पुतिन की नाटो को चेतावनी: कैलिनिनग्राद पर हमला हुआ तो परमाणु हथियारों से जवाब देंगे
मॉस्को के वाल्दाई क्लब फोरम में बोलते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कैलिनिनग्राद को लेकर नाटो को साफ शब्दों में चेताया।
रूस और यूक्रेन के बीच कई महीनों से चल रही जंग अब एक नए और ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। रूस और पश्चिमी देशों के सैन्य संगठन नाटो (NATO) के बीच बढ़ता तनाव सीधे परमाणु हथियारों की धमकियों तक आ गया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नाटो को बहुत साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि रूस के किसी भी हिस्से, खासकर कैलिनिनग्राद, पर हमला करने या उसकी नाकेबंदी की कोशिश हुई तो मॉस्को अपनी पूरी ताकत लगाएगा और परमाणु हथियारों समेत सभी आधुनिक हथियारों से जवाब देगा। पुतिन ने यह भी कहा कि यूरोपीय देश तनाव बढ़ाने और आग से खेलने वाले खतरनाक खेल फौरन बंद करें।
पुतिन ने यह बयान मॉस्को में हुए मशहूर वाल्दाई क्लब फोरम (Valdai Club Forum) के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए दिया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "रूस यूरोपीय देशों पर हमला करने या उन पर चढ़ाई करने की कोई योजना नहीं बना रहा। लेकिन अगर कोई रूस की संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश करेगा, तो हम चुप नहीं बैठेंगे।" उन्होंने यह दावा भी किया कि रूस के पास आज ऐसे बेहद एडवांस और आधुनिक हथियार हैं, जो दुनिया के किसी और देश के पास नहीं हैं। नाटो रूस को डराने की कोशिश कर रहा है या नहीं, इस पर पुतिन बोले कि यह डराना नहीं है, यह हमें धमकाने वालों को दिया गया करारा जवाब है।
इसी कार्यक्रम में पुतिन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खास तारीफ की। पुतिन ने कहा कि रूस और यूक्रेन की लंबी जंग को शांति के रास्ते से खत्म करने और कूटनीतिक हल निकालने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के पास बहुत अच्छे, व्यावहारिक और असरदार विचार हैं। रूस ने दुनिया में शांति कायम करने के लिए भारत की ओर से किए जा रहे सच्चे प्रयासों का स्वागत किया है।
कैलिनिनग्राद रूस का बेहद अहम और भौगोलिक रूप से संवेदनशील इलाका है। यह मुख्य रूसी जमीन से अलग है और बाल्टिक समुद्र के किनारे नाटो के सदस्य देशों पोलैंड और लिथुआनिया के बीच बसा है। यहां रूस का मुख्य बाल्टिक नौसैनिक अड्डा है। इसके अलावा रूस ने यहां परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इस्कंदर मिसाइलें (Iskander Missiles) और बड़े सैन्य अड्डे तैनात किए हैं। इसी वजह से इस इलाके को रूस की सुरक्षा के लिहाज से बहुत अहम माना जाता है।
यूरोप में मौजूद रूसी दूतावासों से मिली जानकारी के मुताबिक मॉस्को को खबर मिली है कि नाटो देश कैलिनिनग्राद की हवाई और समुद्री नाकेबंदी की गुप्त तैयारी कर रहे हैं। आयरलैंड में रूसी दूतावास ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि अगर नाटो देशों ने कैलिनिनग्राद को बाकी रूस से काटने या उसकी सप्लाई रोकने की कोशिश की, तो रूस अपने इस इलाके और नागरिकों की रक्षा के लिए परमाणु हथियार इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा।
रूस ने यूरोपीय देशों के नेताओं पर जंग भड़काने और तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है। यूरोपीय खुफिया एजेंसियां और पश्चिमी नेता लगातार डर जता रहे हैं कि यूक्रेन के बाद रूस आने वाले कुछ सालों में दूसरे यूरोपीय देशों पर हमला कर सकता है। मॉस्को ने इन सारे आरोपों को पूरी तरह हास्यास्पद और बेबुनियाद बताकर खारिज कर दिया है। मॉस्को का कहना है कि पश्चिमी देश अपनी गलतियां छिपाने और अपने नागरिकों का ध्यान भटकाने के लिए रूस का डर दिखा रहे हैं।
दूसरी तरफ नाटो की प्रवक्ता ऐलिसन हार्ट ने रूस का दावा खारिज किया है। उन्होंने बताया कि रूस ने इस बारे में गठबंधन को एक लिखित संदेश भेजा है। नाटो ने कहा है कि परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की धमकी देना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने फिर दोहराया कि नाटो का कैलिनिनग्राद को निशाना बनाने या वहां सैन्य कार्रवाई करने का कोई इरादा नहीं है और संगठन सिर्फ बचाव की भूमिका में काम कर रहा है।
नाटो के महासचिव मार्क रुट्टे ने भी रूस से परमाणु धमकियां फौरन बंद करने और यूक्रेन के खिलाफ चल रही जंग से पीछे हटने की अपील की है। रुट्टे के मुताबिक रूस नाटो देशों में फूट डालने और यूक्रेन को मिल रही अंतरराष्ट्रीय मदद रोकने की कोशिश कर रहा है। लेकिन नाटो यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा और शांत रहकर रूस की हर चुनौती का सही जवाब देगा।
इस बीच, पिछले कुछ महीनों से बाल्टिक समुद्र के इलाके में जंग जैसे हालात बने हुए हैं। नाटो देशों ने यहां कई बड़े सैन्य अभ्यास किए हैं। समुद्र के नीचे की संचार केबल और एनर्जी पाइपलाइन की सुरक्षा के लिए 'ऑपरेशन बाल्टिक सेंट्री' (Operation Baltic Sentry) चलाया जा रहा है। इसके अलावा उत्तरी पोलैंड और बाल्टिक इलाके में अमेरिका के एडवांस 'EA-37B कंपास कॉल' विमानों के साथ बड़ा अभ्यास हुआ है, जो रडार और संचार सिस्टम को जाम करते हैं। इन सब घटनाओं से उत्तरी यूरोप में जंग की चिंगारी भड़कने की आशंका बढ़ी है और विश्व शांति खतरे में बताई जा रही है।