नासा ने टमाटर के 1.25 करोड़ बीज 6 साल अंतरिक्ष में रखे, स्कूलों में बुवाई के नतीजे हैरान करने वाले
नासा के SEEDS प्रयोग में टमाटर के बीज छह साल तक अंतरिक्ष में रहे, फिर दुनियाभर के स्कूलों में बच्चों ने उन्हें उगाकर नतीजे दर्ज किए
अंतरिक्ष और धरती पर जिंदगी के बीच रिश्ता समझने के लिए साइंटिस्ट अक्सर नए-नए एक्सपेरिमेंट करते रहते हैं। लेकिन अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने 1984 में जो प्रयोग शुरू किया था, उसे दुनिया का सबसे अनोखा और सबसे बड़ा एजुकेशनल एक्सपेरिमेंट माना जाता है। इस प्रोजेक्ट का नाम था SEEDS, यानी Space Exposed Experiment Developed for Students।
इस प्रयोग में नासा ने Rutgers California Supreme किस्म के टमाटर के करीब 1.25 करोड़ (12.5 दशलक्ष) बीज एक खास डिवाइस के जरिए सीधे अंतरिक्ष में भेज दिए थे। मकसद यह देखना था कि अंतरिक्ष का बेहद मुश्किल माहौल, रेडिएशन और माइक्रोग्रैविटी यानी सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण, इन बीजों के उगने और बढ़ने की क्षमता पर क्या असर डालते हैं।
इस पूरे प्रोजेक्ट को अंजाम देने के लिए नासा हेडक्वार्टर, लैंग्ली रिसर्च सेंटर और अमेरिका की मशहूर सीड सप्लायर कंपनी जॉर्ज डब्ल्यू. पार्क सीड ने मिलकर काम किया। बीजों को अंतरिक्ष में रखने के लिए 9.7 टन वजन वाला एक 12 साइड वाला बड़ा सिलेंडर जैसा उपकरण इस्तेमाल हुआ, जिसका नाम था Long Duration Exposure Facility (LDEF)। यह डिवाइस 5 अप्रैल 1984 को चैलेंजर स्पेसक्राफ्ट के जरिए कक्षा में भेजा गया था। शुरुआती प्लान के मुताबिक बीज एक साल के अंदर वापस लाए जाने थे, लेकिन 1986 में चैलेंजर हादसे की वजह से नासा के मिशन लंबे खिंच गए, और ये बीज पूरे 6 साल यानी 69 महीने तक अंतरिक्ष में घूमते रहे। आखिरकार 12 जनवरी 1990 को कोलंबिया स्पेसक्राफ्ट के जरिए इन बीजों को सुरक्षित तरीके से धरती पर वापस लाया गया।
बीज सही-सलामत धरती पर पहुंचने के बाद नासा ने इस प्रयोग का दूसरा और सबसे अहम एजुकेशनल फेज शुरू किया। इसे सिर्फ लैब तक सीमित रखने के बजाय नासा ने पूरी दुनिया के स्टूडेंट्स तक पहुंचाने का फैसला लिया। इसके लिए नासा ने करीब 1,32,000 खास प्लांटिंग किट तैयार कीं और अमेरिका के 50 राज्यों समेत दुनिया के 40 देशों के 40,000 स्कूलों में ये किट बांटी गईं। इस तरह करीब 33 लाख (3.3 दशलक्ष) स्टूडेंट्स इस ऐतिहासिक प्रयोग में सीधे शामिल हुए।
हर किट में बीजों के दो सेट दिए गए थे। पहले सेट में वे बीज थे जो 6 साल अंतरिक्ष में रह चुके थे, और दूसरे सेट में (जिसे साइंस की भाषा में कंट्रोल ग्रुप कहा जाता है) वही बीज थे जो इतने ही समय तक धरती पर कंट्रोल्ड कंडीशन में रखे गए थे। बच्चों ने दोनों सेट के बीज एक ही वक्त, एक जैसी मिट्टी में बोए और उनकी ग्रोथ, पहला अंकुर फूटने, पत्तियां और फूल आने की रोजाना नोटिंग शुरू की। इस पूरी एक्सरसाइज से छोटी उम्र में ही बच्चों में साइंस को लेकर दिलचस्पी और रिसर्च की आदत बनने में बड़ी मदद मिली।
दुनियाभर के क्लासरूम से स्टूडेंट्स के लगाए पौधों की सारी जानकारी और रिपोर्ट इकट्ठा करके एनालिसिस के लिए नासा को भेजी गई। नासा को स्कूलों से करीब 8,000 पूरी रिपोर्ट मिलीं, जिनके गहराई से एनालिसिस के बाद कुछ बड़े दिलचस्प और चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। पता चला कि अंतरिक्ष से लौटे बीजों का उगने का रेट 73.8 फीसदी था, जबकि धरती पर सुरक्षित रखे गए बीजों का उगने का रेट 70.3 फीसदी था। यानी अंतरिक्ष वाले बीजों का उगने का रेट धरती वाले बीजों से थोड़ा ज्यादा निकला।
इसके अलावा उगने की स्पीड में भी फर्क दिखा। अंतरिक्ष वाले बीजों को पहला अंकुर फूटने में औसतन 8 दिन लगे, जबकि धरती वाले बीजों को 8.3 दिन लगे। शुरुआती 3 से 4 हफ्तों में अंतरिक्ष वाले बीजों से निकले पौधों की ग्रोथ काफी तेज रही। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से जांच करने पर रिसर्चर्स को पता चला कि अंतरिक्ष के रेडिएशन की वजह से बीजों के बाहरी कवर पर बारीक छेद बन गए होंगे, जिससे उन्होंने पानी और पोषक तत्व तेजी से सोख लिए। हालांकि पूरी ग्रोथ के बाद पौधों की शक्ल, पत्तियों, फूलों और फलों के स्वाद में कोई परमानेंट या जेनेटिक बदलाव नहीं मिला।
नासा के इस SEEDS प्रोजेक्ट को इंसानी इतिहास के सबसे बड़े और सबसे कामयाब क्लासरूम एक्सपेरिमेंट्स में गिना जाता है। इस प्रयोग ने यह साबित कर दिया कि इतनी मुश्किल हालत और इतने लंबे वक्त तक अंतरिक्ष में रहने के बावजूद पौधों के बीज इंसानी इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रह सकते हैं और उनकी उगने की क्षमता बनी रहती है।
आज जब दुनियाभर की स्पेस एजेंसियां मंगल ग्रह और चांद पर इंसानी बस्ती बसाने के सपने देख रही हैं, तब नासा का यह पुराना प्रयोग स्पेस एग्रीकल्चर यानी अंतरिक्ष में खेती की नींव रखने वाला साबित हो रहा है। इस प्रयोग से मिली जानकारी का इस्तेमाल आज इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में ताजे फल और सब्जियां उगाने के लिए किया जा रहा है। इस तरह 6 साल अंतरिक्ष में गुजारने वाले टमाटर के इन 1.25 करोड़ बीजों ने न सिर्फ साइंस की दुनिया को बल्कि दुनियाभर के लाखों स्टूडेंट्स को साइंस की एक नई दिशा दिखाई।