सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

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20:58 IST

मारुति सुजुकी नहीं बढ़ाएगी ऑल्टो और एस-प्रेसो के दाम, बजट खरीदारों को राहत

बढ़ती लागत के बावजूद कंपनी ने दोनों एंट्री-लेवल कारों की कीमतें जस की तस रखी हैं।

मारुति सुजुकी नहीं बढ़ाएगी ऑल्टो और एस-प्रेसो के दाम, बजट खरीदारों को राहत तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

देश की सबसे लोकप्रिय कार बनाने वाली कंपनियों में से एक मारुति सुजुकी ने अपने एंट्री-लेवल कार खरीदारों के लिए राहत भरा फैसला लिया है। कच्चे माल का खर्च बढ़ रहा है और दूसरी इनपुट कॉस्ट का दबाव भी है, फिर भी कंपनी ने ऑल्टो और एस-प्रेसो के दाम वही रखने का फैसला किया है।

सस्ती कारों के बाजार में मांग फिर से बढ़ रही है। ऐसे में यह फैसला उन कस्टमर्स के लिए राहत हो सकता है जो बजट में कार लेना चाहते हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक जीएसटी 2.0 के तहत टैक्स में कटौती के बाद ऑल्टो की कीमत Rs 3.70 लाख पर बनी हुई है। कंपनी ने इस मॉडल के दाम में और बढ़ोतरी नहीं की है। एस-प्रेसो की कीमतें भी फिलहाल नहीं बदली हैं। इसलिए कम बजट में पहली कार लेने वाले परिवारों के लिए ये दोनों गाड़ियां अच्छा विकल्प बन सकती हैं। हां, ऑन-रोड कीमत शहर, वेरिएंट और बीमा या रजिस्ट्रेशन चार्ज के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।

यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब एंट्री-लेवल कारों की मांग में सुधार दिख रहा है। उपलब्ध खबर के मुताबिक इस सेगमेंट की बिक्री में 47% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। माना जा रहा है कि जीएसटी में बदलाव से कारें तुलनात्मक रूप से सस्ती हुईं और इसी वजह से ग्राहकों का रुझान खरीदारी की तरफ फिर से बढ़ा। कम कीमत, रोज के सफर में काम आना और देखभाल का खर्च, ये इस सेगमेंट में खरीदारी के अहम पहलू हैं।

दूसरी तरफ कंपनी अपनी बाकी कारों की रेंज में दाम बढ़ा रही है। ऐसे में ऑल्टो और एस-प्रेसो की कीमतें स्थिर रखना खास मायने रखता है। इस फैसले से लगता है कि बढ़े हुए खर्च का पूरा बोझ कस्टमर्स पर डालने के बजाय कंपनी उसका कुछ हिस्सा खुद उठा रही है। एंट्री-लेवल सेगमेंट में कीमत ही खरीदारी का सबसे बड़ा मुद्दा होती है, इसलिए थोड़ी सी बढ़ोतरी भी कस्टमर्स के फैसले पर असर डाल सकती है।

कुल मिलाकर, दाम स्थिर रखकर मारुति सुजुकी ने बजट कार बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। अगर मांग यूं ही बनी रही तो इस फैसले से कंपनी की बिक्री को फायदा हो सकता है। लेकिन आगे कच्चे माल का खर्च और बाजार के हालात कैसे बदलते हैं, इसी पर कंपनी की अगली प्राइसिंग पॉलिसी टिकी रहेगी।

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