मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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20:04 IST

रेलवे सुरक्षा बल का स्थापना दिवस 20 सितंबर को, जानिए इतिहास और खास अभियान

रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स यानी RPF हर साल 20 सितंबर को अपना स्थापना दिवस मनाता है। जानिए इस बल का इतिहास और यात्रियों की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे खास अभियान।

रेलवे सुरक्षा बल का स्थापना दिवस 20 सितंबर को, जानिए इतिहास और खास अभियान
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन माना जाता है। रोज लाखों ट्रेनों में करोड़ों यात्री सफर करते हैं। इतने बड़े रेलवे नेटवर्क की सुरक्षा बनाए रखना, रेलवे की अरबों रुपये की संपत्ति की रखवाली करना और यात्रियों को सुरक्षित सफर का भरोसा देना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। यह जिम्मेदारी पूरी निष्ठा और बहादुरी से निभाने वाले रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स यानी RPF का स्थापना दिवस हर साल 20 सितंबर को देशभर में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ एक बल का उत्सव नहीं, बल्कि रेलवे कर्मचारियों की निस्वार्थ सेवा और समर्पण को सलाम करने का दिन है।

रेलवे की संपत्ति की हिफाजत के लिए शुरुआत में एक साधारण सुरक्षा बल बनाया गया था। इसके लिए 1957 में संसद में रेलवे संरक्षण दल कानून पास हुआ। लेकिन बढ़ती क्राइम, चोरी की घटनाएं और यात्रियों की सुरक्षा की बढ़ती अहमियत को देखते हुए इस बल को ज्यादा ताकत और अधिकार देने की जरूरत महसूस होने लगी। इसी वजह से 20 सितंबर 1985 को संसद ने कानून में बदलाव करके RPF को केंद्र सरकार के सशस्त्र बल का दर्जा दे दिया। इसी ऐतिहासिक फैसले की याद में हर साल 20 सितंबर को RPF Raising Day मनाया जाता है। साल 2003 में RPF कानून में फिर बदलाव हुआ, जिसके बाद इस बल को यात्रियों की सुरक्षा, अपराधों की जांच और आरोपियों पर सीधी कार्रवाई करने के अधिकार मिले।

स्थापना दिवस के मौके पर देशभर के रेलवे मंडलों और मुख्यालयों में परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सुरक्षा से जुड़े प्रदर्शन होते हैं। इस दिन बेहतरीन काम करने वाले जवानों और अफसरों को खास मेडल देकर सम्मानित किया जाता है। इसके अलावा स्टेशनों पर यात्रियों के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, जिसमें पटरी पार करने, चलती ट्रेन में चढ़ने-उतरने, अनजान चीजों या लोगों से सावधान रहने और इमरजेंसी में मदद कैसे मिले, इस बारे में लोगों को समझाया जाता है।

आज के दौर में RPF सिर्फ अपराध रोकने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने अपने काम में इंसानी और संवेदनशील नजरिया भी अपनाया है। महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए मेरी सहेली नाम से खास अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें अकेली सफर करने वाली महिलाओं को पूरे सफर में सुरक्षा का भरोसा दिया जाता है। ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत मानव तस्करी से बचाए गए या घर से भागे हुए बच्चे, जो रेलवे स्टेशनों पर मिलते हैं, उन्हें सुरक्षित तरीके से उनके पैरंट्स को सौंपा जाता है। ऑपरेशन जीवन रक्षा के जरिए चलती ट्रेन में चढ़ते-उतरते वक्त फिसलकर गिरने वाले यात्रियों की जान RPF के जवान अपनी जान जोखिम में डालकर बचाते हैं। ड्रग्स की तस्करी रोकने के लिए ऑपरेशन नार्कोस भी काफी कामयाब साबित हो रहा है।

बदलते वक्त के साथ RPF ने टेक्नोलॉजी को भी अपनाया है। बड़े रेलवे स्टेशनों पर इंटिग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम, फेशियल रिकग्निशन वाले सीसीटीवी कैमरे, मेटल डिटेक्टर और ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल हो रहा है। किसी भी सुरक्षा से जुड़ी दिक्कत होने पर यात्री 139 हेल्पलाइन नंबर या रेल मदद पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत मिलते ही अगले स्टेशन पर RPF के जवान मदद के लिए तुरंत पहुंच जाते हैं। RPF के 50 हजार से ज्यादा जवानों का यह दस्ता देश के हर कोने में 24 घंटे मुस्तैद रहकर रेल सफर को आसान बना रहा है। इसी बेमिसाल योगदान की वजह से करोड़ों यात्री रोज बेफिक्र होकर ट्रेन से सफर कर पाते हैं।

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