पितृपक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक, बाणगंगा समेत कई जगह तर्पण की व्यवस्था
पितृपक्ष 26 सितंबर को शुरू हुआ और 10 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या तक चलेगा। बाणगंगा, मालाड मार्वे बीच, भाईंदर चौपाटी और ब्रजेश्वरी देवी मंदिर में इंतजाम हैं।
पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद के लिए हर साल पितृपक्ष मनाया जाता है। इस साल पितृपक्ष 26 सितंबर को शुरू हुआ है और 10 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या तक चलेगा। खास बात यह है कि इस बार पितृपक्ष की शुरुआत पौर्णिमा के दिन हुई है, इसलिए यह और भी विशेष माना जा रहा है।
ऐसा माना जाता है कि इस दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। पितृपक्ष में 15 दिन पूर्वजों को याद करना और उनकी आत्मा की शांति के लिए दान और तर्पण करना बहुत जरूरी माना जाता है। कहा जाता है कि इससे उनके प्रति कृतज्ञता तो जाहिर होती ही है, परिवार में सुख और शांति भी बनी रहती है।
पितृपक्ष के आखिरी दिन, यानी 10 अक्टूबर को बाणगंगा में महातर्पण के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। इसी तरह मालाड मार्वे बीच, भाईंदर चौपाटी और ब्रजेश्वरी देवी मंदिर में भी खास व्यवस्था की गई है। इन सभी जगहों पर हजारों लोगों के आने की संभावना है।
बाणगंगा तालाब गोंड सारस्वत ब्राह्मण मंदिर ट्रस्ट का है। ट्रस्ट के सचिव शशांक गुलगुले ने बताया कि श्राद्ध के सभी दिनों में पिंडदान की विधि होती है, लेकिन अमावस्या के दिन पितृश्राद्ध के लिए एक लाख से ज्यादा लोगों के आने की संभावना है। भाईंदर पूर्व की जैसल पार्क चौपाटी पर भी श्राद्ध के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा होते हैं।
पितृपक्ष के आखिरी दिन पिंडदान के लिए दस हजार से ज्यादा लोगों के आने की संभावना जताई गई है। विरार के ब्रजेश्वरी देवी मंदिर में सर्व पितृ अमावस्या के दिन पूर्वजों के महातर्पण के लिए कम से कम 15,000 से 20,000 लोग आने की उम्मीद है।
बताया गया है कि पितृपक्ष पूर्वजों की पूजा और उन्हें प्रसन्न करने के लिए समर्पित त्योहार है। इस दौरान शोक करने की जरूरत नहीं है, इसे खुशी से मनाने का आवाहन किया गया है। शास्त्र कहता है कि माता और पिता जैसा दूसरा कोई देव नहीं है, और उनके आशीर्वाद से सारे सुख मिलते हैं। पितृपक्ष में रोज उनके लिए तर्पण करने, शुभ मुहूर्त पर पिंडदान करने और अन्न व वस्त्र दान करने की बात कही गई है।
अगर पुण्यतिथि पता न हो, तो श्राद्ध सर्वपित्री अमावस्या को करना चाहिए। पितृपक्ष के 16 दिनों में श्राद्ध तारीखों के हिसाब से होता है। सर्व पितृ अमावस्या के दिन अमावस्या, पौर्णिमा या चतुर्दशी को गुजरे परिवार के सदस्यों का श्राद्ध किया जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक अमावस्या को किया गया श्राद्ध सभी पूर्वजों की आत्मा को शांति देता है, इसलिए इस दिन सभी पूर्वजों के लिए श्राद्ध करना चाहिए। जिन पूर्वजों की पुण्यतिथि पता नहीं, उनका श्राद्ध भी अमावस्या को होता है। अकाल मृत्यु वाले परिवारजनों के लिए भी सर्व पितृ अमावस्या को तर्पण किया जा सकता है। कहा गया है कि ऐसा करने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है।