की दखलअंदाजी रोकने की जरूरत भी उन्होंने बताई। चीन के मुताबिक ताइवान के साथ शांतिपूर्ण संबंध बढ़ाकर राष्ट्रीय एकीकरण का लक्ष्य आगे ले जाना जरूरी है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ हुई बातचीत में भी जिनपिंग ने कहा था कि अमेरिका को ताइवान की आजादी का विरोध करने का रुख अपनाना चाहिए। चीन ने कहा है कि ताइवान के मुद्दे पर उसका रुख साफ है। लेकिन उस बातचीत में ताइवान के मसले पर कोई बड़ा ठोस समझौता हुआ हो, ऐसा सामने नहीं आया है।
ताइवान में अपनी अलग लोकतांत्रिक सरकार काम करती है और वह बीजिंग के संप्रभुता के दावे को नहीं मानती। चीन ताइवान को अपने भूभाग का हिस्सा मानता है। इसी वजह से ताइवान का सवाल अब सिर्फ चीन और ताइवान के बीच का विवाद नहीं रहा। यह अमेरिका और एशिया-पैसिफिक की सुरक्षा के समीकरणों से भी जुड़ गया है।
जिनपिंग के ताजा बयान के बाद ताइवान के विदेश मंत्रालय ने चीन के रुख का विरोध किया है। ताइवान ने आरोप लगाया है कि बीजिंग अपने राजनीतिक दावों के लिए तथ्यों का इस्तेमाल कर रहा है। ताइवान की तरफ से यह भी कहा गया है कि ट्रम्प और जिनपिंग की मुलाकात के बाद अमेरिका की ताइवान नीति में बड़े बदलाव के साफ संकेत नहीं हैं।
जिनपिंग के बयान से यह सवाल फिर चर्चा में है कि क्या चीन ताइवान को अपने कब्जे में लेगा। पर इस बयान में उन्होंने ताइवान पर फौरन सैन्य कार्रवाई का ऐलान नहीं किया है। उन्होंने उलटे क्रॉस-स्ट्रेट संबंधों के शांतिपूर्ण विकास, लेन-देन और सहयोग बढ़ाने का जिक्र किया है। साथ ही चीन ने ताइवान की आजादी और बाहरी दखल के विरोध का अपना रुख कायम रखा है।
आगे चीन-ताइवान के सवाल पर कूटनीतिक दबाव, आर्थिक संबंध, सैन्य हलचल और अमेरिका-चीन रिश्ते अहम रहेंगे। जिनपिंग के ताजा बयान से यह फिर साफ हुआ है कि चीन ने ताइवान के एकीकरण का मुद्दा अपने राष्ट्रीय एजेंडे में बनाए रखा है।