मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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21:31 IST

नागपुर: प्रॉपर्टी रजिस्ट्री में गड़बड़ी का आरोप, 500-600 मामले जांच के घेरे में

युवा कांग्रेस ने नागपुर के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस नंबर 5 समेत कई दफ्तरों में फर्जी दस्तावेजों से रजिस्ट्री होने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।

नागपुर: प्रॉपर्टी रजिस्ट्री में गड़बड़ी का आरोप, 500-600 मामले जांच के घेरे में
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर में जमीन और प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र प्रदेश युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सब-रजिस्ट्रार ऑफिस नंबर 5 और कुछ अन्य दफ्तरों में करीब 500 से 600 दस्तावेजों की रजिस्ट्री फर्जी तरीके से या डुप्लिकेट कॉपी के आधार पर हुई है। संगठन का दावा है कि इसके लिए RL, NA परमिशन, टाउन प्लानिंग मैप और सैंक्शन्ड मैप जैसे अहम दस्तावेजों की कथित तौर पर फर्जी या डुप्लिकेट कॉपियां इस्तेमाल की गईं।

अगर जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं, तो इसका सीधा असर प्रॉपर्टी के मालिकाना हक और रजिस्ट्री रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर पड़ सकता है। यही वजह है कि युवा कांग्रेस ने तुरंत निष्पक्ष विभागीय जांच की मांग की है, जिसमें विवादित दस्तावेजों का मिलान संबंधित सरकारी विभागों के पास मौजूद ओरिजिनल रिकॉर्ड से किया जाए।

युवा कांग्रेस के महासचिव अक्षय हेटे की अगुवाई में एक डेलिगेशन ने नागपुर डिवीजन के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन और डिप्टी कंट्रोलर ऑफ स्टैम्प्स को इस कथित गड़बड़ी की विस्तृत जांच की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन के मुताबिक, कुछ प्रॉपर्टी रजिस्ट्रियों में जमा किए गए दस्तावेजों की सत्यता पर शक है। संगठन का आरोप है कि RL, NA, टाउन प्लानिंग मैप और सैंक्शन्ड मैप कथित तौर पर डुप्लिकेट या फर्जी तैयार करके रजिस्ट्री प्रोसेस में इस्तेमाल किए गए। युवा कांग्रेस ने मांग की है कि हर विवादित दस्तावेज की क्रॉस-चेकिंग संबंधित सरकारी विभागों के ओरिजिनल रिकॉर्ड से की जाए, ताकि यह साफ हो सके कि रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी के सामने पेश किए गए दस्तावेज असल में जारी हुई परमिशन, मैप और रिकॉर्ड से मेल खाते हैं या नहीं। संगठन ने कहा है कि जांच सिर्फ रजिस्ट्रेशन दफ्तरों में मौजूद दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि टाउन प्लानिंग और अन्य सक्षम अथॉरिटी के पास मौजूद ओरिजिनल सरकारी फाइलें, परमिशन, सैंक्शन्ड प्लान, मैप और संबंधित रिकॉर्ड भी खंगाले जाएं।

संगठन का कहना है कि यह गड़बड़ी सिर्फ एक-दो रजिस्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि करीब 500 से 600 संदिग्ध दस्तावेजों और रजिस्ट्रियों की जांच होनी चाहिए। युवा कांग्रेस के मुताबिक जांच में यह पता चलना चाहिए कि संदिग्ध दस्तावेज कहां तैयार हुए, किसने तैयार किए या जमा किए, रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी ने किस आधार पर इन्हें स्वीकार किया, दस्तावेजों का ओरिजिनल सरकारी रिकॉर्ड से मिलान हुआ था या नहीं, किन अफसरों या कर्मचारियों ने रजिस्ट्री का काम संभाला, और दस्तावेज रजिस्टर करने से पहले तय प्रोसेस फॉलो किया गया या नहीं। संगठन ने रजिस्ट्री-वार जांच की मांग की है, ना कि सिर्फ कागजी खानापूर्ति की।

