पुणे में बनेगा देश का पहला एर्गोनॉमिक्स रिसर्च सेंटर, सीओईपी और एआरएआय साथ आए
सीओईपी टेक यूनिवर्सिटी और एआरएआय पुणे के चिखली में 105 करोड़ रुपये के निवेश से एडवांस्ड एर्गोनॉमिक्स और ह्यूमन फैक्टर्स रिसर्च सेंटर बनाएंगे।
पुणे के चिखली में सीओईपी के रिसर्च एंड इनोवेशन पार्क के अंदर एक नया रिसर्च सेंटर खड़ा होने जा रहा है। इसका नाम एडवांस्ड एर्गोनॉमिक्स एंड ह्यूमन फैक्टर्स रिसर्च सेंटर (एईएचएफआरसी) है, यानी प्रगत श्रमदक्षता शास्त्र और मानवी घटक संशोधन केंद्र। इसके लिए सीओईपी टेक यूनिवर्सिटी और ऑटोमोटिव रिसर्च असोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआय) ने मिलकर पहल की है।
बताया गया है कि यह देश का पहला ऐसा रिसर्च सेंटर होगा, जो भारतीयों को केंद्र में रखकर और उनकी शारीरिक खासियतों के आधार पर इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी तैयार करेगा। इसमें कुल 105 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
इस सिलसिले में सहमति पत्र पर दस्तखत हो चुके हैं। मौके पर सीओईपी टेक यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रा. सुनिल भिरुड, कुलसचिव डॉ. डी. एन. सोनावणे और विशेष कर्तव्य अधिकारी डॉ. अविनाश जोशी मौजूद थे। आरआयआयएल (रील) के संचालक डॉ. एस. पी. महाजन और एआरएआय के संचालक डॉ. रेजी मथाई भी आए थे। इनके साथ वरिष्ठ उपसंचालक और एफएमसीई की विभाग प्रमुख मेधा जांभळे, वरिष्ठ उपसंचालक और कॉर्पोरेट प्लानिंग एंड बिजनेस प्रमुख विजय पंखावाला, वरिष्ठ उपसंचालक और इंजिनिअरींग डिझाइन एंड सिमुलेशन सेंटर के विभाग प्रमुख राहुल महाजन और उपसंचालक महेश पटवर्धन भी शामिल हुए।
यह केंद्र करीब 38 हजार वर्ग फुट में बनेगा। इसका मुख्य मकसद देश की अपनी रिसर्च और डेवलपमेंट ताकत बढ़ाना और 'आत्मनिर्भर भारत' की सोच से जुड़े इनोवेशन को आगे बढ़ाना है। कहा गया है कि इससे इस क्षेत्र में यूरोपीय टेक्नोलॉजी का दबदबा कम होगा। राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के तौर पर तैयार होने वाला यह सेंटर रिसर्च, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन, ट्रेनिंग, इनोवेशन और उद्योगों की भागीदारी पर जोर देगा।
इसका फायदा ऑटोमोटिव, डिफेंस, अंतरिक्ष अनुसंधान, रेलवे, खेती, औद्योगिक उपकरण, ग्राहक उत्पाद, फर्नीचर, निर्माण और वास्तुशास्त्रीय माहौल और कपड़ा उद्योग जैसे कई क्षेत्रों को मिलेगा। सेंटर में इंजीनियरिंग की खास ट्रेनिंग, सर्टिफिकेशन और स्किल डेवलपमेंट के कार्यक्रम भी चलेंगे, जिससे कुशल मैनपावर तैयार होगी।
एआरएआय के पास रिसर्च, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन, इंजीनियरिंग और मानक बनाने का हुनर है, जबकि सीओईपी टेक यूनिवर्सिटी के पास पढ़ाई और रिसर्च की क्षमता है। दोनों को जोड़कर एर्गोनॉमिक्स और ह्यूमन फैक्टर्स की बढ़ती जरूरत पूरी करने में यह साझेदारी अहम मानी जा रही है। दोनों संस्थाओं के प्रोफेसर, रिसर्चर, छात्र और तकनीकी जानकार मिलकर सेंटर में काम करेंगे। उद्योग, शिक्षण संस्थाओं और सरकार के बीच सहयोग को मजबूत करने वाला ढांचा भी बनाया जाएगा।
