मीरा-भाईंदर के मनपा स्कूलों में जूते, बोतल और यूनिफॉर्म पर सवाल, ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग
मनपा स्कूलों में जूते, बोतल और यूनिफॉर्म की बंटवाई पर टेंडर की शर्तें तोड़ने का आरोप।
मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के शिक्षण विभाग की तरफ से मनपा स्कूलों के बच्चों को जो पढ़ाई का सामान दिया जाता है, उसकी खरीद और बंटवाई पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि बच्चों की यूनिफॉर्म, जूते, पानी की बोतलें और दूसरे सामान के बंटवाई में टेंडर की शर्तों का पालन नहीं हुआ। इस बारे में मनपा प्रशासन के पास शिकायत की गई है और संबंधित ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की गई है।
जानकारी के मुताबिक मनपा स्कूलों के बच्चों के लिए हर साल करीब 8 करोड़ रुपये का टेंडर निकाला जाता है। इसी के जरिए बच्चों को यूनिफॉर्म, जूते, पानी की बोतलें, किताबें और दूसरा शैक्षणिक सामान दिया जाता है। इस साल सामान सप्लाई करने का ठेका नवकार कंपनी को दिया गया है।
आरोप है कि टेंडर पर अमल के दौरान कई गड़बड़ियां हुईं। बताया जाता है कि टेंडर में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग तरह के जूतों का प्रावधान है। दावा किया गया है कि लड़कों के जूतों में लेस और लड़कियों के जूतों में बकल होना चाहिए। लेकिन असल में करीब 10 हजार बच्चों को एक ही तरह के जूते दे दिए गए, ऐसा आरोप है।
इसी वजह से सवाल उठा है कि क्या टेंडर की शर्तें बदलकर ठेकेदार को फायदा पहुंचाया गया। जूते बंट चुके हैं, फिर भी आरोप है कि बच्चों को अब तक सॉक्स यानी पायमोजे नहीं मिले। शिकायत में यह भी लिखा गया है कि सॉक्स का प्रकार, क्वालिटी और उससे जुड़ी शर्तें टेंडर में साफ नहीं हैं।
आरोप यह भी है कि बच्चों को दी जाने वाली स्टेनलेस स्टील की पानी की बोतलें पिछले चार महीने से नहीं मिलीं। यूनिफॉर्म की बंटवाई में भी देरी हुई थी। अब जूतों और बोतलों को लेकर भी सवाल खड़े होने से शिक्षण विभाग के कामकाज पर नाराजगी जताई जा रही है।
शिकायत करने वालों की मांग है कि टेंडर में साफ लिखा सामान न देने या शर्तों से मेल न खाने वाला सामान देने की बात सही निकले, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाए। उनका कहना है कि अगर ठेकेदार ने शर्तें तोड़ी हैं, तो प्रशासन को करार के प्रावधानों के मुताबिक जुर्माने की कार्रवाई करनी चाहिए। अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, इसलिए मनपा अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। यह जांच करने की मांग भी की गई है कि कहीं ठेकेदार को नियमों के खिलाफ जाकर बचाया तो नहीं जा रहा।
प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि ठेकेदार की अनामत रकम जब्त की जाए, जुर्माना लगाया जाए और कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए। मनपा स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों को उनका हक का सामान समय पर और टेंडर में तय क्वालिटी के हिसाब से मिले, यह प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसलिए पूरे मामले की गहरी जांच हो, यह देखा जाए कि टेंडर की शर्तें टूटीं या नहीं और सामान की खरीद व बंटवाई में पैसों की गड़बड़ी हुई या नहीं। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और ठेकेदार पर क्या कार्रवाई होगी, इस पर पैरेंट्स और शहर के लोगों की नजर है।