मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:55 IST

सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को, इस दिन खाने और बर्तनों के ये नियम न तोड़ें

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की आखिरी तिथि सर्वपितृ अमावस्या शनिवार, 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी। खान-पान, समय, बर्ताव और बर्तनों को लेकर बताई गई बातें।

सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को, इस दिन खाने और बर्तनों के ये नियम न तोड़ें
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष का आखिरी दिन सर्वपितृ अमावस्या कहलाता है। सनातन धर्म में इसकी खास जगह है। यह पवित्र दिन शनिवार, 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। सर्वपितृ अमावस्या को पितृपक्ष की आखिरी और अहम तिथि माना जाता है। इस दिन पूर्वजों का स्मरण और पूजा की जाती है। शास्त्रों के मुताबिक इस दिन श्रद्धा से किए गए काम से पूर्वज प्रसन्न होते हैं।

बताया गया है कि इस दिन कुछ बातों को लेकर सावधान रहना बहुत जरूरी है। जानबूझकर या अनजाने में हुई एक चूक के भी गंभीर नतीजे हो सकते हैं। पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहे और कोई पाप न लगे, इसके लिए कुछ चीजें पूरी तरह टालनी चाहिए।

पहली बात खाने की है। सर्वपितृ अमावस्या पर घर में तामसिक चीजें नहीं खानी चाहिए। मांस, प्याज, लहसुन, अंडा और शराब पर सख्त मनाही है। इस मौके पर सिर्फ सात्विक पदार्थ ही बनाने चाहिए। सात्विक और शुद्ध आहार लेने का धार्मिक महत्व बताया गया है। श्राद्ध के लिए तैयार होने वाला खाना साफ-सफाई और सात्विकता का ध्यान रखकर बनाया जाता है।

दूसरी बात समय की है। श्राद्ध की विधि शाम के वक्त कभी नहीं करनी चाहिए। सूर्यास्त के बाद गलती से भी श्राद्ध या तर्पण न करें, क्योंकि ऐसा करने से पूर्वज अप्रसन्न होते हैं। इसलिए सारे धार्मिक विधि दोपहर के समय ही पूरे कर लेने चाहिए। विधि शुरू करने से पहले खाने की शुद्धता और सही वक्त की तसल्ली कर लेना ठीक रहता है।

तीसरी बात बर्ताव की है। इस पवित्र दिन अपने आचरण पर खास काबू रखना जरूरी है। दरवाजे पर आए किसी भी इंसान या जानवर को लौटाना नहीं चाहिए। भिखारी, मेहमान या जानवर, खासकर कौआ, कुत्ता या गाय, दरवाजे पर आए तो उन्हें खाली हाथ न भेजें और न ही डांटें।

इसके अलावा सर्वपितृ अमावस्या पर बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना और नाखून काटना सख्त मना है। परिवार में झगड़े भी इस दिन टालने चाहिए। घर में किसी तरह का विवाद, गुस्सा या अनादर न हो। परिवार में पूरी शांति और मेलजोल का माहौल बनाए रखें। कहा गया है कि शांत मन से की गई उपासना ही फलदायी होती है।

चौथी बात बर्तनों की है। इस दिन खाने की शुद्धता के साथ बर्तनों का चुनाव भी बहुत अहम है। घर में सिर्फ शुद्ध, सात्विक खाना ही बनना चाहिए। श्राद्ध का खाना बनाते या परोसते वक्त लोहे, स्टील या प्लास्टिक के बर्तन इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इनकी जगह कांसा, तांबा, पीतल या पत्तों का इस्तेमाल शास्त्र के हिसाब से ठीक माना जाता है। कहा गया है कि सही बर्तन और शुद्ध भोजन ही पूर्वजों को संतुष्ट करते हैं।

(धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई जैसे विषयों की जानकारी सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए है। इस बारे में कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकारों की सलाह जरूरी है।)

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