मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:03 IST

प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने में नींद की दिक्कत, जानें वजह और आसान उपाय

प्रेग्नेंसी के आखिरी ट्राइमेस्टर में बार-बार पेशाब, एसिडिटी, कमर दर्द और बच्चे की हलचल से नींद में खलल पड़ता है, तकिए के सहारे और हल्के खाने से राहत मिल सकती है।

प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने में नींद की दिक्कत, जानें वजह और आसान उपाय
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने में सबसे ज्यादा परेशानी नींद की होती है। दिनभर थकान रहती है, लेकिन रात को नींद नहीं आती। पेट बड़ा हो चुका होता है, बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़ता है और पैर भी दुखते हैं। यह दिक्कत लगभग सभी महिलाओं को होती है।

सबसे पहली वजह है बार-बार पेशाब आना। प्रेग्नेंसी में शरीर के हार्मोन बदलते हैं और पेट में बच्चा बड़ा होता जाता है। इसका दबाव सीधे पेशाब की थैली पर पड़ता है, जिससे खासकर रात में बार-बार पेशाब के लिए जाना पड़ता है और नींद लगते ही फिर उठना पड़ता है।

दूसरी वजह एसिडिटी और सीने की जलन है। इस दौरान पेट पर भी दबाव बढ़ता है, इसलिए खाना खाने के बाद एसिड ऊपर आता है, सीने में जलन और अपच होता है। रात को खाना खाकर तुरंत सो जाने से यह तकलीफ और बढ़ जाती है।

तीसरी वजह है कमर और पैर दर्द। वजन बढ़ने से पूरा भार कमर और पीठ पर आता है, जिससे कमर में दर्द रहता है। कुछ महिलाओं को रात में पैरों में ऐंठन आती है और बार-बार पैर हिलाने का मन करता है, इससे नींद टूट जाती है।

चौथी वजह पेट में पल रहे बच्चे की हलचल है। बच्चा कई बार रात के वक्त ज्यादा एक्टिव हो जाता है, लात मारता है और हलचल करता है, जिससे मां को नींद आना या आई हुई नींद बनी रहना मुश्किल हो जाता है।

पांचवीं वजह मन में चलते रहने वाले सवाल हैं। डिलीवरी कैसे होगी, बच्चा ठीक रहेगा या नहीं, मैं अच्छी मां बन पाऊंगी या नहीं, ऐसे विचार बार-बार दिमाग में आते हैं, जिससे मन शांत नहीं हो पाता और शरीर थका होने के बावजूद नींद नहीं आती।

बेहतर नींद के लिए कुछ आसान उपाय भी बताए गए हैं। बाजार में प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए खास बड़े तकिए मिलते हैं, अगर वह न हो तो दो-तीन साधारण तकिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं, एक पेट के नीचे, एक कमर के पीछे और एक घुटनों के बीच रखने से करवट लेकर सोना आरामदायक हो जाता है। आखिरी महीने में डॉक्टर भी करवट से, खासकर बाईं करवट सोने की सलाह देते हैं, अगर नींद में कभी पीठ के बल सो जाएं तो घबराने की जरूरत नहीं, ध्यान आते ही धीरे से फिर करवट ले लें। रात को सोने से दो घंटे पहले ही खाना खा लेना चाहिए और ज्यादा तेल, मसाले या भारी खाने से बचना चाहिए, इससे एसिडिटी की दिक्कत कम होती है। शाम के बाद चाय-कॉफी से भी परहेज करना बताया गया है, क्योंकि उसमें मौजूद कैफीन नींद उड़ा देता है। रोज एक ही समय पर सोने और सुबह एक ही समय पर उठने की आदत डालने की सलाह भी दी गई है। सोने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग करना, गहरी सांस लेना-छोड़ना, कोई किताब पढ़ना या गुनगुने पानी से नहाना और मोबाइल देखते हुए न सोना, इससे नींद बेहतर आती है।

कुछ महिलाओं को डॉक्टर नींद के लिए मैग्नेशियम की गोली देते हैं, जिसका फायदा भी होता है, लेकिन अपने मन से कोई भी गोली नहीं लेनी चाहिए, इसके लिए पहले अपने डॉक्टर से ही सलाह लेनी चाहिए। आखिरी महीने में नींद कम होना सामान्य बात है, लेकिन अगर रोज नींद न आना, दिनभर उसकी वजह से परेशानी होना, तेज खर्राटे आना, नींद में सांस लेने में दिक्कत होना या पैरों में बहुत बेचैनी रहना जैसी शिकायत हो तो डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए, इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। थोड़े बदलाव, तकिए का सहारा और मन को शांत रखने से यह आखिरी दौर भी आराम से निकल जाता है।

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