एआरएआय का काम भारतीय एर्गोनॉमिक्स मानक, मानवमितीय (Anthropometric) डेटाबेस, नए टेस्टिंग तरीके, यूजेबिलिटी इंजीनियरिंग (Usability Engineering) का ढांचा और भारतीय इस्तेमाल की हालत पर आधारित ह्यूमन फैक्टर्स रिसर्च तैयार करना है। इससे प्रोडक्ट की उपयोगिता, सुरक्षा, आराम और उत्पादकता बढ़ेगी और वैश्विक मुकाबले में भारतीय टेक्नोलॉजी की ताकत भी मजबूत होगी। साझेदारी के तहत दोनों संस्थाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिसर्च प्रोजेक्ट, सलाहकार सेवाएं और प्रायोजित रिसर्च कार्यक्रम चलाएंगी। सरकारी संस्थाओं, उद्योग पार्टनर, सीएसआर पहल और दूसरी संस्थाओं से मिलने वाले फंड के लिए भी वे साथ मिलकर कोशिश करेंगी।
एआरएआय के संचालक डॉ. रेजी मथाई ने कहा, "टेक्नोलॉजी जैसे-जैसे इंसान को केंद्र में रख रही है, वैसे-वैसे सुरक्षा, उपयोगिता और यूजर्स की भलाई तय करने में एर्गोनॉमिक्स और ह्यूमन फैक्टर्स टेक्नोलॉजी की भूमिका अहम हो जाती है। सीओईपी टेक यूनिवर्सिटी के साथ इस साझेदारी से एआरएआय ऐसा राष्ट्रीय इकोसिस्टम बनाना चाहता है, जो रिसर्च को बढ़ावा दे, देसी क्षमता खड़ी करे और उद्योगों को भारतीय यूजर्स और हालात के हिसाब से प्रोडक्ट और सिस्टम बनाने में मदद करे। हमें भरोसा है कि एईएचएफआरसी मानव-केंद्रित डिजाइन और इनोवेशन में भारत की ताकत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।"
सीओईपी टेक यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रा. सुनिल भिरूड ने कहा, "रिसर्च को समाज पर असर में बदलने के लिए सीओईपी टेक यूनिवर्सिटी लगातार काम कर रही है। एआरएआय के सहयोग से प्रस्तावित एईएचएफआरसी एर्गोनॉमिक्स और ह्यूमन फैक्टर्स में अंतर-विषयी रिसर्च, इनोवेशन और उद्योगों की भागीदारी के लिए एक अनोखा मंच बनेगा। भारतीय मानकों के विकास, देसी टेक्नोलॉजी बनाने और राष्ट्रीय व वैश्विक चुनौतियों का सामना करने लायक कुशल मैनपावर तैयार करने में इस पहल से अहम योगदान मिलेगा, ऐसा हमें भरोसा है।"
विकसित भारत का लक्ष्य रखने वाली यह पहल महाराष्ट्र को रिसर्च, इनोवेशन और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनाने की महाराष्ट्र सरकार की सोच से मेल खाती है। ऑटोमोटिव रिसर्च, मैन्युफैक्चरिंग और शिक्षा की अग्रणी संस्थाओं के केंद्र पुणे में राष्ट्रीय स्तर की अत्याधुनिक सुविधा खड़ी होगी। सेंटर की क्षमता बढ़ाने के लिए दुनिया की अग्रणी गाड़ी बनाने वाली कंपनियों की अंदरूनी प्रयोगशालाओं जैसे वैश्विक मानकों को आधार बनाया जाएगा। इससे एर्गोनॉमिक्स की जांच और सुविधाओं के लिए भारत की यूरोपीय देशों पर निर्भरता घटेगी।
उम्मीद है कि इस सुविधा से उद्योग, रिसर्चर और वैश्विक सहयोगी संस्थाएं महाराष्ट्र की ओर खिंचेंगी और वैश्विक टेक्नोलॉजी के नक्शे पर राज्य की पहचान और मजबूत होगी। भारतीय एर्गोनॉमिक्स गाइडलाइन, डिजाइन मानक, रिसर्च पब्लिकेशन और पेटेंट तैयार होंगे, साथ ही इंजीनियर, डिजाइनर और रिसर्चर की कुशल टीम भी बनेगी।