मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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23:39 IST

नागपुर में भाई ने मारा चाकू, यह झूठी कॉल पड़ी शख्स को भारी

हुड़केश्वर इलाके में एक शख्स ने डायल-112 पर बार-बार कॉल करके भाई से जान का खतरा बताया, मौके पर पहुंची पुलिस को कुछ नहीं मिला।

नागपुर में भाई ने मारा चाकू, यह झूठी कॉल पड़ी शख्स को भारी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर के हुड़केश्वर इलाके में पुलिस को गच्चा देने की एक अजीब कोशिश सामने आई है। एक शख्स ने इमरजेंसी हेल्पलाइन डायल-112 पर सात से आठ बार लगातार कॉल करके यह दावा किया कि उसके भाई ने उसे चाकू मार दिया है और उसकी जान खतरे में है। लेकिन जब पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां चाकू से हमले या हत्या की कोशिश का कोई सबूत नहीं मिला।

यह घटना 18 सितंबर को रात करीब 8 बजे हुड़केश्वर पुलिस स्टेशन की हद में आने वाले श्री कृष्ण नगर इलाके की है। पुलिस के मुताबिक इलाके में रहने वाले 40 साल के श्याम भाऊराव जानोरकर ने बार-बार इमरजेंसी हेल्पलाइन पर फोन करके यह चौंकाने वाली बात कही कि उसके भाई ने उस पर चाकू से हमला किया है।

मामला गंभीर लगने पर हुड़केश्वर पुलिस ने फौरन एक टीम को हकीकत जांचने के लिए भेजा। सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर अनामिका मिर्जापुरे के आदेश पर सब-इंस्पेक्टर प्रवीण बकारे, पुलिसकर्मी रविदत्त तांबे और आशिष, और बीट मार्शल हेड कॉन्स्टेबल सोमेश्वर बुलबुले मौके पर पहुंचे।

लेकिन वहां न तो कोई घायल शख्स मिला, न ही किसी घटना के निशान। जानोरकर बार-बार की गई इन कॉल्स की कोई ठीक-ठाक वजह पुलिस को नहीं बता पाया। पूछताछ में उसने घुमा-फिरा कर जवाब दिए, ऐसा पुलिस का कहना है।

पुलिस ने मौके पर ही जांच की, लेकिन इमरजेंसी कॉल्स में किए गए चाकू से हमले या हत्या की कोशिश के दावे का कोई सबूत नहीं मिला। जांच में यह बात सामने आई कि यह इमरजेंसी हेल्पलाइन के जरिए झूठी जानकारी देकर पुलिस मशीनरी को गुमराह करने की जानबूझकर की गई कोशिश थी।

पूछताछ के बाद हेड कॉन्स्टेबल सोमेश्वर बुलबुले की शिकायत पर सब-इंस्पेक्टर प्रवीण बकारे ने जानोरकर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 217 के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस ने इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम के गलत इस्तेमाल के क्या नतीजे हो सकते हैं, क्योंकि बार-बार की जाने वाली झूठी कॉल्स असली इमरजेंसी से पुलिस के जवानों और संसाधनों को भटका सकती हैं।

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