सातारा जिपः मॉडेल स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर राष्ट्रवादी शरद पवार गुट आक्रामक
प्रवीण धस्के ने अंगापूर, वर्ये और अपशिंगे के मॉडेल स्कूलों में शिक्षकों की कमी का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
सातारा जिला परिषद के वर्णे गुट के तहत आने वाले अंगापूर, वर्ये और अपशिंगे के मॉडेल स्कूलों पर लाखों रुपये खर्च तो किए जा रहे हैं, लेकिन बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक ही मौजूद नहीं हैं। यह आरोप राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार पक्ष के प्रदेश महासचिव प्रवीण धस्के ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाया। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर इन तीनों स्कूलों में जल्द शिक्षक उपलब्ध नहीं कराए गए तो तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
धस्के के मुताबिक अपशिंगे के स्कूल में 468 बच्चे पढ़ते हैं, अंगापूर में करीब 200 और वर्णे के स्कूल में 250 विद्यार्थी हैं। इतने बच्चों के लिए तीनों स्कूलों को मिलाकर कुल नौ शिक्षकों की जरूरत है, जबकि असल में सिर्फ पांच शिक्षक ही काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि इसी वजह से बच्चों की पढ़ाई की क्वालिटी पर सीधा असर पड़ रहा है।
यह मुद्दा नया नहीं है, धस्के ने बताया कि उन्होंने दिशा समिति की बैठक में जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी यशनी नागराजन के सामने दो बार यह बात रखी। इसके अलावा प्राथमिक शिक्षणाधिकारी नायकवडी से भी तीन अलग-अलग बैठकों में शिक्षक भेजने की मांग की गई। लेकिन उनके मुताबिक अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
धस्के ने एक और अहम बात उठाई कि जिला परिषद की स्मार्ट स्कूल योजना में ये तीनों स्कूल शामिल तो हैं, पर इनके लिए केंद्रप्रमुख और विस्तार अधिकारी तक नहीं दिए गए हैं। उनका सवाल था कि जब स्कूलों के भौतिक ढांचे पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो शिक्षा विभाग की यह जिम्मेदारी नहीं बनती कि वहां पढ़ाने वाला स्टाफ भी मुहैया कराए।
इसी क्रम में उन्होंने जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कामकाज पर भी सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि उनके केबिन में जाने की हिम्मत तक पदाधिकारी नहीं जुटा पाते। धस्के ने ग्रामविकास मंत्री जयकुमार गोरे से मांग की कि वे इस मामले का संज्ञान लेकर नायकवडी को वहां से हटाएं और किसी जिम्मेदार शिक्षणाधिकारी की नियुक्ति करें।
धस्के ने यह भी बताया कि इन तीनों स्कूलों को सीएसआर के जरिए करीब 50 लाख रुपये का फंड मिला था, लेकिन जिन व्यक्तियों या संस्थाओं ने यह फंड दिया, उनका नाम स्कूलों में कहीं दर्ज नहीं है। उन्होंने मांग की कि प्रशासकीय कार्यकाल के दौरान हुई टेंडर प्रक्रिया की जांच खुद मुख्य कार्यकारी अधिकारी यशनी नागराजन करें।
अंत में धस्के ने साफ कर दिया कि अगर इन सभी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जिला परिषद के सामने तीव्र आंदोलन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि सातारा शहर में जिला परिषद की जमीनें बचाने के लिए वे कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे।