सर्वपित्री अमावस्या 10 अक्टूबर को, घर में न लाएं ये चार तरह की चीजें
पितृपक्ष का आखिरी दिन 10 अक्टूबर को है। मान्यता के मुताबिक इस दिन लोहा, सरसों का तेल, धारदार सामान और अपने लिए नए कपड़े-चप्पल खरीदना ठीक नहीं माना जाता।
इन दिनों पितृपक्ष का पखवाड़ा चल रहा है। हिंदू पंचांग के हिसाब से यह वक्त पूर्वजों के लिए बहुत अहम माना जाता है। दादा-दादी और पुरखों के प्रति कृतज्ञता जताने के लिए ये दिन माने जाते हैं। इस बार सर्वपित्री अमावस्या 10 अक्टूबर को है और इस अमावस्या के बाद पितृपक्ष की अवधि खत्म हो जाएगी। इसे पितृमोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है।
जिन लोगों को अपने पितर के निधन की तारीख मालूम नहीं होती, उनका श्राद्ध इसी दिन किया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद घर पर बना रहता है। शास्त्र में यह भी बताया गया है कि इस दिन कुछ चीजें घर में लाना बहुत अशुभ होता है, इसलिए उन्हें गलती से भी नहीं खरीदना चाहिए।
पहली चीज है लोहा। सर्वपित्री अमावस्या के दिन लोहे का सामान या लोहे से बनी कोई भी चीज घर में नहीं लानी चाहिए। मान्यता है कि अमावस्या को लोहा लाने से शनि दोष लगता है, घर में पैसों की तंगी रहती है और धन का नुकसान होता है। इसलिए इस दिन लोहे के बर्तन या लोहे का सामान न खरीदें। कुछ लेना ही हो तो एक दिन पहले या एक दिन बाद ले लें।
दूसरी चीज है सरसों का तेल। अमावस्या के दिन सरसों का तेल घर में लाना अशुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सरसों के तेल का संबंध शनि देव से है। कहा जाता है कि इस दिन तेल लाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा आती है, बुरे नतीजे भुगतने पड़ते हैं और कई अड़चनों का सामना करना पड़ता है। इसलिए राशन की खरीदारी करते वक्त सरसों के तेल को लिस्ट से निकाल दें।
तीसरी चीज है सुई और चाकू जैसी धारदार चीजें। बताया जाता है कि इस दिन घर में धारदार सामान नहीं लाना चाहिए। सुई, कैंची, चाकू, कील और हथियार जैसी चीजें खरीदने से बचें। मान्यता के अनुसार ऐसी चीजें लाने से घर के लोगों में झगड़े बढ़ते हैं, बहस होती है और घर की शांति चली जाती है। इसके अलावा नकली या प्लास्टिक का सामान और खोटे गहने भी इस दिन न लें, इनसे भी अशुभ फल मिलता है।
चौथी बात अपने लिए नए कपड़े और चप्पल की है। पितृपक्ष मौज-मस्ती का वक्त नहीं है, इन दिनों में पितरों को याद करना और उन्हें प्रसन्न करना होता है। इसलिए सर्वपित्री अमावस्या को अपने लिए नए कपड़े, जूते या चप्पल न खरीदें। कहा जाता है कि ऐसा करने से पितर नाराज होते हैं और जिंदगी पर उसका बुरा असर पड़ता है। नए कपड़े लेने हों तो नवरात्रि में लें, अमावस्या को नहीं।
इन चीजों से बचने के साथ कुछ अच्छे काम भी करने चाहिए। इस दिन सुबह जल्दी उठकर पितरों के लिए तर्पण करें। ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान करें। घर में दक्षिण दिशा में दीया जलाएं। कहा जाता है कि इससे पितर प्रसन्न होते हैं, घर में सुख-समृद्धि रहती है और उनका आशीर्वाद बना रहता है। कुल मिलाकर 10 अक्टूबर को जरा संभलकर रहें और शॉपिंग के चक्कर में ये चीजें घर न लाएं, वरना छोटी सी गलती से बड़ी अड़चनें आ सकती हैं।