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18:27 IST

पितृ पक्ष में कल मातृ नवमी, दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध 4 अक्टूबर को

मातृ नवमी का श्राद्ध 4 अक्टूबर 2026, शनिवार को होगा। कुतुप, रोहिणी और अपराह्न काल के मुहूर्त और नियम जानिए।

पितृ पक्ष में कल मातृ नवमी, दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध 4 अक्टूबर को
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

पितृ पक्ष चल रहा है और इन पंद्रह दिनों में लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनके लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं। पितृ पक्ष का सबसे अहम दिन मातृ नवमी को माना जाता है। इस साल मातृ नवमी कल यानी 4 अक्टूबर 2026, शनिवार को है।

इस दिन दिवंगत माँ, दादी, पत्नी और घर की दूसरी महिलाओं के लिए श्राद्ध किया जाता है। यह परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है। यह दिन महिलाओं के प्रति आदर और कृतज्ञता जताने का दिन है।

तिथि के हिसाब से देखें तो नवमी तिथि 4 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और 5 अक्टूबर को सुबह 3 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। उदय तिथि के मुताबिक मातृ नवमी का श्राद्ध 4 अक्टूबर, शनिवार को किया जाएगा।

श्राद्ध के लिए कुछ खास मुहूर्त बताए गए हैं। मान्यता है कि इन वक्तों में श्राद्ध करने से ज्यादा फल मिलता है। कुतुप मुहूर्त सुबह 11:46 से दोपहर 12:33 तक है। रोहिणी मुहूर्त दोपहर 12:33 से 1:20 तक है। अपराह्न काल दोपहर 1:20 से 3:42 तक रहेगा। इन्हीं वक्तों में श्राद्ध करना सबसे अच्छा माना जाता है। दोपहर में यानी सुबह 11:30 से दोपहर 2:30 के बीच श्राद्ध विधि करनी चाहिए।

आम तौर पर जिस तिथि को व्यक्ति का निधन हुआ हो, उसी तिथि पर उसका श्राद्ध किया जाता है। लेकिन माँ के मामले में ऐसा नहीं है। माँ का निधन किसी भी तिथि को हुआ हो, उसका श्राद्ध नवमी के दिन ही किया जाता है। नवमी तिथि बहुत शुभ मानी जाती है। यह देवी दुर्गा की तिथि है और दुर्गा के नौवें रूप सिद्धिदात्री की भी यही तिथि है। मान्यता है कि इस तिथि पर किया गया कोई भी काम पूरा होता है और उसका फल हमेशा टिकता है।

दूसरा कारण यह बताया गया है कि भारतीय संस्कृति में माँ का दर्जा सबसे बड़ा है। वही घर की नींव होती है और संस्कृति को सँभालती है, इसलिए उसके लिए एक खास दिन रखा गया है। इस दिन सिर्फ माँ का ही नहीं, दादी, परदादी और परिवार की उन सभी महिलाओं का श्राद्ध होता है जो अब नहीं हैं। इसे अविधवा नवमी श्राद्ध भी कहते हैं। कहा जाता है कि नवमी को श्राद्ध करने से घर में सुख-समृद्धि आती है, शांति मिलती है और माँ का आशीर्वाद मिलता है। सारी इच्छाएँ पूरी होती हैं।

श्राद्ध करते वक्त कुछ नियम निभाने होते हैं। इस दिन गुस्सा, झगड़ा और बहस नहीं करनी चाहिए। मन शांत और पवित्र रखना चाहिए। खाना बनाते वक्त साफ-सफाई रखनी चाहिए और खाना सात्विक होना चाहिए।

खाने में प्याज और लहसुन नहीं डालना चाहिए, क्योंकि इन्हें तामसिक माना जाता है। यह भी बताया जाता है कि इस दिन लौकी की सब्जी न खाएँ और न बनाएँ। खाने में खीर, पूरी, आलू की सब्जी और कद्दू की सब्जी जैसे सात्विक पकवान बनाने चाहिए।

श्राद्ध के लिए एक सुवासिनी महिला और एक ब्राह्मण को भोजन पर बुलाना चाहिए। प्रार्थना और ध्यान करते वक्त मुँह दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। भोजन के बाद दक्षिणा के तौर पर कपड़े, फल, कुंकू, टिकली, चूड़ियाँ जैसी सुहाग की चीजें देनी चाहिए।

मातृ नवमी सिर्फ एक विधि नहीं है। यह अपनी माँ और परिवार की महिलाओं के प्रति कृतज्ञता जताने और उनके किए को याद रखने का दिन है। इसलिए कल पूरी श्रद्धा से श्राद्ध करें और उनका आशीर्वाद लें।

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