फॉक्स न्यूज का दावा: 9 देशों के 101 संगठनों का नेटवर्क, दिल्ली के आंदोलनों का भी जिक्र
फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप और एशिया के नौ देशों में 101 संगठनों का एक वैश्विक नेटवर्क आंदोलनों को सोशल मीडिया से जोड़ रहा है। रिपोर्ट में विदेश से आंदोलन भड़काने का कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अमेरिका की न्यूज एजेंसी फॉक्स न्यूज ने हाल ही में एक खास रिपोर्ट जारी की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सामाजिक हलकों में काफी चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूरोप और एशिया समेत नौ देशों में फैले 101 संगठनों का एक वैश्विक नेटवर्क इस समय सक्रिय है। दावे के मुताबिक यह नेटवर्क अलग-अलग देशों के आंदोलनों को सोशल मीडिया के जरिए जोड़ने, उनका प्रचार करने और आंदोलन करने वाले गुटों के बीच तालमेल बिठाने का काम कर रहा है।
रिपोर्ट में भारत की राजधानी दिल्ली में हुए आंदोलनों का भी खास जिक्र है। उसमें दावा किया गया है कि फ्रांस के पैरिस से कुछ संदेश और प्रचार सामग्री फैलाई गई थी।
इस पूरे मामले के केंद्र में इंडियन अलायंस पैरिस (India Alliance Paris) नाम का संगठन है। यह संस्था फ्रांस में सक्रिय है और फ्रांस तथा भारत के आंदोलनों के बीच जानकारी के लेन-देन को आसान बनाने का काम करती है। रिपोर्ट के मुताबिक आईएपी ने न्यू यॉर्क के मैनहट्टन में मौजूद संस्था द पीपल्स फोरम के साथ मिलकर भारत के सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने की कोशिश की।
लेकिन एक बहुत अहम बात साफ की गई है। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में ऐसा कोई ठोस कानूनी या वैज्ञानिक सबूत पेश नहीं किया गया कि विदेश में बैठे इन संगठनों ने भारत के आंदोलनों को सीधे भड़काया या उन्हें कंट्रोल किया।
रिपोर्ट में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल नाम के अंतरराष्ट्रीय संगठन की भूमिका पर भी रोशनी डाली गई है। इस संगठन का मुख्य मकसद अलग-अलग देशों के राजनीतिक और सामाजिक जन आंदोलनों को एक मंच पर लाना है। रिपोर्ट के मुताबिक 16 अक्टूबर को जारी एक आधिकारिक बयान में इस संगठन ने फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में एक ही समय चल रहे प्रदर्शनों और जनआक्रोश का जिक्र किया था। संगठन ने यह सवाल भी उठाया कि अलग-अलग देशों के स्थानीय मुद्दों पर खड़े इन आंदोलनों को साथ लाकर एक संगठित और बड़ी वैश्विक राजनीतिक ताकत में कैसे बदला जाए। रिपोर्ट से तस्वीर यह उभरती है कि दुनिया भर के वामपंथी और प्रगतिशील विचारधारा वाले आंदोलनों में आपसी सहयोग बढ़ाना और उन्हें समर्थन देना इस नेटवर्क का मुख्य एजेंडा है।
फॉक्स न्यूज ने यह आरोप भी लगाया है कि इस अंतरराष्ट्रीय जाल में अमेरिकी कारोबारी नेविल रॉय सिंघम से जुड़ी संस्थाओं और मीडिया समूहों का बड़ा हिस्सा है। रिपोर्ट के मुताबिक सिंघम की आर्थिक मदद से चलने वाले मीडिया नेटवर्कों ने यूरोप के स्थानीय आंदोलनों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। इनमें कोडपिंक (CodePink) और ब्रेकथ्रू न्यूज (Breakthrough News) प्रमुख हैं। इन संगठनों ने फ्रांस के प्रदर्शनों की जानकारी दूसरे देशों तक तेजी से पहुंचाई। कोडपिंक ने फ्रांस के आंदोलनों के संदेश अमेरिका तक ले जाकर 10 से 12 नवंबर के बीच अमेरिका में एक बड़ी मुहिम का ऐलान किया है। इस मुहिम की मुख्य मांग है कि अलग-अलग देशों की सरकारें अपने बजट में सैन्य खर्च घटाएं और वह पैसा शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा और आवास पर लगाएं।
रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले दिनों में यूरोप के इन आंदोलनों का दायरा और बढ़ सकता है। फ्रांस के आंदोलनकारी 24 अक्टूबर को फिर बड़ी तादाद में सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। इस आंदोलन को एक्ट II (Act II) नाम दिया गया है। एक डिजिटल नक्शे के अनुसार फ्रांस में करीब 212 जगहों पर एक साथ प्रदर्शन कराने की योजना है।
इसके बाद 31 अक्टूबर को एक्ट III (Act III) तय है और नवंबर में भी यह सिलसिला जारी रहेगा। इसके अलावा 20 नवंबर को दुनिया के कई देशों के छात्र और युवा संगठन मिलकर इंटरनेशनल यूथ स्ट्राइक (International Youth Strike) बुलाने की तैयारी में हैं। यह आंदोलन बढ़ती महंगाई, सरकारी खर्च में कटौती, सैन्य खर्च और पूंजीवादी व्यवस्था के कड़े विरोध की मांगों पर आधारित होगा। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट ने संगठनों के आपसी रिश्ते सामने रखे हैं, पर भारत के आंदोलनों में विदेशी दखल का सीधा सबूत नहीं मिला है।
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