युवा कांग्रेस ने रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी से यह भी अपील की है कि इन ट्रांजैक्शन से जुड़े CCTV फुटेज, कंप्यूटर रिकॉर्ड, डिजिटल एंट्री, दस्तावेजों की स्कैन कॉपी और इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन डेटा को तुरंत सुरक्षित रखा जाए। संगठन के मुताबिक इन रिकॉर्ड से यह पता चल सकता है कि किसी खास दस्तावेज की प्रोसेसिंग के वक्त दफ्तर में कौन मौजूद था, रजिस्ट्री किसने संभाली और सिस्टम में एंट्री कब हुई। यह डिजिटल ट्रेल जांच एजेंसियों को रजिस्ट्रेशन प्रोसेस दोबारा समझने और इसमें शामिल अफसरों, बिचौलियों या अप्लाई करने वालों की पहचान करने में मदद कर सकती है।

युवा कांग्रेस ने खासतौर पर सब-रजिस्ट्रार कृष्णा राउत के साथ-साथ रजिस्ट्री से जुड़े अन्य अफसरों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है। हालांकि, राउत और अन्य अफसरों पर लगाए गए आरोप अभी स्वतंत्र रूप से साबित नहीं हुए हैं। संगठन ने खुद ही जांच की मांग की है ताकि यह तय हो सके कि इसमें कोई ऑफिशियल लापरवाही, चूक या जानबूझकर फर्जी दस्तावेज स्वीकार करने की बात थी या नहीं। जांच में यह भी साफ होना चाहिए कि विवादित दस्तावेज रजिस्ट्रेशन दफ्तरों तक कैसे पहुंचे, उनकी कितनी जांच हुई और किसने इन्हें अप्रूव या प्रोसेस किया।

युवा कांग्रेस ने अपने ज्ञापन के साथ कथित तौर पर फर्जी सील वाले दस्तावेज भी सबूत के तौर पर अथॉरिटी को सौंपे हैं। संगठन ने मांग की है कि इन दस्तावेजों की टेक्निकल और विभागीय जांच हो ताकि उनकी सत्यता साबित हो सके। अगर सील या दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

युवा कांग्रेस का कहना है कि मामला सिर्फ आंतरिक विभागीय जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अगर जांच में फर्जी दस्तावेज, नकली सील या रजिस्ट्रेशन नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज होने चाहिए। संगठन ने यह भी मांग की है कि जांच एजेंसियां पूरी चेन का पता लगाएं, यानी कथित फर्जी दस्तावेज तैयार होने से लेकर रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी के सामने पेश होने और फाइनल रजिस्ट्री तक। इससे यह पता चल सकेगा कि यह गड़बड़ी किसी एक व्यक्ति की करतूत थी या इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।

युवा कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन तुरंत निष्पक्ष जांच शुरू नहीं करता और जिम्मेदार लोगों पर एक्शन नहीं लेता, तो संगठन आंदोलन तेज करेगा। संगठन का कहना है कि जमीन और प्रॉपर्टी के दस्तावेज सीधे नागरिकों के मालिकाना हक और प्रॉपर्टी की सुरक्षा से जुड़े होते हैं, इसलिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में इस्तेमाल दस्तावेजों की सत्यता पर उठे किसी भी सवाल की पारदर्शी जांच जरूरी है।

यह ज्ञापन अक्षय हेटे की अगुवाई में युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों ने नागपुर डिवीजन के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन और डिप्टी कंट्रोलर ऑफ स्टैम्प्स को सौंपा। इस दौरान सुशांत लोखंडे, रज़ा अली, समीर तिमांडे, आशुतोष कांबले, शिवम चौधरी, साहिल मोहोड और अनूप भंडारी समेत कई लोग मौजूद रहे।

इस शिकायत के बाद अब रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट जांच के दायरे में आ गया है। अहम सवाल यह है कि क्या कथित 500-600 संदिग्ध रजिस्ट्रियों की ट्रांजैक्शन-वार जांच ओरिजिनल सरकारी रिकॉर्ड से की जाएगी, और क्या डिपार्टमेंट सबूत गायब होने से पहले CCTV और डिजिटल ट्रेल को सुरक्षित रखेगा। अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ कुछ रजिस्ट्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नागपुर में दस्तावेज सत्यापन, अफसरों की जवाबदेही और फर्जी जमीन-प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन रोकने की व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े कर सकता है।

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