नेतन्याहू भड़के: उपनिवेशवाद तुमने ही किया, हमें सुनाना बंद करो
संयुक्त राष्ट्र का महाधिवेशन चल रहा है और इसमें एक के बाद एक बड़ी घटनाएं सामने आ रही हैं। ईरान के प्रधानमंत्री ने अमेरिका के सामने न झुकने का रुख कायम रखते हुए जोरदार भाषण दिया। नेतन्याहू का भाषण शुरू होते ही कई देशों के प्रतिनिधि उठकर बाहर चले गए।
ट्रम्प ने धमकी जैसा भाषण दिया, जबकि भारत के प्रधानमंत्री मोदी इस बार मौजूद ही नहीं रहे। इसी बीच इस्रायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान उन देशों पर जोरदार निशाना साधा जो इस्रायल पर वसाहतवाद यानी कॉलोनियलिज्म का आरोप लगाते हैं। खासकर ब्रिटन और फ्रांस का नाम लेते हुए उन्होंने इन देशों की ऐतिहासिक वसाहतवादी भूमिका पर सवाल उठाए।
नेतन्याहू ने कहा कि इस्रायल पर वसाहतवाद का आरोप लगाने वालों में ब्रिटन और फ्रांस के लोग भी शामिल हैं। उनके मुताबिक इन दोनों देशों की कॉलोनियां पूरी दुनिया में फैली हुई थीं। ब्रिटन के साम्राज्य को लेकर तो यह कहा जाता था कि उसका सूरज कभी डूबता ही नहीं।
नेतन्याहू ने सख्त शब्दों में कहा कि आज वही देश दूसरों पर आरोप लगा रहे हैं। यह वैसा ही है जैसे सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली हो। इसलिए हम पर आरोप लगाने का नैतिक हक ब्रिटन और फ्रांस के लोगों को बिल्कुल नहीं है।
अपने भाषण में नेतन्याहू ने इस्रायल की स्थापना के बाद हुए युद्ध और देश की सुरक्षा के मुद्दों का हवाला दिया। इस्रायल की जमीन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों और देश के वजूद के सवाल को जोड़ते हुए उन्होंने अपनी बात रखी। यही बोलते समय कुछ देशों के प्रतिनिधि सभा से बाहर निकल गए, जबकि नेतन्याहू के प्रतिनिधियों ने इस्रायल के समर्थन में नारे लगाए।
दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटन बुरी तरह टूट गया था, जिसके बाद उसने जहां-जहां से अपना कारोबार समेटना मुमकिन था, वहां से समेटना शुरू कर दिया। उस दौर में ब्रिटन और यूरोपीय देश खुद को दुनिया का सबसे बड़ा ताकतवर मानते थे। भारत को हमेशा परेशानी में रखने की उसी सोच के तहत ब्रिटन ने भारत के कुछ लोगों का सहारा लेकर भारत का बंटवारा कराया और पाकिस्तान को जन्म दिया।
एक ही जमीन पर लाइन खींचकर उस इलाके को हकीकत में जलती चिता बना दिया गया। फूट डालो और राज करो की उसी नीति के तहत ब्रिटन ने मध्यपूर्व में पैलेस्टाइन की जमीन इस्रायल को दे दी, ताकि मुसलमानों के बीच इस्रायल को जन्म देकर मध्यपूर्व से शांति गायब कर दी जाए।
आज वही देश जब उन्हीं कदमों पर चलते हुए गाजा और लेबनान में जमीन कब्जा रहा है, तो ये लोग इस्रायल को सीख देने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अब इंटरनैशनल पॉलिटिक्स में ब्रिटन की पहले जैसी अहमियत नहीं बची है, इस वजह से उनकी बातों को इस्रायल कितना गंभीरता से लेता है, यह उनकी आलोचना से ही साफ हो रहा है। इसीलिए दुनिया के जानकार ब्रिटन और फ्रांस को अपने कर्मों का फल भुगतने की सलाह देते नजर आ रहे हैं।