रामटेक-तुमसर हाईवे पर हादसा: बाइक को ट्रक ने मारी टक्कर, दादी की मौत, पोती गंभीर
रामटेक-तुमसर स्टेट हाईवे नंबर ७५३ पर १९ सितंबर को दोपहर बाइक सवार दादी-पोती को अज्ञात ट्रक ने टक्कर मारी, जिसमें दादी की मौत हो गई और नाबालिग पोती गंभीर घायल हो गई।
रामटेक-तुमसर स्टेट हाईवे नंबर ७५३ पर मुरमुरा भट्टी के पास समाधान बाइक सर्विसिंग सेंटर के सामने १९ सितंबर की दोपहर करीब साढ़े बारह बजे एक भीषण हादसा हुआ। इस हादसे में ६१ साल की एक महिला की मौत हो गई, जबकि उनकी १७ साल की पोती गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे में शामिल बाइक चला रही लड़की नाबालिग निकली, जिसके बाद इलाके में पैरेंट्स की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक पारशिवनी तालुका के बोरडा (गणेशी) गांव की रहने वाली १७ साल की आर्या परमेश्वर हारोडे अपनी करीब ६१ साल की दादी रायाबाई मोतीलाल नानुरे के साथ इलाज के लिए रामटेक के श्रीराम मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल आई थीं।
अस्पताल से इलाज कराकर दोनों बाइक से वापस बोरडा लौट रही थीं। इसी दौरान रामटेक-तुमसर हाईवे पर मुरमुरा भट्टी के पास समाधान बाइक सर्विसिंग सेंटर के सामने वाले मोड़ पर तुमसर से मनसर की तरफ जा रहे तनस (भूसी) से भरे एक अज्ञात आयशर ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।
टक्कर लगते ही बाइक चला रही आर्या को गंभीर चोटें आईं, वहीं पीछे बैठी उनकी दादी रायाबाई नानुरे सड़क पर गिर गईं, जिससे उनके सिर पर गंभीर चोट लगी और सिर से भारी मात्रा में खून बहने लगा।
हादसा देखकर आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत दोनों को रामटेक के उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद रायाबाई नानुरे को मृत घोषित कर दिया। घायल आर्या का इलाज अभी अस्पताल में चल रहा है।
इस बीच जानकारी है कि टक्कर मारने के बाद तनस से भरा वह अज्ञात ट्रक मौके से फरार हो गया। इस मामले में रामटेक पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और फरार ट्रक की तलाश के साथ आगे की जांच शुरू कर दी है।
इस हादसे ने एक बार फिर नाबालिग बच्चों के हाथ में बाइक थमाने के गंभीर मुद्दे को सामने ला दिया है। शहर हो या गांव, कई जगहों पर नाबालिग बच्चे खुलेआम बाइक चलाते नजर आते हैं, कभी पैरेंट्स की इजाजत से तो कभी उनकी जानकारी के बिना। लेकिन गाड़ी चलाने का अनुभव और ट्रैफिक नियमों की जानकारी न होने की वजह से ऐसी गलतियां जानलेवा साबित हो सकती हैं।
पैरेंट्स को अपने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नाबालिग बच्चों के हाथ में बाइक देने से बचना चाहिए, और बच्चों को भी गाड़ी चलाने की जिद न करते हुए खुद के साथ-साथ सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की जिंदगी की जिम्मेदारी समझनी चाहिए। एक पल की लापरवाही पूरे परिवार की जिंदगी बदल सकती है, इसलिए नियमों का पालन करें, नाबालिग बच्चों को गाड़ी न दें और सुरक्षित सफर को प्राथमिकता दें।