पितृपक्ष के खाने के लिए बनाइए विदर्भ की खास सफेद कढ़ी, हल्दी के बिना
पितृपक्ष के खाने में विदर्भ की पारंपरिक सफेद कढ़ी बनाने की आसान रेसिपी।
पितृपक्ष में पूर्वजों को याद करके उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। भारतीय संस्कृति में पितृपक्ष को खास अहमियत दी गई है। इन दिनों पितरों का श्राद्ध करके घर में सात्विक और पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं।
महाराष्ट्र के विदर्भ में पितृपक्ष के खाने में कई पारंपरिक पकवान बनाने की परंपरा है। खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए यहां अलग तरीके से सफेद रंग की कढ़ी बनाई जाती है। इस कढ़ी में हल्दी बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होती।
बेसन की या सादे दही की कढ़ी तो सबने खाई होगी। लेकिन इस तरीके से बनी कढ़ी का स्वाद बहुत बढ़िया लगता है। मसालों की वजह से कढ़ी को एक अलग ही रंग और स्वाद मिलता है। इसलिए विदर्भ स्पेशल कढ़ी सिर्फ पितृपक्ष में ही नहीं, दूसरे दिनों में भी खाने में बनाई जा सकती है। गरमागरम भात के साथ यह कढ़ी बहुत अच्छी लगेगी और खाने में चार कौर ज्यादा जाएंगे।
साहित्य यानी सामग्री में दही, बेसन, घी, खड़े मसाले, नागवेल के पत्ते, मूंगफली के दाने, लहसुन, अदरक, पानी, कढ़ी पत्ता, नमक, धनिया और जीरा शामिल हैं।
बनाने के लिए सबसे पहले बर्तन में ताजा दही लें, उसमें थोड़ा पानी डालकर दही को अच्छी तरह फेंट लें। फेंटे हुए दही में 1 या 2 चम्मच बेसन डालकर सब कुछ ठीक से मिला लें। आटे की गुठलियां बिल्कुल नहीं रहनी चाहिए।
अब मिक्सर के जार में हरी मिर्च, लहसुन की कलियां, अदरक, जीरा, दगड़फूल, नागवेल के पत्ते और मूंगफली के दाने डालकर बारीक पीस लें। जरूरत लगे तो पानी डालें।
कढ़ाई में घी गरम होने के लिए रखें। फिर उसमें लौंग और जीरा डालकर तड़का भूनें। इसके बाद तैयार किया हुआ पेस्ट और दही डालें और फौरन ढक्कन लगाकर धुएं वाला तड़का दें। इससे पकवान को पारंपरिक स्वाद आएगा।
सबसे आखिर में कढ़ी में कढ़ी पत्ता और स्वाद के मुताबिक नमक डालकर मिला लें। कढ़ी में एक उबाल आ जाए तो बारीक कटा धनिया डालकर मिला दें। बस, कढ़ी खाने के लिए तैयार है। यह खट्टे-तीखे स्वाद की विदर्भ स्पेशल कढ़ी है।