मीरा-भायंदर में बाजार फी ठेकेदार ने बांटे फेरीवालों के पहचान पत्र, समिति को खबर नहीं
मीरा-भायंदर महापालिका की फेरीवाला समिति को बताए बिना बाजार फी वसूलने वाले ठेकेदार ने फेरीवालों को पहचान पत्र बांटना शुरू कर दिया। समिति के सदस्यों ने जांच की मांग की है।
मीरा-भायंदर महापालिका के फेरीवाला प्रबंधन पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। महापालिका ने शहर फेरीवाला समिति बाकायदा बनाई हुई है। इसके बावजूद समिति को कोई जानकारी दिए बिना बाजार फी वसूलने का काम करने वाले ठेकेदार ने फेरीवालों को पहचान पत्र बांटना शुरू कर दिया। अब सवाल उठ रहा है कि क्या फेरीवाला पहचान पत्र बनाना या बांटना बाजार फी वसूलने वाले ठेकेदार की जिम्मेदारी है, और उसे यह अधिकार आखिर किसने दिया।
इस बात की जानकारी फेरीवाला समिति के सदस्य ओमप्रकाश गाडोदिया को हुई तो उन्होंने फौरन फेरीवाला विभाग के पास अपनी आपत्ति दर्ज कराई। फिर सोमवार को समिति के सदस्य महापालिका के फेरीवाला विभाग पहुंचे और पहचान पत्रों के बांटे जाने पर कड़ा एतराज जताया। समिति की आपत्ति के बाद फेरीवाला विभाग ने बाजार विभाग से कहा कि वह संबंधित ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी करे। बाजार विभाग ने नोटिस जारी करने की जानकारी सामने आई है।
फेरीवाला समिति के अध्यक्ष खुद आयुक्त राधाबिनोद शर्मा हैं। समिति सदस्यों का आरोप है कि फेरीवालों से जुड़ी इतनी अहम प्रक्रिया समिति को भरोसे में लिए बिना अपने स्तर पर चला दी गई। बताया जा रहा है कि बाजार विभाग के पास फेरीवालों से बाजार फी वसूलने का जिम्मा है और उसी विभाग के जरिए यह फी वसूलने वाले ठेकेदार को पहचान पत्र बांटने का काम भी सौंपा गया। लेकिन इस बारे में कोई लिखित आदेश है या नहीं, अगर है तो किसने दिया, पहचान पत्र किसकी इजाजत से छपे, इनका खर्च किसने उठाया और बांटने का अधिकार ठेकेदार को किसने दिया, इन सवालों के जवाब अब तक साफ नहीं हैं। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा हो गया है।
महापालिका के सर्वे के मुताबिक शहर में 8 हजार 528 फेरीवाले पात्र पाए गए हैं। समिति सदस्यों ने मांग की है कि जांच हो कि ठेकेदार ने अब तक कितने फेरीवालों को पहचान पत्र बांटे, कितने पहचान पत्र छपवाए और क्या इस काम में फेरीवालों से कोई रकम ली गई। उनका कहना है कि पहचान पत्र बांटने के नाम पर फेरीवालों से पैसे लिए जाने की कोई शिकायत या चर्चा हो तो उसकी अलग से जांच होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जाता है कि बाजार फी वसूली का ठेका अंधेरी की मेसर्स ओडीएस प्रोटेक्टिव सर्विसेस प्रा. लि. कंपनी को दिया गया है। समिति सदस्यों का दावा है कि इस ठेकेदार के कामकाज पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। ठेके, वसूली के तरीके और मुद्दत को लेकर भी कुछ आपत्तियां बताई जा रही हैं। इसी वजह से इस बात की जांच की मांग जोर पकड़ रही है कि पहचान पत्र बांटने की अतिरिक्त जिम्मेदारी इस ठेकेदार के पास कैसे आई। समिति सदस्यों का यह भी दावा है कि पहचान पत्र छपने से पहले समिति को नहीं बताया गया और फेरीवाला विभाग को भी इसकी पहले से खबर नहीं थी।
ओमप्रकाश गाडोदिया ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए महापालिका आयुक्त से शिकायत की है। उन्होंने मांग की है कि पहचान पत्रों की छपाई, बंटवारे, संबंधित आदेश, ठेकेदार को दिए गए अधिकार और फेरीवालों से संभावित पैसे की वसूली, इन सब की गहराई से जांच हो। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर सस्पेंशन समेत सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई है।
अब फेरीवाला समिति और शहर के हजारों फेरीवालों की नजर इस पर है कि आयुक्त राधाबिनोद शर्मा इस मामले की अलग से जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे या नहीं, या सिर्फ नोटिस देकर मामला ठंडा कर दिया जाएगा।