माथेरान की शार्लोट झील का गाद हटाने का काम फिर सवालों में, 1000 ट्रक की एंट्री पर शक
माथेरान नगरपरिषद के रिकॉर्ड में झील से 1000 ट्रक गाद निकालने की एंट्री है, लेकिन वह गाद कहां गई और झील सच में साफ हुई या नहीं, इस पर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं।
माथेरान शहर को पानी देने के लिए बनाई गई शार्लोट झील में गाद निकालने का मसला अभी भी सुलझा नहीं है। नगरपरिषद के बांधकाम विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक इस गर्मी में झील से करीब 1000 ट्रक गाद निकाली गई। लेकिन वह गाद आखिर रखी कहां गई, इसका कोई जवाब नहीं मिल रहा।
अंग्रेजों के जमाने में बनी शार्लोट झील से पहले हर साल मजदूर लगाकर नगरपरिषद खुद गाद निकलवाती थी। 2013 में डॉ. नानासाहेब धर्माधिकारी प्रतिष्ठान ने गाद निकाली थी, लेकिन उसके बाद 2026 अगस्त तक झील में गाद जमी रही। गाद जमने से झील की पानी रोकने की क्षमता कम हो गई थी। इसी वजह से केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना से 5 करोड़ रुपये का फंड मंजूर हुआ था।
यह काम 2023 से लटका पड़ा है और शार्लोट झील अभी तक पूरी तरह गादमुक्त नहीं हुई है, न ही झील के संवर्धन का काम शुरू हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि झील के संवर्धन के लिए आया फंड हड़पने के लिए तरह-तरह के खेल चल रहे हैं। प्लान यह था कि मजदूरों से झील की गाद निकलवाकर उसे शहर की सड़कों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। तत्कालीन नगर अभियंता ने करीब 1000 ट्रक गाद निकालने की रिपोर्ट दर्ज कर पालिका को बिल भेजा था। लेकिन जब यह बिल पालिका की सर्वसाधारण सभा में चर्चा के लिए आया, तो गाद निकालने के काम पर ही आपत्ति उठ गई। इसी वजह से वह बिल अभी तक अदा नहीं हुआ है।
सभा में सवाल उठने पर तत्कालीन नगर अभियंता ने टालमटोल वाले जवाब दिए थे। कुछ दिनों बाद वही नगर अभियंता माथेरान से तबादला लेकर बाहर की नगरपरिषद में चले गए, जिसके बाद उनके रिकॉर्ड की जांच की मांग उठी।
स्थानीय कार्यकर्ता राकेश कोकळे कहते हैं कि कार्रवाई के डर से अगर इंजीनियर नगरपरिषद से तबादला लेकर जा रहा है, तो यह मामला जरूर संदिग्ध है और नगरविकास विभाग को इसकी जांच करनी चाहिए।
फिलहाल शार्लोट झील पानी से 66 फीसदी भर चुकी है। इसी वजह से मांग है कि माथेरान पालिका साफ-साफ बताए कि झील में गाद है भी या नहीं। गाद बहाकर निकालने के लिए 10 अगस्त को झील का पानी छोड़ा गया था, लेकिन पानी के साथ गाद नहीं बही। यह सिलसिला दस दिन चलता रहा, इस बीच पानी की किल्लत हो गई, जिसके बाद झील का पानी फिर से रोक दिया गया।
माथेरान के पूर्व नगराध्यक्ष मनोज खेडकर सवाल उठाते हैं कि आज शार्लोट झील गादमुक्त हुई या नहीं, झील का संवर्धन हुआ या नहीं, और गाद निकालने का काम पूरा हुआ या नहीं, इसका जवाब मिलना चाहिए।