मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:40 IST

मुल कृषी महाविद्यालय बनेगा हाईटेक ज्ञानसंकुल, मुनगंटीवार ने रखा प्रस्ताव

मुल के कृषी महाविद्यालय में आधुनिक सुविधाएं जुटाने की योजना, 5 अक्टूबर को कृषिमंत्री के साथ बैठक तय

मुल कृषी महाविद्यालय बनेगा हाईटेक ज्ञानसंकुल, मुनगंटीवार ने रखा प्रस्ताव
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मुल के कृषी महाविद्यालय को अत्याधुनिक 'कृषी ज्ञानसंकुल' का रूप देने का संकल्प राज्य के पूर्व मंत्री और विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने लिया है। महाविद्यालय का दौरा करते हुए उन्होंने प्रयोगशाला, लाइब्रेरी, पॉलीहाऊस और पूरे कैंपस का बारीकी से मुआयना किया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई, रिसर्च और नई टेक्नोलॉजी को साथ लेकर चलना होगा, ताकि स्टूडेंट्स दुनिया भर की कृषी यूनिवर्सिटीज से सीधे जुड़ सकें, इसके लिए टू-वे कम्युनिकेशन सिस्टम खड़ा करने का सुझाव उन्होंने दिया। इस पूरे डेवलपमेंट को लेकर 5 अक्टूबर को कृषिमंत्री के साथ बैठक होने वाली है।

मुल स्थित कृषी महाविद्यालय के दौरे के वक्त विधायक मुनगंटीवार के साथ पीडीकेव्ही अकोला के उपकुलसचिव डॉ. एस. एस. चव्हाण, कृषी महाविद्यालय के सहयोगी प्रोफेसर व प्राचार्य डॉ. विलास अतकारे, भाजपा मुल शहर अध्यक्ष प्रवीण मोहुर्ले, किसान आघाडी के जिला अध्यक्ष बंडू गौरकार, सहयोगी संशोधन संचालक डॉ. श्रीकांत अमरशेट्टीवार, संतोष भावदे, सहायक प्रोफेसर डॉ. विशाखा डोंगरे, सहायक प्रोफेसर शाम पतींगे और आर्किटेक्ट चिन्मय पाटील मौजूद थे।

विधायक मुनगंटीवार ने कहा कि नई डिजाइन तैयार करते वक्त मौजूदा नक्शे में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं या नहीं, इसकी समीक्षा करने के निर्देश दिए। कॉलेज की आगे की जरूरतों को देखते हुए उन्होंने प्रेजेंटेशन हॉल, कृषी विषय की ई-लाइब्रेरी और दुनिया की कृषी यूनिवर्सिटीज से सीधे संवाद के लिए टू-वे कम्युनिकेशन सिस्टम की जरूरत पर जोर दिया।

उनका कहना था कि कैंपस का हर हिस्सा स्टूडेंट्स के लिए ज्ञान का जरिया बनना चाहिए। इसके लिए कृषी संबंधी जानकारी देने वाले साइन बोर्ड लगाने, अलग-अलग पेड़ों के पास क्यूआर कोड के जरिए उस पेड़ की पूरी जानकारी देने और खेती से जुड़ी बाकी बातें एक ही जगह स्टूडेंट्स को मिलें, इसकी प्लानिंग करने के निर्देश उन्होंने दिए।

लड़कों और लड़कियों के हॉस्टल के लिए उपलब्ध जगह देखकर उसकी सही प्लानिंग करने को कहते हुए उन्होंने हॉस्टल में रहने वाले अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के स्टूडेंट्स की गिनती चेक करने के निर्देश दिए। कॉलेज में खाली पड़े पदों की जानकारी भी उन्होंने ली। बिल्डिंग की जरूरी रंगाई-पुताई के साथ पूरे कैंपस को साफ-सुथरा, खूबसूरत और स्टूडेंट्स के लिए प्रेरणादायी बनाए रखने के निर्देश उन्होंने दिए। इस दौरान उन्होंने स्टूडेंट्स से बातचीत कर उनकी दिक्कतें और उम्मीदें भी जानीं।

कृषी महाविद्यालय के आगे के डेवलपमेंट को लेकर 5 अक्टूबर को कृषिमंत्री दत्तात्रय भरणे की मौजूदगी में बैठक होने वाली है। इसके अलावा कृषिमंत्री को चंद्रपुर जिले के दौरे पर बुलाकर अजयपुर के किसान ट्रेनिंग सेंटर का मुआयना कराया जाएगा। इस दौरे के लिए पीडीकेव्ही और कृषी महाविद्यालय को मिलकर विस्तृत प्रेजेंटेशन तैयार करने के निर्देश भी मुनगंटीवार ने दिए।

चंद्रपुर जिले की कृषी ताकत को बड़ा मंच मिले, इसके लिए 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रॉडक्ट' में धान की फसल शामिल करने की कोशिश करने की बात भी उन्होंने कही। साथ ही कॉलेज के जरिए सीड स्टोरेज यानी पारंपरिक और अहम बीजों को सहेजने, जीन कलेक्शन व रिसर्च, टिश्यू कल्चर और नर्सरी डेवलपमेंट जैसी चीजों पर खास ध्यान देने की जरूरत उन्होंने बताई। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, गायों की अलग-अलग नस्लें, आधुनिक खेती की तकनीक, फसलों की विविधता, रिसर्च और लोकल कृषी परंपरा से जुड़ी हर अहम जानकारी स्टूडेंट्स को एक ही जगह मिले, यह बड़ी सोच मुनगंटीवार ने रखी।

इस दौरे से खेती की मिट्टी और किसानों की मेहनत से उनका जुड़ाव एक बार फिर सामने आया। कृषी शिक्षा सिर्फ डिग्री लेने का जरिया न रहे, बल्कि किसानों के सवालों का जवाब देने वाला, नई तकनीक को दिशा देने वाला और रिसर्च के जरिए गांव के विकास को ताकत देने वाला केंद्र बने, इसी मकसद से मुनगंटीवार की यह पहल मुल के कृषी महाविद्यालय के भविष्य के लिए अहम मानी जा रही है।

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