मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:43 IST

रॉ और आईबी प्रमुखों की बेसिक सैलरी बराबर, भत्तों में है फर्क

देश की दो सबसे अहम गुप्तचर संस्थाओं रॉ और आईबी के प्रमुखों की सैलरी को लेकर सामने आई जानकारी

रॉ और आईबी प्रमुखों की बेसिक सैलरी बराबर, भत्तों में है फर्क
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

देश की सुरक्षा में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ और इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी, दोनों की भूमिका बहुत अहम मानी जाती है। रॉ का काम विदेशों में जाकर गुप्त जानकारी जुटाना है, जबकि आईबी देश के भीतर सुरक्षा और गुप्त हलचलों पर नजर रखती है। दोनों ही संस्थाओं के प्रमुखों का पद सरकार में बेहद संवेदनशील और जिम्मेदारी वाला पद माना जाता है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों पदों की सैलरी में एक तकनीकी फर्क है।

अगर कोई सोचता है कि रॉ प्रमुख को आईबी प्रमुख से ज्यादा पगार मिलता है, या इसके उलट, तो यह सोच गलत है। नियमों के मुताबिक रॉ प्रमुख और आईबी डायरेक्टर, दोनों की बेसिक सैलरी पूरी तरह बराबर होती है। भारत सरकार ने सातवें वेतन आयोग यानी 7th Pay Commission के तहत इन दोनों ही टॉप पदों को अपेक्स स्केल यानी पे लेवल 17/18 में रखा है। इस स्केल के हिसाब से दोनों अधिकारियों को हर महीने 2,25,000 रुपये की फिक्स बेसिक सैलरी मिलती है। यह वेतनमान भारत के कैबिनेट सेक्रेटरी या सरकार के सचिव रैंक के अधिकारियों के बराबर होता है।

बेसिक पगार भले बराबर हो, यानी 2.25 लाख रुपये, लेकिन हाथ में आने वाली कुल सैलरी में दोनों के बीच थोड़ा अंतर आ जाता है। इसकी वजह है दोनों संस्थाओं के काम करने का तरीका और उन्हें मिलने वाले भत्ते।

रॉ का मुख्य काम देश से बाहर जाकर गुप्त जानकारी जुटाना है। इसलिए रॉ के अफसरों और प्रमुख को खास तौर पर फॉरेन सर्विंग अलाउंस यानी विदेशी सेवा भत्ता और सिक्रेसी अलाउंस मिलता है। जब यह भत्ते, महंगाई भत्ता और बाकी सुविधाएं जोड़ी जाती हैं, तो रॉ प्रमुख की कुल मासिक सैलरी 3.5 लाख से 4 लाख रुपये तक पहुंच जाती है।

दूसरी तरफ आईबी का मुख्य काम देश के भीतर रहकर आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई देखना है। आईबी के डायरेक्टर को बेसिक सैलरी के साथ 20 फीसदी स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस यानी विशेष सुरक्षा भत्ता, महंगाई भत्ता और बाकी सरकारी सुविधाएं मिलती हैं। आईबी का काम मुख्य रूप से देश के भीतर होने की वजह से इसमें रॉ जैसे विदेशी भत्ते शामिल नहीं होते।

आईबी को दुनिया की सबसे पुरानी गुप्तचर संस्थाओं में गिना जाता है। अंग्रेजों के जमाने में डायरेक्टर ऑफ इंटेलिजेंस ब्यूरो को हर महीने 3,500 रुपये पगार मिलता था, जो आजादी के बाद घटकर 2,500 रुपये हो गया था। इसके बावजूद यह देश का इकलौता पुलिस अफसर पद था जिसे अपेक्स पे स्केल मिलता था। बाद में बीएसएफ और सीआरपीएफ प्रमुखों को भी यही दर्जा दिया गया। इस तरह पगार के मामले में रॉ और आईबी के प्रमुख लगभग बराबर ही हैं।

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