नवी मुंबई: कोपरखैरणे में गणेशोत्सव में साकार हुई सातारा की बावधन बगाड यात्रा की २० फुट प्रतिकृति
कोपरखैरणे के माऊली सार्वजनिक उत्सव मंडल ने इस बार सातारा जिले की मशहूर बावधन बगाड यात्रा की झलक अपने पंडाल में उतारी, दो दिन पारंपरिक तरीके से मनाया गणेशोत्सव।
गणेशोत्सव के दौरान मुंबई और नवी मुंबई में हर साल अलग-अलग झांकियां, सामाजिक संदेश देने वाली सजावट और परंपरा की झलक देखने को मिलती है। इस बार भी कई गणेश मंडलों ने अनोखे कॉन्सेप्ट पेश किए हैं, और इसी कड़ी में नवी मुंबई के कोपरखैरणे स्थित माऊली सार्वजनिक उत्सव मंडल ने सातारा जिले के बावधन गांव की मशहूर बगाड यात्रा की 20 फुट प्रतिकृति तैयार की है।
मंडल ने इस साल बावधन गांव की बगाड यात्रा का कॉन्सेप्ट चुना है। गणपति आगमन से एक दिन पहले बावधन की शाही छबिना और पालखी सोहला जैसा माहौल तैयार किया गया। आगमन के दिन मंडल के गणपति को बगाड पर बिठाकर जुलूस निकाला गया। इस पूरे आयोजन में बावधन गांव के 20 वादक और मर्दानी खेल भी शामिल किए गए। दो दिन का यह पूरा कार्यक्रम पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ।
बावधन की बगाड यात्रा भले ही मशहूर है, लेकिन हर किसी को वहां जाकर उसे देखना संभव नहीं होता। सिर्फ रील्स और फोटो में यह यात्रा देखने के बजाय आसपास के लोग इसे खुद अनुभव कर सकें, इसी सोच के साथ मंडल ने यह कॉन्सेप्ट साकार किया। खास बात यह है कि मंडल ने इस बार किसी तरह के DJ या बैंजो के बिना, पूरी तरह पारंपरिक तरीके से गणेशोत्सव मनाने की कोशिश की। पारंपरिक वाद्य, मर्दानी खेल और यात्रा की प्रतिकृति की वजह से इलाके में गणेशोत्सव को एक अलग ही रूप मिला।
माऊली सार्वजनिक उत्सव मंडल के गणेशोत्सव की शुरुआत भी एक छोटे से सपने से हुई थी। साल 2011 में चाल के चबूतरे पर बैठे कुछ बच्चों ने गणेशोत्सव मनाने का सपना देखा था, और उसके बाद चाल के ऑफिस में गणेशमूर्ति की स्थापना कर इस उत्सव की शुरुआत हुई। समय के साथ ये बच्चे बड़े होते गए और उनका जज्बा भी बढ़ता गया। इसी जज्बे की वजह से कोपरखैरणे सेक्टर 3 की चाल का यह छोटा सा गणेशोत्सव आज पूरे इलाके में पहचाना जाने लगा है। इस मंडल के गणपति को 'गोड गणपति' के नाम से भी पहचान मिली है। 2022 में मंडल पहली बार खड़ी गणेशमूर्ति लेकर आया था, जिसके बाद तंग चाल से 14 फुट ऊंचे 'गोड गणपति' का सफर शुरू हुआ। लेकिन इस बार मंडल ने गणेशोत्सव पूरी तरह पारंपरिक तरीके से मनाने का फैसला लेते हुए सातारा जिले की मशहूर बावधन बगाड यात्रा की पूरी 20 फुट प्रतिकृति तैयार की है।
इस कॉन्सेप्ट पर पिछले पांच महीनों से काम चल रहा था। मई महीने में बावधन गांव के मान्यवरों और जुड़े लोगों से बातचीत कर यात्रा का अध्ययन किया गया। इसके बाद गांव वालों की मदद से बगाड का रथ और यात्रा से जुड़ी तमाम चीजें हूबहू तैयार की गईं।
मंडल ने अगले पांच साल के लिए 'महाराष्ट्र की पांच बड़ी यात्राएं' नाम से एक कॉन्सेप्ट भी तय किया है, और इसी के तहत इस साल बावधन बगाड यात्रा को चुना गया है। गणेशोत्सव के साथ-साथ माऊली सार्वजनिक उत्सव मंडल की ओर से साल भर कई सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं, जिससे गणेशोत्सव सिर्फ एक उत्सव न रहकर सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जुड़ जाता है।