शरद पवार बोले, विलीनीकरण होना है तो हमारी राष्ट्रवादी में आओ, हम किसी के साथ नहीं जाएंगे
राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों के विलीनीकरण और शरद पवार के NDA में जाने की चर्चाओं के बीच शरद पवार ने पार्टी बैठक में साफ भूमिका रखी।
राष्ट्रवादी कांग्रेस में विलीनीकरण को लेकर पिछले कुछ दिनों से जो चर्चाएं चल रही थीं, उन पर शरद पवार ने आज हुई पार्टी बैठक में खुलकर अपनी बात रखी। दोनों राष्ट्रवादी गुट एक हो सकते हैं, ऐसी अटकलें तो थीं ही, साथ ही यह चर्चा भी जोर पकड़ रही थी कि शरद पवार का गुट NDA के साथ जा सकता है। इसी माहौल में पार्टी बैठक को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा, "हम कहीं नहीं जाएंगे, हम किसी के साथ नहीं जाएंगे. आना है तो हमारे साथ आइए।"
शरद पवार के इस बयान के बाद प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने भी पार्टी की भूमिका साफ की। उनके मुताबिक अगर विलीनीकरण करना है तो वह शरद पवार की राष्ट्रवादी में ही होना चाहिए। शशिकांत शिंदे ने बताया कि दोनों राष्ट्रवादी के विलीनीकरण की चर्चा पहले भी चली थी। अजित पवार के जीवित रहते इस बारे में कुछ मुद्दे तय हुए थे और शरद पवार के सुझाव के मुताबिक आगे की प्रक्रिया करने का फैसला हुआ था। लेकिन अजित पवार के निधन के बाद यह मुद्दा पीछे चला गया। इसके बाद भी विलीनीकरण को लेकर चर्चा लगातार चलती रही, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में बेचैनी की तस्वीर पेश की जा रही थी। अब शरद पवार ने खुद अपनी भूमिका साफ कर दी है, ऐसा शशिकांत शिंदे ने कहा।
शशिकांत शिंदे ने यह भी कहा कि विलीनीकरण के मुद्दे को अभी चर्चा में रखने की जरूरत नहीं है, लेकिन जिन्हें विलीनीकरण करना है उन्हें शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस में विलीन हो जाना चाहिए, यही शरद पवार की भूमिका है।
पिछले कुछ महीनों में शरद पवार और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई मुलाकातों से उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हुई थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकातों ने भी इन चर्चाओं को और हवा दी थी। आज अपने बयान से शरद पवार ने इन चर्चाओं पर भी साफ जवाब दे दिया। उनके इस बयान का इशारा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और उनके गुट की तरफ है, ऐसी चर्चा राजनीतिक हलकों में हो रही है, हालांकि इसका असली राजनीतिक मतलब क्या है, इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
शशिकांत शिंदे ने यह भी कहा कि राज्य के अलग-अलग मुद्दों और समस्याओं पर महाविकास आघाडी के सभी दलों को एक साथ आकर आंदोलन करने की जरूरत है। अगर सभी विपक्षी दल मिलकर आंदोलन करें तो उसका असर ज्यादा प्रभावी होगा, ऐसा उनका कहना था। ठाकरे गुट की तरफ से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 4 अक्टूबर को निकाले जाने वाले मोर्चे को लेकर शशिकांत शिंदे ने कहा कि इस मोर्चे के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस को अभी तक कोई न्योता नहीं आया है, लेकिन ठाकरे गुट से न्योता आया तो उस पर विचार किया जाएगा।
दूसरी तरफ, अजित पवार की राष्ट्रवादी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे ने शरद पवार के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शरद पवार पिछले 6 दशकों से देश की राजनीति में हैं, इसलिए उनके बयान का मतलब अक्सर तुरंत समझ नहीं आता। उनके बयान का जवाब वक्त के साथ मिल जाएगा, ऐसा सुनील तटकरे ने कहा। सूखे को लेकर सरकारी फैसले पर शरद पवार की नाराजगी वाले मुद्दे पर भी तटकरे ने कहा कि सरकार ने सूखे को देखते हुए कदम उठाए हैं, राज्य की महायुती सरकार संवेदनशील है और ट्रिगर 1 के तहत सूखाग्रस्त तालुकों के पहले आंकड़े जारी किए गए हैं। केंद्र सरकार से भी मदद की उम्मीद है, ऐसा उन्होंने बताया। किसानों की बात सरकार के सामने रखना शरद पवार का स्वभाव रहा है और वे अपने अनुभव से किसानों के सवाल उठाते रहते हैं, ऐसा जवाब तटकरे ने दिया।
सुप्रिया सुळे के लड़ने की भूमिका में होने वाले बयान पर भी सुनील तटकरे ने कहा कि उन्होंने सुप्रिया सुळे का वह बयान सुना नहीं है, और उन्होंने किस संदर्भ में यह बयान दिया, यह समझना जरूरी है। देश और राज्य में कई अलग-अलग मुद्दे हैं, इसलिए सुप्रिया सुळे ने ठीक किस विषय को लेकर लड़ने की भूमिका रखी, यह उन्हें पता नहीं है। लड़ना का मतलब लोगों के सवालों के लिए लड़ना भी हो सकता है, ऐसी प्रतिक्रिया सुनील तटकरे ने दी।
खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।