मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:46 IST

सेमीकॉन 2026: भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर में 10 अरब डॉलर का निवेश, ओडिशा में बनेगा बड़ा हब

सेमीकॉन 2026 कॉन्फ्रेंस के बाद भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर में करीब 10 अरब डॉलर के निवेश और कई समझौतों की बात सामने आई, ओडिशा में कटक-भुवनेश्वर के बीच 178 एकड़ में हब बनाने का प्रस्ताव है।

सेमीकॉन 2026: भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर में 10 अरब डॉलर का निवेश, ओडिशा में बनेगा बड़ा हब
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

भारत को दुनिया में सेमीकंडक्टर बनाने का बड़ा सेंटर बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठा है। हाल ही में हुई 'सेमीकॉन 2026' इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के बाद देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को तेज रफ्तार मिली है। इस कार्यक्रम के दौरान सेमीकंडक्टर सेक्टर में करीब 10 अरब डॉलर, यानी लगभग 83,000 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर कोशिशें, बातचीत और कई अहम एमओयू (सामंजस्य करार) पूरे हुए हैं। इससे भारत के टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उत्साह का माहौल है।

लिंडे इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर मिलिंद साधुखान ने बताया कि भारत में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए अभी बहुत पॉजिटिव माहौल बना है। देश में सेमीकंडक्टर चिप बनाने, डिजाइन करने और उनकी टेस्टिंग करने के लिए दुनियाभर की बड़ी कंपनियों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। 'सेमीकॉन 2026' के जरिए दुनिया की बड़ी कंपनियों को भारत एक मजबूत, सेफ और लंबे समय तक साथ चलने वाला पार्टनर लग रहा है।

इस पूरी सेमीकंडक्टर क्रांति के पीछे केंद्र सरकार की दूरदर्शी पॉलिसी और अलग-अलग राज्य सरकारों का सपोर्ट मुख्य वजह माना जा रहा है। केंद्र सरकार ने सेमीकंडक्टर बनाने के लिए जो पीएलआई स्कीम के तहत आकर्षक आर्थिक इंसेंटिव दिए हैं, उनमें कई राज्य सरकारों ने अपनी तरफ से भी छूट जोड़ी है। इससे विदेशी और देश के निवेशकों को भारत में प्रोजेक्ट लगाना पहले से आसान और फायदेमंद लगने लगा है।

इस बढ़ते उत्साह की वजह से सिर्फ अरबों डॉलर का कारोबार करने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि कई नए और उभरते स्टार्टअप भी इस सेक्टर में उतर रहे हैं। खासकर ये नए खिलाड़ी चिप पैकेजिंग, टेस्टिंग और असेंबली यानी एटीएमपी (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग एंड पैकेजिंग) सुविधाएं शुरू करने पर फोकस कर रहे हैं। केंद्र सरकार से मंजूर सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को तुरंत जमीन, बिना रुकावट बिजली और पानी की सुविधा देने के लिए अलग-अलग राज्य सरकारों के बीच अच्छी होड़ देखने को मिल रही है, जिससे आने वाले समय में इस सेक्टर का विस्तार और तेज होगा।

सेमीकंडक्टर और औद्योगिक विकास की इस दौड़ में ओडिशा राज्य एक बड़े आकर्षण केंद्र के तौर पर उभरा है। ओडिशा सरकार ने कटक और भुवनेश्वर के बीच करीब 178 एकड़ जमीन पर एक बड़ा और अत्याधुनिक इंडस्ट्रियल व सेमीकंडक्टर हब बनाने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में ही कई बड़ी कंपनियों ने निवेश की इच्छा जताते हुए करारों पर साइन किए हैं।

इंडस्ट्रियल गैस सप्लाई करने वाली बड़ी कंपनी लिंडे इंडिया ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर बहुत पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया है। लिंडे इंडिया के मैनेजमेंट ने ओडिशा के मुख्यमंत्री से मुलाकात कर राज्य में सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन के लिए जरूरी इंडस्ट्रियल गैस सप्लाई पर विस्तार से बातचीत की। कंपनी ने गोपालपुर में अतिरिक्त जमीन ली है और कटक के सेमीकंडक्टर पार्क में मिलने वाले मौकों को तलाशना शुरू कर दिया है। ओडिशा सरकार की तरफ से निवेशकों को दी जा रही इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं और तुरंत मिलने वाले प्रशासनिक सपोर्ट की वजह से आने वाले समय में ओडिशा में हजारों नौकरियों के मौके बनेंगे।

दुनियाभर में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर की सप्लाई चेन को और मजबूत करने के लिए भारत की यह पहल बहुत अहम मानी जा रही है। लिंडे इंडिया जैसी ग्लोबल नेटवर्क वाली कंपनियां लगातार दुनिया की बड़ी सेमीकंडक्टर कंपनियों के संपर्क में हैं और उन्हें भारत में निवेश के मौकों की जानकारी दे रही हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की साफ पॉलिसी, करोड़ों डॉलर की सीधी विदेशी निवेश (एफडीआई), नए लोकल एंटरप्रेन्योर्स की भागीदारी और ओडिशा जैसे राज्यों की पहल की वजह से इंडस्ट्री का मानना है कि आने वाले सालों में भारत सिर्फ चिप इंपोर्ट करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया को सेमीकंडक्टर सप्लाई करने वाला एक बड़ा देश बनेगा।

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