नागपुर में बारिश के बाद उमस से बीमार पड़ रहे लोग, 2 दिन में मेडिकल की ओपीडी में 3,000 मरीज
नागपुर के शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय एवं अस्पताल में उमस के चलते मरीजों की भीड़ बढ़ी, त्वचा रोग विभाग सबसे ज्यादा प्रभावित
नागपुर शहर और जिले में बारिश तो हो गई, लेकिन उमस से लोगों को राहत नहीं मिली। दिनभर मौसम में उबाल जैसी हालत बनी रहने का असर अब सीधे लोगों की सेहत पर दिखने लगा है।
मौसम में बदलाव, संक्रमण और त्वचा से जुड़ी शिकायतों के चलते शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय एवं अस्पताल यानी मेडिकल की ओपीडी में इन दिनों मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। पिछले 2 दिनों में ही मेडिकल की ओपीडी में 3,000 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचे हैं।
इनमें संक्रामक बीमारियों और तरह-तरह के इंफेक्शन से परेशान मरीजों की तादाद भी काफी बताई जा रही है। मेडिकल अस्पताल में जिले के अलग-अलग इलाकों के अलावा दूसरे राज्यों से भी मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। बारिश की वजह से वातावरण में नमी बढ़ने और लगातार बनी उमस से कई तरह की सेहत से जुड़ी दिक्कतें बढ़ रही हैं। आम बीमारियों के मरीजों के साथ-साथ संक्रमण और त्वचा रोग से परेशान मरीज भी बड़ी तादाद में ओपीडी का रुख कर रहे हैं, जिससे अस्पताल के पंजीयन काउंटर से लेकर अलग-अलग विभागों तक भीड़ नजर आ रही है।
सबसे ज्यादा दबाव त्वचा रोग विभाग की ओपीडी पर है। सोमवार को यहां मरीजों की संख्या 1,050 तक पहुंच गई, जो साल भर बाद देखने को मिला है। मंगलवार को भी 800 से ज्यादा मरीजों ने यहां इलाज कराया। लगातार 2 दिन इतनी बड़ी तादाद में मरीज आने से ओपीडी पर काम का दबाव बढ़ गया है।
त्वचा रोग विभाग के प्रमुख डॉ. जयेस मुखी के मुताबिक, बारिश के बाद वातावरण में नमी और उमस बढ़ने से फंगल इंफेक्शन जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। इसके अलावा त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते और दूसरी संक्रमण संबंधी शिकायतें लेकर भी मरीज पहुंच रहे हैं। डॉ. मुखी ने बताया कि मौसम में बदलाव की वजह से इस तरह की शिकायतों में अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है।
मेडिकल में मरीजों की भीड़ बढ़ने की एक बड़ी वजह निजी अस्पतालों और क्लिनिकों में इलाज का बढ़ता खर्च भी है। महंगी जांच, डॉक्टर की फीस और दवाइयों के खर्च के चलते कई मरीज मेडिकल में इलाज कराना पसंद कर रहे हैं, जहां सिर्फ 20 रुपये के पंजीयन शुल्क में इलाज की सुविधा मिल जाती है। शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय में मरीजों को अस्पताल से करीब 60 प्रतिशत दवाइयां भी मुफ्त दी जा रही हैं। कम खर्च में इलाज और दवाइयां मिलने के चलते बड़ी तादाद में मरीज मेडिकल की ओपीडी की तरफ रुख कर रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के वैद्यकीय अधीक्षक डॉ. अविनाश गावंडे ने बताया कि ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ी है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के सीजन में आमतौर पर भीड़ कम रहती थी, लेकिन इस बार हालत उलटी बनी हुई है। डॉ. गावंडे के मुताबिक सभी मरीजों का सही तरीके से इलाज किया जा रहा है, डॉक्टरों की टीम पूरी मेहनत से लगी हुई है और वार्डों में भर्ती मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति सामान्य है।