मुंबई में डेढ़ सौ साल पुरानी कॉलरा की महामारी पर होगा शोध, पालिका के पुराने रिकॉर्ड खुलेंगे
मुंबई पालिका 1872 से 1911 तक के स्थायी समिति के रिकॉर्ड इतिहासकार डॉ. विवेक नीलकंठन को देखने देगी।
डेढ़ सौ साल पहले कॉलरा की महामारी फैली थी तो तब की मुंबई महानगरपालिका ने आखिर क्या कदम उठाए थे, और सार्वजनिक आरोग्य व नागरी प्रशासन ने इस संकट का सामना कैसे किया था, इसकी पड़ताल अब एक खास ऐतिहासिक शोध के जरिए की जाएगी।
ऑस्ट्रेलिया की सिडनी यूनिवर्सिटी से इतिहास में पीएच.डी. करने वाले स्वतंत्र इतिहासकार डॉ. विवेक नीलकंठन मुंबई में कॉलरा के इतिहास पर एक ग्रंथ लिख रहे हैं। इसी शोध के लिए मुंबई पालिका ने सन 1872 से 1911 तक, यानी करीब चार दशकों की स्थायी समिति के ऐतिहासिक अभिलेख देखने की शर्तों के साथ मंजूरी देने का प्रस्ताव तैयार किया है।
मुंबई महानगरपालिका अधिनियम, 1888 की धारा 36 (ओ) के मुताबिक पालिका सदस्यों के अलावा किसी भी दूसरे व्यक्ति को ऐसे पुराने दस्तावेज देखने के लिए तय फीस भरनी पड़ती है। लेकिन प्रशासन ने इसे एक अहम शैक्षणिक और ऐतिहासिक प्रोजेक्ट मानते हुए यह फीस माफ करने की सिफारिश की है। इससे पहले भी शैक्षणिक कामों के लिए इस तरह फीस माफ की जा चुकी है।
डॉ. विवेक नीलकंठन ने 2004 में मुंबई यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। फिलहाल वे औपनिवेशिक दौर की मुंबई की सेहत व्यवस्था और महामारियों पर शोध कर रहे हैं। 1872 से 1911 के बीच कॉलरा की महामारी रोकने के लिए पालिका ने जो कोशिशें कीं, सफाई के जो नियम बने और बुनियादी नागरी सुविधाओं का जो विकास हुआ, उनका तब के प्रशासन से आपसी रिश्ता समझना उनका मकसद है। उनके इस अध्ययन को मुंबई यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग की प्रमुख डॉ. लक्ष्मी साळवी ने भी सिफारिश पत्र देकर समर्थन दिया है।
ये दस्तावेज बहुत पुराने और कीमती हैं, इसलिए पालिका ने शोधकर्ता पर कुछ सख्त शर्तें लगाई हैं। मूल अभिलेख पालिका कर्मचारियों की मौजूदगी में ही देखने होंगे। शोधकर्ता को यह हमीपत्र भी देना होगा कि वे इन नाजुक दस्तावेजों को सावधानी से संभालेंगे।
रिकॉर्ड की जानकारी का कोई गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा, और पालिका की पहले से इजाजत के बिना यह जानकारी किसी दूसरे को नहीं दी जा सकेगी। इसके अलावा शोध पूरा होने पर तैयार होने वाले ग्रंथ की, या पालिका से जुड़े अध्याय की, एक कॉपी पालिका सचिव के पास जमा करानी होगी। यह पूरा प्रस्ताव आखिरी मंजूरी के लिए पालिका की स्थायी समिति के सामने रखा गया है।