राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं, एआई जवाब दे सकता है, सही सवाल पूछना हमारा काम
वडोदरा की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मल्टीडिसिप्लिनरी पढ़ाई पर जोर दिया, 229 स्टूडेंट्स को पीएचडी डिग्री मिली।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि आज के जमाने की उलझी हुई समस्याओं का हल किसी एक विषय से नहीं निकलता, इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों के ज्ञान को साथ लाना पड़ता है। उन्होंने हायर एजुकेशन में मल्टीडिसिप्लिनरी अप्रोच अपनाने की अपील की।
राष्ट्रपति ने कहा कि क्लाइमेट चेंज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), गरीबी हटाना और लोकतंत्र जैसे मुद्दे इतने पेचीदा हो गए हैं कि इनका जवाब सिर्फ एक फील्ड से मिलना मुश्किल है।
स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि एआई भले ही जवाब दे सकता है, लेकिन उससे सही सवाल पूछना हमारी अपनी जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि टेक्नोलॉजी तो तेजी से काम करती है, पर उसका इस्तेमाल किस तरह किया जाए, यह सोचना स्टूडेंट्स का काम है।
यह बात राष्ट्रपति मुर्मू ने गुजरात के वडोदरा में महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी के 75वें दीक्षांत समारोह में कही। उन्होंने बताया कि इस यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के इतने सारे विषय हैं कि ज्ञान की अलग-अलग शाखाओं को आपस में जोड़ने का मौका मिलता है। उनके मुताबिक यह यूनिवर्सिटी आर्ट्स से लेकर साइंस तक, टेक्नोलॉजी से मेडिसिन तक, लॉ से सोशल साइंस तक, फाइन आर्ट्स से परफॉर्मिंग आर्ट्स तक और मैनेजमेंट से जर्नलिज्म तक, ज्ञान के कई क्षेत्रों में पढ़ाई कराती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि समाज के सामने आने वाली दिक्कतें अब आपस में इतनी जुड़ी हुई हैं कि इन्हें सुलझाने के लिए अलग-अलग विषयों का ज्ञान जरूरी हो गया है। उनके मुताबिक क्लाइमेट चेंज सिर्फ एनवायरनमेंट साइंस का मसला नहीं है, एआई सिर्फ कंप्यूटर साइंस का विषय नहीं है, हेल्थ सिर्फ मेडिकल साइंस से नहीं जुड़ा, गरीबी मिटाना अकेले इकोनॉमिस्ट का काम नहीं है, और लोकतंत्र सिर्फ पॉलिटिकल साइंस का सब्जेक्ट नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि अब इन तमाम समस्याओं का हल निकालने के लिए अलग-अलग विषयों को साथ लेकर, यानी मल्टीडिसिप्लिनरी तरीके से काम करने की जरूरत है।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि स्टूडेंट्स को अब सिर्फ अपनी पढ़ाई के एक खास विषय तक सीमित रहने की बजाय अलग-अलग चीजों की जानकारी और अपनी सोच को बढ़ाने की जरूरत है। उनके मुताबिक स्टूडेंट्स में एक साइंटिस्ट जैसी जिज्ञासा, एक आर्टिस्ट जैसी सेंसिटिविटी, एक हिस्टोरियन जैसी नजर, इकोनॉमिक्स जैसी समझ और सोशियोलॉजी जैसी चेतना होनी चाहिए।
इस दीक्षांत समारोह में 229 स्टूडेंट्स को डॉक्टर ऑफ फिलॉसॉफी यानी पीएचडी डिग्री दी गई। इसके अलावा 2,857 स्टूडेंट्स को मास्टर डिग्री, 8,863 स्टूडेंट्स को बैचलर डिग्री और 657 स्टूडेंट्स को पोस्टग्रैजुएट डिप्लोमा के लिए योग्य माना गया।