मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:41 IST

नागपुर के स्कूल ने पालक के सवाल पर दोनों बच्चों को निकाला, जांच में यू-डायस नंबर ही नहीं मिला

बेसा के विवेक सूर्यवंशी ने छुट्टियों पर सवाल पूछा तो श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल ने उनके दोनों बच्चों को स्कूल आने से रोक दिया। शिक्षा और महिला व बाल कल्याण विभाग की जांच शुरू हो गई है।

नागपुर के स्कूल ने पालक के सवाल पर दोनों बच्चों को निकाला, जांच में यू-डायस नंबर ही नहीं मिला
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर के बेसा इलाके में रहने वाले विवेक सूर्यवंशी ने स्कूल से इतनी छुट्टियों की वजह पूछी, तो स्कूल ने उनके दोनों बच्चों को ही स्कूल आने से रोक दिया। यह मामला 'श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल' का है, जो एक प्राइवेट स्कूल है। पालकों का आरोप है कि स्कूल ने उस दिन बच्चों को परीक्षा तक नहीं देने दी।

सूर्यवंशी 30 सितंबर को अपने दोनों बच्चों को स्कूल छोड़ने गए थे। वहां रिसेप्शन पर बैठी महिला कर्मचारियों से उन्होंने पूछा कि बच्चों को बार-बार छुट्टियां क्यों दी जाती हैं। उन्हें इसका ठीक जवाब नहीं मिला। उल्टे स्कूल के कर्मचारी मोबाइल पर उनका वीडियो बनाने लगे, जिससे सूर्यवंशी और कर्मचारियों के बीच थोड़ी कहासुनी हो गई। इसके बाद सूर्यवंशी घर लौट गए और अपने काम पर चले गए।

दोपहर में स्कूल से उनके पास फोन आया। उनसे कहा गया कि रिसेप्शन की महिला कर्मचारियों से बदतमीजी से क्यों बात की, आपका बर्ताव ठीक नहीं है, और बच्चों को स्कूल से ले जाइए।

सूर्यवंशी का आरोप है कि जब वे स्कूल पहुंचे, तो प्रबंधन ने उन्हें अंदर आने से रोक दिया। प्रबंधन ने यह भी कहा कि अगली सूचना तक बच्चे भी स्कूल नहीं आएंगे। कार्रवाई की वजह जानने के लिए उन्होंने स्कूल प्रबंधन से संपर्क किया, पर उनके मुताबिक कोई जवाब नहीं मिला। आखिर उन्होंने शिक्षाधिकारी (प्राथमिक) को लिखित शिकायत दी। महिला व बाल विकास विभाग की बाल संरक्षण हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई।

परिवार का कहना है कि अगले दिन भी स्कूल ने दोनों बच्चों को अंदर नहीं लिया। पालकों के मुताबिक स्कूल के इस रवैये से बच्चे परेशान हुए और उनकी मानसिक हालत और तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद पालकों ने स्कूल शिक्षा विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन और महिला व बाल कल्याण विभाग में विधिवत शिकायत दर्ज कराई। दोनों विभागों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद इलाके में काफी हलचल है।

सूर्यवंशी परिवार ने स्कूल से कुछ सवाल पूछे हैं। उनका कहना है कि हमारे बोलने और सवाल पूछने की सजा बच्चों को क्यों दी गई। उनके बच्चे पहली और सातवीं कक्षा में पढ़ते हैं। परिवार पूछता है कि स्कूल ने उन्हें क्लास में बैठने से रोककर रिसेप्शन के पास दो घंटे क्यों बैठाए रखा। उनका कहना है कि स्कूल के इस अकड़ भरे बर्ताव का बच्चों के मन पर बुरा असर पड़ा है। परीक्षा चल रही थी, फिर भी उन्हें स्कूल में घुसने न देकर परीक्षा से दूर क्यों रखा गया, यह भी उनका सवाल है।

स्कूल शिक्षा विभाग और महिला व बाल कल्याण विभाग की संयुक्त टीम ने स्कूल जाकर गहराई से जांच की। इस दौरान स्कूल की शैक्षणिक मंजूरियों को लेकर कई गंभीर बातें सामने आईं। जांच समिति की शुरुआती पड़ताल में पता चला कि स्कूल कई सालों से चल रहा है, लेकिन उसके पास पढ़ाई के काम के लिए जरूरी 'यू-डायस रजिस्ट्रेशन' ही नहीं है। समिति को यह भी मिला कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार और उनकी मानसिक व शारीरिक सेहत की हिफाजत के जो नियम हैं, इस घटना में उनका खुलेआम उल्लंघन हुआ।

जांच समिति में शामिल बाल संरक्षण अधिकारी और शिक्षाधिकारी ने बताया कि वे अपनी रिपोर्ट स्कूल शिक्षा विभाग और महिला व बाल कल्याण विभाग को सौंपेंगे। उनका कहना है कि वरिष्ठ अधिकारी इस पर सही फैसला लेकर कार्रवाई करें। स्कूल प्रबंधन की तरफ से इस बारे में कोई जवाब नहीं मिला है।

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