मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:49 IST

निर्मल उज्ज्वल AGM में डेकोरम की शर्त, ठेवीदारों के भुगतान वाले सवाल अनुत्तरित

24 सितंबर की वार्षिक आमसभा से पहले निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी के ठेवीदार मैच्योर FD के भुगतान को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

निर्मल उज्ज्वल AGM में डेकोरम की शर्त, ठेवीदारों के भुगतान वाले सवाल अनुत्तरित
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर की निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी की 37वीं वार्षिक आमसभा (AGM) 24 सितंबर 2026 को होने वाली है, और इस बार सबकी नजरें सिर्फ मीटिंग के एजेंडे पर नहीं बल्कि उसमें शामिल एक शब्द पर टिकी हैं। संस्था पिछले कुछ महीनों से ठेवीदारों के तीखे सवालों के घेरे में है, और अब AGM के नोटिस में डाली गई एक लाइन ने बहस को और हवा दे दी है।

संस्था ने अपने सदस्यों से बैठक में हिस्सा लेने की अपील की है। नोटिस में यह भी साफ किया गया है कि अगर कोरम पूरा नहीं हुआ तो मीटिंग को आधे घंटे टालकर उसी दिन, उसी जगह दोबारा बुलाया जाएगा और तब कोरम की शर्त नहीं रहेगी। इसी नोटिस में एक और बात जोड़ी गई है - बैठक के दौरान "maintain decorum" रखना होगा।

यहीं से सवाल खड़ा होता है कि क्या यह महज प्रशासनिक एहतियात है, या फिर पहले से तैयारी है कि अगर मीटिंग में तीखे सवाल उठें तो उन्हें "डेकोरम" के नाम पर टालकर बैठक जल्दी निपटा दी जाए। फिलहाल यह दावे से नहीं कहा जा सकता कि संस्था की ऐसी कोई मंशा है, लेकिन मौजूदा हालात में यह शक स्वाभाविक है।

असली विवाद की जड़ ठेवीदारों की जमा राशि और मैच्योर हो चुकी FD के भुगतान में देरी है। कई ठेवीदारों का कहना है कि FD मैच्योर होने के बाद भी उन्हें पैसा नहीं मिल रहा, और उन्हें शाखाओं के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अगस्त में मामला तब और बिगड़ा जब ठेवीदार सीधे संस्था के संस्थापक के घर पहुंच गए और अपनी जमा राशि लौटाने की मांग करने लगे। चंद्रपुर में भी खातेदारों ने पैसा निकालने में दिक्कत की शिकायत की और वहां जांच की मांग उठाई गई।

मामला सिर्फ ठेवीदारों की नाराजगी तक सीमित नहीं है। Central Registrar of Cooperative Societies (CRCS) ने अप्रैल 2026 में निर्मल उज्ज्वल पर नए deposits, contributions और investments लेने और मौजूदा deposits को renew करने पर रोक लगा दी थी। इस कार्रवाई में financial irregularities, funds के diversion, conflict of interest और regulatory non-compliance जैसे prima facie concerns का जिक्र किया गया था। इससे जुड़े न्यायिक रिकॉर्ड में भी इन जांच और कार्रवाइयों का उल्लेख है, हालांकि इन्हें अभी अंतिम रूप से साबित अपराध नहीं माना जा सकता।

जून में खबर आई थी कि SIT ने संस्था को कथित तौर पर 'क्लीन चिट' दे दी है, जिसके बाद कुछ राहत का दावा तो हुआ, लेकिन नियामकीय कार्रवाई और ठेवीदारों की भुगतान संबंधी शिकायतें फिर भी चर्चा में बनी रहीं। संस्था कहती है कि जमा राशि सुरक्षित है, पर सवाल यह है कि मैच्योर हो चुके पैसे की वापसी कब और कैसे होगी।

ऐसे में 24 सितंबर की AGM में सिर्फ Balance Sheet, Profit and Loss और Budget पर बात करना काफी नहीं होगा। सदस्यों के सामने कई सीधे सवाल हैं - कितनी FD मैच्योर होने के बावजूद भुगतान का इंतजार कर रही हैं, कुल लंबित रकम कितनी है, भुगतान की साफ समयसीमा क्या है, CRCS की कार्रवाई के बाद संस्था की वित्तीय हालत क्या है, नए deposits और renewal पर लगी रोक को लेकर संस्था ने क्या किया है, SIT जांच का मौजूदा हाल और आधिकारिक नतीजा क्या है, और संस्था की संपत्ति बेचने का प्रस्ताव क्यों लाया जा रहा है तथा उससे मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल किस काम में होगा। सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि जिनका पैसा मैच्योर हो चुका है, उन्हें वह कब मिलेगा।

AGM में अनुशासन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन डेकोरम के नाम पर सदस्यों को अपने पैसे और संस्था के कामकाज से जुड़े मुश्किल सवाल पूछने से रोका नहीं जाना चाहिए। यह मीटिंग सिर्फ एक औपचारिक AGM नहीं, बल्कि वह मंच है जहां प्रबंधन के पास दस्तावेजों और आंकड़ों के साथ जवाब देने का मौका है। अगर सवाल उठते हैं तो जरूरी यह होगा कि उन्हें "डेकोरम" कहकर टाला न जाए, बल्कि रिकॉर्ड पर जवाब दिया जाए। AGM होगी, सवाल भी होंगे - अब देखना यह है कि जवाब कितने मिलते हैं।

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