Oracle के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट में अड़चन, AI बूम की कमजोर कड़ी सामने आई
न्यू मेक्सिको के प्रोजेक्ट जुपिटर में देरी की आशंका के बीच Oracle ने फोर्स मॅज्योर नोटिस दी, जिससे AI इन्फ्रास्ट्रक्चर में लगे भारी कर्ज और निवेश पर सवाल उठे हैं।
दुनिया भर में AI भले ही तेजी से पॉपुलर हो रहा हो, मगर इसके साथ इसकी दिक्कतें भी उतनी ही बड़ी हैं। AI के लिए जो बड़े-बड़े डेटा सेंटर बनाए जाते हैं, वो जमीन पर लगते हैं और इनके लिए भारी मात्रा में पानी चाहिए होता है। कुछ लोगों का कहना है कि एक फोटो बनाने में कम से कम आधा से एक लीटर पानी खर्च हो जाता है। इन डेटा सेंटर से आने वाले शोर की वजह से भी विरोध हो रहा है। यही वजह है कि विदेशी कंपनियां अपने डेटा सेंटर भारत में लगाने के लिए आगे आ रही हैं, और भारत के कुछ शहरों के बाहरी इलाकों में डेटा सेंटर आने की खबरें भी सामने आई हैं।
इसी बीच IT सेक्टर की बड़ी कंपनी Oracle के डेटा सेंटर को लेकर एक नया मामला मार्केट में चर्चा में है। अमेरिका में Oracle के एक बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट में आई अड़चनों की वजह से पूरे इस सेक्टर के इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली सप्लाई और भारी कर्ज पर टिके निवेश को लेकर सवाल उठने लगे हैं। न्यू मेक्सिको में बन रहे 'Project Jupiter' के लिए Oracle ने 'फोर्स मॅज्योर' की नोटिस दी है, जिसके बाद AI बूम के पीछे का आर्थिक गणित फिर से चर्चा में आ गया है।
न्यू मेक्सिको में तैयार हो रहा Project Jupiter उन प्रोजेक्ट्स में से एक है जो AI के लिए बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराता है। इस प्रोजेक्ट से OpenAI को बड़ी डेटा सेंटर क्षमता मिलनी है। लेकिन प्रोजेक्ट के लिए जरूरी बिजली और बाकी इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता में रुकावटें आई हैं। इसकी वजह से 2028 तक प्रोजेक्ट शुरू करने के तय शेड्यूल पर दबाव बन गया है। Oracle ने जो 'फोर्स मॅज्योर' नोटिस दी है, वो प्रोजेक्ट छोड़ने का ऐलान नहीं है, बल्कि अगर देरी होती है तो कॉन्ट्रैक्ट की आर्थिक जिम्मेदारियों से बचाव पाने के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
AI मॉडल्स के लिए जरूरी डेटा सेंटर को भारी मात्रा में बिजली चाहिए होती है। इसलिए अब AI इंडस्ट्री का विस्तार सिर्फ चिप्स और सर्वर की उपलब्धता पर नहीं टिका, बल्कि बिजली बनाने, गैस पाइपलाइन, जमीन और परमिशन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी निर्भर है। Project Jupiter के लिए जरूरी बिजली सप्लाई से जुड़ी पाइपलाइन प्रोजेक्ट को परमिशन की वजह से देरी हो रही है। इससे साफ पता चलता है कि डेटा सेंटर खड़ा करने का प्रोसेस कितना पेचीदा हो चुका है।
AI की बढ़ती डिमांड की वजह से डेटा सेंटर सेक्टर में बड़े पैमाने पर कर्ज और प्राइवेट कैपिटल लगाया जा रहा है। Project Jupiter को भी भारी कर्ज के जरिए फंडिंग मिली है। ऐसे हालात में अगर कोई प्रोजेक्ट टाइम पर पूरा नहीं होता, तो इसका असर सिर्फ उस कंपनी पर नहीं, बल्कि कर्ज देने वाली संस्थाओं, निवेशकों और पूरे AI इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर पड़ सकता है। हालांकि Oracle ने साफ किया है कि Project Jupiter तय शेड्यूल के मुताबिक ही आगे बढ़ रहा है। फिलहाल यह प्रोजेक्ट AI सेक्टर के बड़े विस्तार के सामने खड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक चुनौतियों की मिसाल बन गया है।