नागपुर मेडिकल कॉलेज ने पूरी कीं 500 रोबोटिक सर्जरी, सरकारी अस्पतालों में देश में पहला
नागपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज में ढाई साल में 500 रोबोटिक सर्जरी पूरी हुईं, डीन डॉ. राज गजभिये ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया।
नागपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज यानी जीएमसी ने रोबोटिक सर्जरी में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। यहां अब तक कुल 500 रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी हैं। संस्था का कहना है कि इतनी सर्जरी करने वाला जीएमसी नागपुर देश का पहला सरकारी मेडिकल कॉलेज बन गया है।
यह सफर फरवरी 2024 में शुरू हुआ था और ढाई साल से ज्यादा वक्त में यह आंकड़ा 500 तक पहुंचा है। डीन डॉ. राज गजभिये की अगुवाई में हुई इन सर्जरी में जनरल सर्जरी, प्रसूति और स्त्री रोग, यूरो सर्जरी, कार्डियोवास्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी यानी सीवीटीएस, और पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग शामिल रहे।
इसी कड़ी में जीएमसी में मध्य भारत की पहली रोबोटिक माइटूल वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी भी सफलतापूर्वक की गई। यह जटिल हार्ट सर्जरी जयपुर से आए रोबोटिक कार्डियक सर्जन डॉ. ललित मलिक ने की। संस्था के मुताबिक सरकारी क्षेत्र में इस तरह की सर्जरी का यह संभवत पहला मामला है।
यह सारा काम स्वदेशी एसएसआई मंत्रा सर्जिकल रोबोटिक सिस्टम की मदद से हुआ, जिसकी वजह से रोबोटिक तकनीक अब सरकारी अस्पतालों तक पहुंच पाई है। डॉ. गजभिये ने कहा कि 500 सर्जरी सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में अत्याधुनिक तकनीक अब आम मरीज तक पहुंच रही है।
500वीं सर्जरी पूरी होने के मौके पर जीएमसी और एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ने मिलकर डॉ. शकुंतला गोखले हॉल में रोबोटिक सर्जरी पर लाइव ऑपरेटिव वर्कशॉप रखी। इसमें भोपाल से रोबोटिक गायनेक सर्जन डॉ. प्रिया भावे ने भोपाल में बैठे-बैठे जीएमसी नागपुर के एक मरीज पर टेलीसर्जरी की। इसके अलावा फरीदाबाद के रोबोटिक यूरो-ऑन्को सर्जन डॉ. रितेश मोधा ने रोबोटिक नेफेक्टोमी करके दिखाई।
इस उपलब्धि के बाद जीएमसी नागपुर अब रोबोटिक सर्जरी तकनीक को और मजबूत बनाने की तैयारी में है। कॉलेज का इरादा है कि आने वाले वक्त में नए और युवा सर्जनों को रोबोटिक तकनीक और टेलीसर्जरी में खास ट्रेनिंग दी जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा जटिल ऑपरेशन कम समय में और सटीक तरीके से पूरे हो सकें।
संस्था के मुताबिक स्वदेशी तकनीक के इस्तेमाल से इलाज का खर्च भी कम होगा और सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का भरोसा और बढ़ेगा।