फ्लायदुबई विमान कांड: ट्रम्प की ईरान को धमकी, ईरान का दावा नेतान्याहू ने रची साजिश
दुबई से तेल अवीव जा रहे विमान में कॉकपिट के अंदर हमला हुआ। अब अमेरिका, इस्रायल और ईरान आमने-सामने हैं।
दुबई से इस्रायल के तेल अवीव जा रहे फ्लायदुबई FZ1073 विमान में कथित आतंकी साजिश को लेकर दुनिया भर में हलचल मच गई है। इस विमान में 174 यात्री और क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें ज्यादातर इस्रायली नागरिक थे। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद कॉकपिट में खूनखराबे वाला वाकया हुआ। अब इस मामले में अमेरिका, इस्रायल और ईरान सीधे आमने-सामने आ गए हैं और मध्य-पूर्व में जंग भड़कने का खतरा पैदा हो गया है।
इस पूरे मामले में भारतीय वंश के मुख्य पायलट कैप्टन स्मित मच्छर की हिम्मत और सूझबूझ की खूब चर्चा हो रही है। बुधवार को विमान के उड़ान भरने के बाद ओमान मूल के को-पायलट ने अचानक कैप्टन स्मित मच्छर पर चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। हमलावर को-पायलट का मकसद विमान को गिराकर बड़ा हादसा करना था।
चाकू के वार से कैप्टन स्मित मच्छर गंभीर रूप से घायल थे और खून से लथपथ थे, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। दरवाजा खुलते ही चौकस यात्री फौरन कॉकपिट में दौड़े, हमलावर को-पायलट को पकड़ लिया और उसे सीट से बांध दिया। इसके बाद एक यात्री की मदद से घायल कैप्टन स्मित मच्छर ने विमान को सऊदी अरब के एक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतार दिया। इस तरह 174 लोगों की जान बच गई।
घटना का असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी साफ दिख रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ईरान को सीधी चेतावनी दी है। मीडिया से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा, "हम इस पूरी घटना की बारीकी से जांच कर रहे हैं। शुरुआती जानकारी के हिसाब से इसमें ईरान का हाथ होने की मजबूत संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर जांच में साबित हुआ कि इस साजिश में ईरान शामिल था, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। हम तेहरान पर भीषण हमला करेंगे और पूरे ईरान को तबाह कर देंगे।" ट्रम्प के इस आक्रामक रुख से दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है।
दूसरी तरफ ईरान ने इस घटना में अपना कोई हाथ होने से साफ इनकार किया है और अमेरिका और इस्रायल के सारे आरोप सिरे से खारिज कर दिए हैं। ईरानी अधिकारियों ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। ईरान के दावे के मुताबिक फ्लायदुबई विमान के अपहरण की यह साजिश खुद इस्रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने रची थी।
ईरान का आरोप है कि इस्रायल में आने वाले चुनावों में नेतान्याहू को हार का डर सता रहा है। मौजूदा सियासी हालात में उनके गठबंधन को बहुमत मिलना मुश्किल है। इसलिए अपनी कुर्सी बचाने और अमेरिका को ईरान के साथ नई जंग में खींचने के लिए नेतान्याहू ने यह पहले से तय साजिश रची, ऐसा ईरान का आरोप है।
ईरान ने अपने दावे में यह भी कहा है कि घटना से सिर्फ तीन दिन पहले प्रधानमंत्री नेतान्याहू संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दौरे पर गए थे। उस दौरे में इस्रायल के कई वरिष्ठ फौजी और खुफिया अधिकारी भी उनके साथ थे। ईरान का आरोप है कि इसी दौरे के दौरान कथित विमान अपहरण की योजना पर बात हुई और उसे आखिरी रूप दिया गया। हालांकि ईरान ने अपने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है। फिलहाल अमेरिकी और इस्रायली खुफिया एजेंसियां पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही हैं।