मुंबई में तंबाकूमुक्त स्कूल-कॉलेजों पर गोलमेज, छात्रों की सेहत योजना का हिस्सा बने
मुंबई शहर कलेक्टर दफ्तर में तंबाकूमुक्त शैक्षणिक संस्थाओं को मजबूत करने पर राज्यस्तरीय गोलमेज परिषद हुई।
तंबाकूमुक्त शैक्षणिक संस्थाओं को मजबूत करने के विषय पर राज्यस्तरीय बहुक्षेत्रीय गोलमेज परिषद हाल ही में मुंबई शहर के जिलाधिकारी तथा जिला दंडाधिकारी कार्यालय में हुई। परिषद का आयोजन सलाम बॉम्बे फाउंडेशन, नेशनल सर्विस फाउंडेशन और नशामुक्त मंडल ने मिलकर किया था। विशेषज्ञों ने राय रखी कि विद्यार्थियों की सेहत को नियोजन का हिस्सा बनाना जरूरी है।
परिषद में शिक्षा, स्वास्थ्य, अन्न व औषध प्रशासन, सामाजिक कल्याण व न्याय, महानगरपालिका का सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाएं, स्कूल और नागरी समाज संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा किशोरों और युवाओं में तंबाकू व निकोटीन के इस्तेमाल, टीओएफईआई को असरदार तरीके से लागू करने, अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल, संस्थाओं की जिम्मेदारी और निगरानी, और क्षमता निर्माण पर हुई।
कार्यक्रम की प्रमुख अध्यक्ष मुंबई शहर की जिलाधिकारी तथा जिला दंडाधिकारी आंचल सूद गोयल थीं। मुंबई शहर के अतिरिक्त जिलाधिकारी बाप्पासाहेब थोरात भी मौजूद थे। वक्ताओं और पैनलिस्टों में हीलिस सार्वजनिक आरोग्य संस्था के संचालक डॉ. मंगेश पेडणेकर, बृहन्मुंबई महानगरपालिका की शिक्षा अधिकारी सुजाता खरे, एनएसएफ के उपाध्यक्ष (स्वास्थ्य) डॉ. हिमांशू गुप्ते और महानगरपालिका की सहायक स्वास्थ्य अधिकारी (स्कूल) डॉ. नाझनीन शेख शामिल थे। इनके अलावा एसबीएफ के सहायक महाव्यवस्थापक दीपक पाटील और नारायण लाड, तथा नशामुक्ति महामंडल की महासचिव वर्षा विद्या विलास भी हाजिर थे। संचालन डॉ. अभिराम मेहेंदळे ने किया।
टीओएफईआई के अमल में शिक्षा विभाग की भूमिका परिषद का अहम मुद्दा रही। बृहन्मुंबई महानगरपालिका की शिक्षा अधिकारी सुजाता खरे ने बताया कि स्कूलों के रोजमर्रा के कामकाज, शैक्षणिक व्यवस्था और निगरानी से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। चर्चा में यह रेखांकित किया गया कि तंबाकूमुक्त स्कूल बनाना सिर्फ जागरूकता अभियान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह स्कूल के नियमित प्रशासन, निगरानी और विद्यार्थियों की सेहत के नियोजन का हिस्सा बनना जरूरी है।
आगे जिन बातों पर जोर दिया जाएगा, उनमें प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों को टीओएफईआई के दिशानिर्देश और अपनी भूमिका व जिम्मेदारी के बारे में साफ जानकारी देना शामिल है। तंबाकू से जुड़ी समस्याएं दर्ज करने के लिए भी यह जानकारी दी जाएगी। स्कूलों की नियमित निगरानी में टीओएफईआई के सूचक दिशानिर्देश जोड़े जाएंगे। तंबाकू रोकथाम को स्वास्थ्य शिक्षा, जीवन कौशल और किशोर स्वास्थ्य उपक्रमों में शामिल किया जाएगा।
विद्यार्थियों में तंबाकू या निकोटीन के इस्तेमाल के संभावित संकेत पहचानने के लिए शिक्षकों की क्षमता बढ़ाई जाएगी, साथ ही रिपोर्ट और संबंधित व्यवस्था तैयार की जाएगी। स्कूलों को जरूरी आईईसी सामग्री, जांच सूची और रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी। दिक्कत वाले स्कूलों को तकनीकी सहायता और मदद दी जाएगी। असरदार काम करने वाले स्कूलों की सबसे अच्छी पद्धतियां दूसरे स्कूलों तक पहुंचाई जाएंगी। स्वास्थ्य, एफडीए, महानगरपालिका और बाकी संबंधित विभागों के बीच नियमित तालमेल की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।