निखिल कामथ ने स्टार्टअप्स को चेताया: फंड अभी जुटा लो, आगे का वक्त खराब हो सकता है
ज़िरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ ने एक्स पर फंड जुटाने की सलाह वाली पोस्ट पर '100' का इमोजी डालकर सहमति जताई।
स्टार्टअप की दुनिया में इन दिनों एक छोटी सी पोस्ट और एक छोटे से इमोजी की खूब चर्चा है। ज़िरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ ने एक ऐसी पोस्ट से सहमति जताई है, जिसमें कंपनियों को सलाह दी गई है कि फंड जुटाना है तो अभी जुटा लें, क्योंकि आने वाला साल मुश्किल हो सकता है।
यह पोस्ट गुरुवार रात सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म 'एक्स' (X) पर अरविंद नाम के यूजर ने डाली थी। उन्होंने लिखा कि जिन स्टार्टअप्स या कंपनियों को फंड जुटाना है, वे बिल्कुल देर न करें। उनके मुताबिक यह वक्त शायद सबसे अच्छा है। उनकी सलाह थी कि इतना फंड जुटाया जाए कि अगले एक-दो साल आराम से निकल जाएं। साथ ही खर्च को लेकर सावधान रहने को कहा गया और बचे हुए पैसे ऐसी जगह लगाने की बात कही गई, जहां से जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाले जा सकें। पोस्ट की आखिरी लाइन सबसे ज्यादा इशारा करने वाली थी: "आगे का वक्त बुरा हो सकता है।" यानी आगे का वक्त खराब हो सकता है।
इस पोस्ट के जवाब में निखिल कामथ ने सिर्फ '100' का इमोजी डाला। इसका मतलब है कि वे इस बात से सौ फीसदी सहमत हैं। उन्होंने और कुछ नहीं लिखा, लेकिन बाजार को समझने वालों के लिए इशारा काफी था। इस पोस्ट को दो लाख से ज्यादा लोगों ने देखा है और छह हजार से ज्यादा लोगों ने पसंद किया है। साफ है कि ऐसा डर कई लोगों के मन में पहले से था।
अब आंकड़ों पर नजर डालें तो ट्रैक्सन (Tracxn) की रिपोर्ट के मुताबिक 2026 के पहले नौ महीनों में देश में 1134 फंडिंग राउंड हुए। पिछले साल इसी दौरान यह संख्या 1838 थी। यानी सौदों की गिनती में बड़ी गिरावट आई है। लेकिन कुल रकम घटी नहीं, बल्कि थोड़ी बढ़कर 9.7 अरब डॉलर से 10.3 अरब डॉलर हो गई है। सीधा मतलब यह कि सौदे कम हुए, पर बड़े हुए।
इसका सबसे ज्यादा फायदा बेंगलुरु को मिला। क्रेड (Cred) ने 54 करोड़ डॉलर, रैपिडो (Rapido) ने 24 करोड़ डॉलर और सर्वम (Sarvam) ने 23.4 करोड़ डॉलर जुटाए। क्रेडिटबी ने 22 करोड़ डॉलर, उड़ान ने 16 करोड़ डॉलर और एमर्जेंट ने 13 करोड़ डॉलर इकट्ठा किए। राइडरिवर, स्लाइस, नवी और पिक्सेल ने भी कम से कम 10-10 करोड़ डॉलर जमा किए।
तस्वीर का दूसरा पहलू थोड़ा मुश्किल है। कंपनियों के लिए अब 'यूनिकॉर्न' का दर्जा बचाए रखना आसान नहीं रहा। निवेशक कंपनियों की वैल्यूएशन को नए सिरे से परख रहे हैं। ट्रैक्सन के मुताबिक 2024 से अब तक कम से कम दस भारतीय स्टार्टअप्स की वैल्यूएशन गिरी है और वे यूनिकॉर्न की लिस्ट से बाहर हो गए हैं। एक अरब डॉलर या उससे ज्यादा वैल्यू वाली प्राइवेट कंपनी को यूनिकॉर्न कहा जाता है।
2021 की बेहिसाब फंडिंग के दौर के बाद अब बाजार संभल रहा है। निवेशक अब सिर्फ बड़े सपने नहीं देखते, वे पूछ रहे हैं कि मुनाफा कहां होगा और ग्रोथ टिकाऊ है या नहीं। मुनाफे पर जोर बढ़ा है। इसी बीच एआई (AI) ने पूरा खेल बदल दिया है।
एआई की बढ़ती दीवानगी की वजह से विदेशी पूंजी का बड़ा हिस्सा अमेरिका की तरफ खिंच गया है। भारत में भी नए निवेश फंड का बड़ा हिस्सा एआई कंपनियों के लिए रखा जा रहा है। एक्सेल (Accel) का 55 करोड़ डॉलर का नया इंडिया फंड इसका अच्छा उदाहरण है। यह फंड अगले साल से निवेश शुरू करेगा और इसका मुख्य फोकस एआई पर रहेगा।