पोषण आहार ताजा और वक्त पर पहुंचे, जिला स्तर पर फैसले का अधिकार: फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना की समीक्षा बैठक में जिला स्तर पर फैसले के अधिकार देने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत बच्चों को ताजा, पौष्टिक और अच्छी क्वालिटी का खाना वक्त पर मिले, इसके लिए स्थानीय हालात के हिसाब से फैसले लेने का अधिकार जिला स्तर को दिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्कूली शिक्षा विभाग और महिला व बाल विकास विभाग को निर्देश दिए हैं कि दोनों मिलकर एक साझा नीति बनाएं और जरूरी गाइडलाइंस जारी करें।
अभी आठवीं तक पढ़ने वाले बच्चों को योजना का फायदा मिलता है। प्रस्ताव रखा गया है कि यही पोषण आहार दसवीं तक के बच्चों को भी दिया जाए।
यह सब सह्याद्री अतिथिगृह में मुख्यमंत्री फडणवीस की अध्यक्षता में हुई योजना की समीक्षा बैठक में सामने आया। फडणवीस ने कहा कि खाने की क्वालिटी बनाए रखने के लिए शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी, जहां केंद्रीय रसोई का विकल्प कारगर साबित हो, वहां उसे अपनाया जाए। दुर्गम और आदिवासी इलाकों के स्कूलों तक केंद्रीय रसोई से खाना पहुंचने में देर होती हो, तो वहां ग्राम पंचायत के जरिए दूसरे विकल्प अपनाने के आदेश उन्होंने दिए।
फडणवीस के मुताबिक केंद्रीय रसोई इस्तेमाल करते वक्त स्थानीय स्तर पर जांच की जाए कि स्कूलों तक खाना वक्त पर और ताजा पहुंच पाता है या नहीं। जहां मुमकिन हो, खाना बांटने की जिम्मेदारी स्थानीय महिला बचत गुटों को दी जाए। जिलाधिकारी, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और महानगरपालिका आयुक्त स्थानीय जरूरतों और व्यावहारिकता को देखकर फैसला लें, और खाने की गुणवत्ता, सेवा और भुगतान व्यवस्था के साफ मानक तय करें।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिलाधिकारी जिला स्तरीय पोषण आहार समिति की बैठक लेकर अपने इलाके में मिलने वाली प्रोटीन वाली चीजों को खाने में शामिल करें। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इस प्रक्रिया में तालमेल रखें। स्थानीय खान-पान और बच्चों की पसंद को देखते हुए मिलेट वाले पदार्थों समेत पोषण मूल्य वाला आहार शामिल किया जाए।
स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने सुझाव दिया कि केंद्रीय रसोई का दायरा बढ़ाया जाए और ग्राम पंचायतों को निधि देकर स्थानीय स्तर पर पोषण आहार मुहैया कराने की जिम्मेदारी सौंपी जाए। उन्होंने चावल की मात्रा घटाकर दूसरे अनाज की मात्रा बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से मांग करने की गुजारिश भी की। भुसे ने बताया कि स्कूली बच्चों के हेल्थ कार्ड बनाए जा रहे हैं और आगे से बच्चों की सेहत की जांच पालकों की मौजूदगी में की जाएगी।
महिला व बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने बताया कि विभाग के जरिए शहरी इलाकों की 30 आंगनवाड़ियों में पोषण आहार देने का काम इस्कॉन को सौंपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका असर जांचने के बाद आंगनवाड़ियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। तटकरे ने सुझाव दिया कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली आहार समिति को स्थानीय हालात और उपलब्धता देखकर आहार देने का फैसला लेने का अधिकार मिले, और प्री मिक्स या फोर्टिफाइड चीजों की जगह स्थानीय जरूरत के हिसाब से खुली चीजें देकर ताजा खाना दिया जाए।
स्कूली शिक्षा विभाग के जरिए राज्य और केंद्र सरकार, स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं, निजी अनुदानित और अंशतः अनुदानित 85 हजार 206 पात्र स्कूलों में पहली से आठवीं तक के बच्चों को योजना का फायदा मिलता है। केंद्र सरकार के मानकों के मुताबिक पहली से पांचवीं के बच्चों को 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन वाला, जबकि छठी से आठवीं के बच्चों को 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन वाला दोपहर का खाना मिलता है। खाने में विविधता लाने के लिए तरह-तरह के पुलाव, खिचड़ी, उसल, वरण-भात समेत 12 तरह की रेसिपी तय की गई हैं।
बैठक में स्कूली शिक्षा विभाग की ओर से आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह और महिला व बाल विकास विभाग की ओर से एकात्मिक बाल विकास कार्यक्रम की आयुक्त माधवी सरदेशमुख ने प्रेजेंटेशन दिया। अन्नामृत फाउंडेशन की केंद्रीय रसोई को लेकर इस्कॉन के प्रतिनिधियों ने प्रेजेंटेशन दिया।
बैठक में राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर, मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, स्कूली शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रणजितसिंह देओल, महिला व बाल विकास विभाग के सचिव अनुपकुमार, नगर परिषद प्रशासन निदेशालय के निदेशक अभिषेक कृष्णा भी मौजूद थे। सभी महानगरपालिकाओं के आयुक्त, जिलाधिकारी और जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऑनलाइन जुड़े थे।