मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:59 IST

मराठी फिल्म 'चिकिझिंग' का पहला पोस्टर रिलीज, 12 नवंबर को होगी सिनेमाघरों में एंट्री

दिवाली में रिलीज होने वाली मराठी फिल्म 'चिकिझिंग' का पहला पोस्टर सामने आया, एक गरीब घर के बच्चे के बड़े सपने की कहानी बताएगी यह फिल्म।

मराठी फिल्म 'चिकिझिंग' का पहला पोस्टर रिलीज, 12 नवंबर को होगी सिनेमाघरों में एंट्री
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बचपन में इंसान छोटी-छोटी चीजों में खुशी ढूंढता है, कोई रंगीन पत्थर खजाना लगता है, कोई लकड़ी की छड़ी जादू की छड़ी बन जाती है, और बंद दरवाजे के पीछे की दुनिया एक बड़ा सपना लगती है। आने वाली मराठी फिल्म 'चिकिझिंग' इसी मासूम बचपन, सपनों और जिद की कहानी धीरे-धीरे बयां करती है। इस फिल्म का पहला पोस्टर रिलीज कर दिया गया है और साथ ही यह भी बता दिया गया है कि फिल्म इस दिवाली, 12 नवंबर को दर्शकों के सामने आएगी।

फिल्म को दीपक वाणी और जयप्रकाश भांडे प्रस्तुत कर रहे हैं। इसे ए थीमटीम स्टुडिओ प्रॉडक्शन ने कीफ्रेम प्रॉडक्शन के साथ मिलकर बनाया है। सुप्रिया बागते फिल्म की निर्माता हैं, जबकि शब्बीर साबुवाला, रचना वोरा, ऋषिकेश देशमुख, सिड विंचुरकर, करण चव्हाण और उन्मेश कुलकर्णी सह-निर्माता के तौर पर जुड़े हैं। फिल्म का डायरेक्शन राजेंद्र बागते और वैभव कुलकर्णी ने किया है। कहानी एक हिलस्टेशन की पृष्ठभूमि में सेट है, जिसमें गरीबी में पल रहा एक तेज-तर्रार, सपने देखने वाला और शरारती बच्चा मुख्य किरदार है।

कहानी में चिक्या नाम का यह बच्चा हर शनिवार अपनी मां के साथ एक अमीर रेजिडेंशियल स्कूल जाता है और वहां की भव्य दुनिया देखकर हैरान रह जाता है। स्कूल का बड़ा सा लोहे का गेट हमेशा बंद रहता है, पर उसके अंदर की अनोखी दुनिया उसे किसी सपने जैसी लगती है। इसी सपने का गुपचुप पीछा करने की उसकी यात्रा कहानी का मूल है। उसका इकलौता दोस्त स्ट्रॉबेरी के खेत में खड़ा एक बिजूका है, जो उसकी सारी बातें राज रखता है। बिजूके से बातें करना, तायडी के साथ लकड़ी बीनना, दिवाली में दूसरे बच्चों को पटाखे फोड़ते दूर से देखना, और तरह-तरह की चीजें अपने स्कूल बैग में संभालकर रखना, इन्हीं छोटी-छोटी बातों से चिक्या की दुनिया खुलती जाती है।

पर सवाल यह है कि वह ये सारी अजीब लगने वाली बातें आखिर क्यों करता है। क्या यह सिर्फ मासूमियत है, या उसके मन में कुछ और चल रहा है, उसके दिमाग में क्या है। इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढते हुए फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ दर्शकों को सोचने पर मजबूर करने की कोशिश करती है।

'चिकिझिंग' सिर्फ बच्चों की फिल्म नहीं है, बल्कि पैरेंट्स को भी बच्चों के साथ बैठकर देखने लायक है। यह बचपन, सपनों, परिवार और उम्मीद का एक हल्का-फुल्का जश्न है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह फिल्म बच्चों की कल्पनाशक्ति और उनके छोटे-छोटे सपनों को फिर से करीब से देखने का मौका देती है, क्योंकि हर बच्चे के मन में एक सपना होता है।

फिल्म में प्रभाकर मोरे, कृष्णराज वाईंगडे, सेजल कोरे, अमृता सुरेश और डॉ. सोनाली घाटणेकर जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। 'चिकिझिंग' इस दिवाली, 12 नवंबर से सिनेमाघरों में रिलीज होगी, एक बच्चे के सपने की कहानी जो बड़ों को भी उनका बचपन याद दिला देगी।

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