पॉडकास्ट के नाम एक दिन: 30 सितंबर को मनता है अंतरराष्ट्रीय पॉडकास्ट दिवस
हर साल 30 सितंबर को दुनिया भर में पॉडकास्ट बनाने और सुनने वाले अंतरराष्ट्रीय पॉडकास्ट दिवस पर जुटते हैं।
आज का दौर डिजिटल तकनीक और जानकारी का दौर माना जाता है। इस दौर में जानकारी हासिल करने, सीखने और मनोरंजन करने के तरीकों में बहुत बड़ा बदलाव आया है। एक वक्त था जब ऑडियो संदेश रेडियो के जरिए घर-घर पहुंचता था। आज वही 'पॉडकास्ट' की शक्ल में दुनियाभर के अरबों लोगों के मोबाइल स्क्रीन और हेडफोन तक पहुंच चुका है।
शिक्षा, मनोरंजन, खबरें, कारोबार और प्रेरणा देने वाले विचार, इन सबको आसान, सीधे और असरदार ढंग से सुनने वालों तक पहुंचाने के लिए पॉडकास्ट इस वक्त सबसे लोकप्रिय और ताकतवर माध्यम बन गया है। इसी पॉडकास्टिंग के योगदान, उसके बढ़ते असर और ऑडियो क्रिएटर्स की सूझबूझ को बढ़ावा देने के लिए हर साल 30 सितंबर को 'अंतरराष्ट्रीय पॉडकास्ट दिवस' (International Podcast Day) बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
पॉडकास्टिंग का विचार 2000 के दशक की शुरुआत में सामने आया। लेकिन इसे दुनिया भर में बड़ी पहचान दिलाने की पहल स्टीव ली (Steve Lee) ने की। साल 2014 में उन्होंने अमेरिका में 'नेशनल पॉडकास्ट डे' के नाम से यह मुहिम शुरू की थी। दुनियाभर के पॉडकास्ट पसंद करने वालों और बनाने वालों का खुद-ब-खुद मिला जोरदार जवाब देखकर 2015 में इसे 'अंतरराष्ट्रीय पॉडकास्ट दिवस' का रूप दे दिया गया।
30 सितंबर की तारीख चुनने की मुख्य वजह यह है कि सितंबर 2004 में ही पहले आधिकारिक पॉडकास्ट की शुरुआत हुई थी। तब से यह दिन हर साल दुनिया भर के ऑडियो समुदाय को एक साथ लाने का अहम मंच बन गया है।
पॉडकास्ट का सबसे बड़ा और अलग फायदा है इसकी लचीलापन और आसानी से उपलब्ध होना। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के लिए लंबे वक्त तक स्क्रीन देखकर पढ़ना या वीडियो देखना हमेशा मुमकिन नहीं होता। ऐसे में पॉडकास्ट बहुत अच्छा विकल्प बन जाता है। लोग सफर में हों, कसरत कर रहे हों, घर का काम कर रहे हों या आराम कर रहे हों, अपनी पसंद का पॉडकास्ट कभी भी, कहीं भी सुन सकते हैं। इसमें न वक्त की कोई पाबंदी होती है, न जगह की।
तकनीक, इतिहास, उद्योग-कारोबार, मानसिक सेहत, कहानी-उपन्यास और राजनीतिक विश्लेषण से लेकर पर्सनल डेवलपमेंट (Personal Development) तक, हर विषय पर हजारों पॉडकास्ट मौजूद हैं।
अंतरराष्ट्रीय पॉडकास्ट दिवस के मौके पर दुनियाभर के पॉडकास्ट बनाने वाले, ऑडियो इंजीनियर, कंटेंट क्रिएटर और सुनने वाले ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरीकों से एक जगह जुटते हैं। अलग-अलग समस्याओं के बारे में समाज में जागरूकता फैलाने के लिए पॉडकास्ट आज बहुत संवेदनशील और असरदार जरिया साबित हो रहा है। किसी बड़े मीडिया हाउस या करोड़ों रुपये के बजट के बिना भी, सिर्फ एक अच्छे माइक्रोफोन और अपने विचारों के दम पर आम आदमी दुनिया के किसी भी कोने में लाखों लोगों तक अपनी आवाज पहुंचा सकता है।
यह दिन याद दिलाता है कि डिजिटल माध्यमों की इस भारी भीड़ में 'इंसानी आवाज' अब भी दुनिया को जोड़ने और प्रेरित करने का सबसे ताकतवर साधन है। अगर आपने अब तक पॉडकास्ट सुनना शुरू नहीं किया है, तो इस अंतरराष्ट्रीय पॉडकास्ट दिवस पर अपनी पसंद के किसी विषय का एक पॉडकास्ट जरूर सुनिए और जानकारी की इस नई ऑडियो दुनिया में कदम रखिए।