नेमडा के स्कूल की इमारत जर्जर, पहली से चौथी के बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर
सिरोंचा के पास जाफराबाद ग्राम पंचायत के नेमडा में जिला परिषद प्राथमिक स्कूल की इमारत खतरनाक हो चुकी है। जुलाई से बच्चे खुले मैदान में पेड़ के नीचे पढ़ रहे हैं।
सिरोंचा मुख्यालय से 35 किमी दूर जाफराबाद ग्राम पंचायत के तहत आने वाले नेमडा गांव के जिला परिषद प्राथमिक स्कूल के बच्चों की पढ़ाई का हाल बेहद खराब है। स्कूल की इमारत जर्जर और खतरनाक हो गई है। इसी वजह से जुलाई महीने से पहली से चौथी कक्षा के छोटे बच्चों को पेड़ के नीचे बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।
बारिश हो, धूप हो या बदलता मौसम, बच्चे खुले मैदान में ही पढ़ाई कर रहे हैं। इमारत की छत में दरारें पड़ गई हैं और कई जगह से प्लास्टर उखड़ चुका है। छत पर नमी, काई और पानी टपकने के दाग साफ दिखाई देते हैं।
दीवारों का प्लास्टर भी उखड़ गया है और खिड़कियों की लोहे की छड़ें जंग खा चुकी हैं। ऐसे में बच्चों को इमारत के अंदर बैठाना खतरे से खाली नहीं हो सकता। इसी खतरे को देखते हुए टीचरों ने बच्चों को बाहर बैठाने का फैसला किया।
बताया जा रहा है कि टीचरों ने इमारत के जर्जर होने की जानकारी संबंधित शिक्षा विभाग को दे दी है। इमारत को निर्लेखित करने के लिए भी पत्र लिखा गया है। लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है, इसलिए बच्चों को पेड़ के नीचे ही पढ़ना पड़ रहा है।
अचानक बारिश आ जाए तो क्लास बिखर जाती है। गर्मी के मौसम में बढ़ते तापमान से बच्चों की सेहत का सवाल खड़ा होने की आशंका है। बरसात और गर्मी, दोनों में बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सेहत पर भी असर पड़ सकता है।
स्कूल में सुरक्षित क्लासरूम की समस्या के साथ टीचरों के खाली पद भी ग्रामीण शिक्षा के सामने दूसरी चुनौती बने हुए हैं। यानी क्लासरूम की कमी और टीचरों की कमी, इस दोहरी मुश्किल में बच्चों की पढ़ाई फंसी हुई है। एक तरफ आधुनिक और डिजिटल शिक्षा का खूब शोर है, दूसरी तरफ प्राथमिक स्कूल के बच्चों के सिर पर सुरक्षित छत तक नहीं है।
अभिभावक और गांव वाले मांग कर रहे हैं कि स्कूल का तुरंत मुआयना किया जाए और इमारत की तकनीकी जांच हो। बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक इंतजाम किया जाए और नई स्कूल इमारत बनाने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की जाए। अभिभावक और गांव वाले अब प्रशासन से पूछ रहे हैं कि उन्हें सुरक्षित स्कूल कब मिलेगा।