मुंबई में मलेरिया के मरीज 9 हजार के पार, पिछले साल से 41 फीसदी ज्यादा केस
मुंबई में बारिश का जोर कम हुआ है, लेकिन मलेरिया के मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर-बॉर्न डिसीज कंट्रोल के आंकड़ों के मुताबिक इस साल 21 सितंबर तक शहर में मलेरिया के मामलों और दो मौतों की पुष्टि हो चुकी है।
मुंबई जैसे बड़े शहर में मानसून की रफ्तार भले ही अब कम हो गई हो, लेकिन बीमारियों का ग्राफ नीचे आने का नाम नहीं ले रहा। साथ की बीमारियों का असर बढ़ने से मलेरिया के मरीजों की तादाद में भी अच्छा-खासा इजाफा दर्ज हुआ है। इस साल 21 सितंबर तक शहर में मलेरिया के 9 हजार 298 मरीज मिल चुके हैं।
पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 6 हजार 590 था। यानी इस बार मलेरिया के मरीजों की संख्या 41 फीसदी बढ़कर 17 हजार 342 तक पहुंच गई है। इनमें से कुछ मरीजों को मलेरिया का वह प्रकार हुआ है जिसे प्लाज्मोडियम फैल्सिपैरम कहा जाता है।
मुंबई में मलेरिया की वजह से 2 लोगों की मौत भी हो चुकी है। इससे एक बड़ी बात यह हुई है कि पिछले तीन साल से मलेरिया से एक भी मौत न होने का सिलसिला टूट गया है। शहर की सेहत और पब्लिक हेल्थ के लिहाज से यह चिंता की बात मानी जा रही है।
नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर-बॉर्न डिसीज कंट्रोल के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में मुंबई में मलेरिया के 3 हजार 985 मरीज दर्ज हुए थे। तब से यह संख्या लगातार बढ़ते हुए 2025 में 10 हजार 163 तक पहुंच गई, यानी करीब 155 फीसदी की बढ़ोतरी। हालांकि यह आंकड़ा अब भी 2004 के उस रिकॉर्ड से कम है, जब शहर में 14 हजार 756 मरीज और 23 मौतें दर्ज हुई थीं।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, 2026 में अभी तक मिले मरीजों की संख्या पूरे 2025 साल में दर्ज हुए 10 हजार 163 मरीजों के आंकड़े का 91.05 फीसदी तक पहुंच चुकी है।
डॉक्टर महेंद्र जगताप ने फैल्सिपैरम मलेरिया को लेकर अहम जानकारी दी है। उनके मुताबिक फैल्सिपैरम मलेरिया, मलेरिया का सबसे खतरनाक प्रकार है और यह सीधा दिमाग और शरीर के मुख्य अंगों पर असर डालता है।
डॉक्टर महेंद्र जगताप की सलाह है कि फैल्सिपैरम मलेरिया में सही इलाज लेना बहुत जरूरी है। उनके मुताबिक इस प्रकार के मलेरिया के लिए खास डोस तय होते हैं, जिनमें ACT या दूसरी एंटी-मलेरिया दवाएं शामिल हैं, और ये दवाएं समय पर और पूरा कोर्स लेना जरूरी है।
डॉक्टर महेंद्र जगताप का यह भी कहना है कि फैल्सिपैरम मलेरिया में अच्छी इम्यूनिटी होना जरूरी है, साथ ही सही और बैलेंस्ड डाइट लेना और समय पर आराम करना भी उतना ही जरूरी है। उनके मुताबिक डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की बीमारी वाले मरीजों को, साथ ही प्रेग्नेंट महिलाओं और कम इम्यूनिटी वाले छोटे बच्चों को इस बीमारी के इलाज और बचाव के तरीकों की ज्यादा जानकारी दी जानी चाहिए।
डॉक्टर महेंद्र जगताप की सलाह है कि बुखार आने पर तुरंत खून की जांच करानी चाहिए, ताकि मलेरिया का समय पर पता चल सके और इलाज जल्दी शुरू हो सके।