मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:02 IST

साठ के बाद बार-बार भूलने की आदत, अल्जाइमर के लक्षण वक्त पर पहचानना जरूरी

साठ साल की उम्र के बाद याददाश्त कमजोर होना अल्झायमर का शुरुआती संकेत हो सकता है, समय रहते लक्षण पहचानना जरूरी है।

साठ के बाद बार-बार भूलने की आदत, अल्जाइमर के लक्षण वक्त पर पहचानना जरूरी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

उम्र साठ पार करने के बाद कई लोगों की याददाश्त धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है और वो रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातें भूलने लगते हैं। ये सिर्फ उम्र का असर नहीं, बल्कि अल्झायमर नाम की बीमारी का मुख्य कारण भी हो सकता है। याददाश्त कम होना, जरूरी जानकारी याद न रहना, तारीखें भूल जाना, ये सारी निशानियां अल्झायमर जैसी बीमारी में दिखती हैं।

अल्झायमर एक ऐसी बीमारी है जो इंसान की याददाश्त, सोचने की क्षमता और उसके बर्ताव पर असर डालती है। ये बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों में देखी जाती है, मगर इसके लक्षण काफी पहले से दिखना शुरू हो जाते हैं। अगर मरीज जल्द से जल्द मदद ले ले, तो बीमारी की रफ्तार धीमी करने और जिंदगी की क्वालिटी बनाए रखने में काफी फायदा होता है। देश और बाकी देशों को मिलाकर 55 लाख से ज्यादा लोग अल्झायमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं।

अल्झायमर से पीड़ित व्यक्ति बार-बार नाम भूल जाता है, दी हुई जानकारी याद नहीं रख पाता, एक ही सवाल बार-बार पूछता है और जरूरी तारीखें व घटनाएं भूल जाता है। ऐसे मरीज को ध्यान लगाने में भी दिक्कत आ सकती है। समय और जगहों के नाम याद न रहना, आंखों के सामने की चीजों और जगह को समझने में परेशानी होना, जैसे पढ़ने में दिक्कत आना, रंगों में फर्क न पहचान पाना, बोलने और लिखने में रुकावट आना, ये सब भी इसके लक्षण हैं।

अल्झायमर के मरीज को अक्सर उलझन और थकान महसूस होती है, ऐसे में वो अपने शौक, सामाजिक कार्यक्रम या पसंदीदा काम से दूर होने लगते हैं। दोस्तों से मिलने-जुलने और सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने की इच्छा भी उनमें खत्म हो जाती है। ऐसा मरीज अक्सर उलझा हुआ, शक करने वाला, उदास, डरा हुआ या चिंतित रहता है। ये लक्षण जल्दी पहचान लेने से मरीज या उसके परिवार को इलाज शुरू करने, आगे की योजना बनाने और सपोर्ट सर्विस तक पहुंचने का मौका मिल जाता है। अभी तक इसका कोई पक्का इलाज नहीं है, लेकिन लक्षणों को संभालने, दिमाग की सेहत सुधारने और बीमारी बढ़ने की रफ्तार धीमी करने के तरीके जरूर मौजूद हैं।

अल्झायमर के मरीजों में कम से कम दो-तीन ऐसे फैक्टर एक साथ पाए जाते हैं, जिनमें ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियां शामिल हैं। इसके अलावा शारीरिक गतिविधि की कमी और नशे की लत भी इसकी वजह बन सकती है। अल्झायमर के मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, बुजुर्गों की बीमारियों के एक्सपर्ट और काउंसलर की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम मिलकर काम करती है। ये टीम जल्दी डायग्नोसिस और जांच, मरीज के हिसाब से बनाई गई इलाज और मेमोरी केयर प्लान, परिवार और देखभाल करने वालों को सपोर्ट, एडवांस्ड इमेजिंग और कॉग्निटिव असेसमेंट के टूल, साथ ही याददाश्त, सोच और भावनात्मक सेहत सुधारने की थेरेपी जैसी सुविधाएं देती है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को अल्झायमर जैसी दिक्कत महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें, जल्द से जल्द एक्सपर्ट डॉक्टर, काउंसलर और प्रोफेशनल की सलाह लें।

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