SAIL ने मंगोलिया से मंगवाया एक टन कोकिंग कोयले का सैंपल, ऑस्ट्रेलिया का विकल्प तलाश
सरकारी स्टील कंपनी SAIL कोकिंग कोयले के नए सोर्स ढूंढ रही है और मंगोलिया से सैंपल मंगवाकर उसकी जांच करेगी।
सरकारी स्टील कंपनी SAIL ने कोकिंग कोयले की सप्लाई के लिए नए सोर्स ढूंढना शुरू कर दिया है। इसी कोशिश में कंपनी ने मंगोलिया से एक टन कोकिंग कोयले का सैंपल मंगवाया है। अब इसकी जांच होगी कि यह कोयला स्टील बनाने के काम में कितना कारगर है।
भारत अपनी कोकिंग कोयले की जरूरत का करीब 95 टक्के हिस्सा इंपोर्ट से पूरा करता है। इसमें ऑस्ट्रेलिया का बड़ा हिस्सा है। स्टील बनाने की लागत में कोकिंग कोयले का अहम हिस्सा होता है, इसलिए उसके दाम और सप्लाई में जो भी बदलाव आता है, उसका सीधा असर स्टील इंडस्ट्री पर पड़ता है। यही वजह है कि SAIL ऑस्ट्रेलिया के साथ दूसरे देशों से भी सप्लाई के विकल्प देख रही है।
मंगोलिया से मंगाए गए सैंपल की क्वालिटी परखी जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि स्टील बनाने में यह कितना काम आता है और कमर्शियल इस्तेमाल की गुंजाइश कितनी है। अगर जांच के नतीजे अच्छे आए, तो आगे चलकर मंगोलिया से बड़े पैमाने पर कोकिंग कोयला खरीदने का रास्ता खुल सकता है।
लेकिन मंगोलिया से कोयला भारत लाना आसान नहीं है। मंगोलिया चारों तरफ से जमीन से घिरा देश है। उसकी एक तरफ चीन है और दूसरी तरफ रशिया। इसलिए वहां से कोयला भारत तक पहुंचाना बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है। चीन के रास्ते ले जाने की बजाय रशिया के रास्ते लंबा रूट लेना पड़ सकता है, जिससे ढुलाई का खर्च बढ़ने की संभावना है।
इंडस्ट्री के विश्लेषण में कहा गया है कि मंगोलिया के कोकिंग कोयले की क्वालिटी अच्छी है। फिर भी भारत के लिए आखिरी फैसला लेते वक्त सिर्फ क्वालिटी नहीं देखी जाएगी। ढुलाई का खर्च, रूट कितना चलने लायक है और लंबे समय तक सप्लाई कैसी रहेगी, इन सब बातों पर भी गौर किया जाएगा।
देश में स्टील का उत्पादन बढ़ रहा है, इसलिए आने वाले वक्त में कोकिंग कोयले की मांग भी बढ़ने की संभावना है। देश में जो कोयला मिलता है, वह स्टील इंडस्ट्री की पूरी जरूरत पूरी नहीं कर सकता। इसलिए इंपोर्ट पर निर्भरता बनी रहने की संभावना है।
मंगोलिया के साथ भारत रशिया, मोझांबिक और अमेरिका जैसे देशों से भी कोकिंग कोयले की सप्लाई बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। SAIL के मंगोलिया सैंपल की जांच का नतीजा आने और ढुलाई के खर्च की स्टडी होने के बाद ही अगला फैसला लिया जाएगा।