मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:48 IST

मलेशिया ने शुरू की करीब 1,500 म्यानमार नागरिकों की वापसी, UN ने जताई चिंता

मलेशिया ने 29 सितंबर से म्यानमार नागरिकों को वापस भेजना शुरू किया, पहले चरण में 1,476 लोग शामिल हैं।

मलेशिया ने शुरू की करीब 1,500 म्यानमार नागरिकों की वापसी, UN ने जताई चिंता
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

म्यानमार में चल रहे संघर्ष की वजह से हालात अब भी अस्थिर हैं। इसी बीच मलेशिया ने करीब 1,500 म्यानमार नागरिकों को उनके देश वापस भेजना शुरू कर दिया है। यह प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू हुई है और इसके पहले चरण में 1,476 लोग शामिल हैं।

मलेशिया का कहना है कि यह वापसी स्वेच्छा से हो रही है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी समेत मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि म्यानमार में सुरक्षित और टिकाऊ पुनर्वास के लिए जरूरी हालात नहीं हैं। इस समूह में ठीक कितने रोहिंग्या हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी न मलेशिया ने दी है और न म्यानमार ने। इस फैसले से रोहिंग्या समुदाय की सुरक्षा का सवाल फिर चर्चा में आ गया है।

मलेशिया ने म्यानमार नागरिकों के स्वैच्छिक पुनर्वास कार्यक्रम का पहला चरण शुरू किया है। इस चरण में 1,370 पुरुष, 79 महिलाएं, 20 लड़के और 7 लड़कियां, यानी कुल 1,476 लोग हैं। इन्हें सुरक्षा इंतजामों के बीच लुमुट नौसैनिक अड्डे तक ले जाया गया। इसके बाद म्यानमार की नौसेना के जहाजों से उन्हें उनके देश भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई। पूरी योजना में चरण-दर-चरण करीब 5,000 म्यानमार नागरिकों को वापस भेजने का प्लान है।

म्यानमार में 2021 से चल रही राजनीतिक अस्थिरता के बाद कई इलाकों में संघर्ष जारी है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र ने सवाल उठाया है कि शरणार्थियों को वापस भेजना सुरक्षित है या नहीं। UNHCR के मुताबिक मौजूदा हालात म्यानमार से आए शरणार्थियों के सुरक्षित और टिकाऊ पुनर्वास के अनुकूल नहीं हैं। मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है कि लौटने वालों को हिंसा, उत्पीड़न या दूसरे गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है।

मलेशिया में म्यानमार से आए शरणार्थियों के बीच रोहिंग्या समुदाय की तादाद बड़ी है। फिर भी 29 सितंबर को वापस भेजे गए 1,476 लोगों में ठीक कितने रोहिंग्या हैं, यह अब तक साफ नहीं किया गया है। मलेशिया सरकार इस वापसी को स्वैच्छिक प्रक्रिया कह रही है, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। म्यानमार में रोहिंग्या लंबे समय से नागरिकता और बुनियादी अधिकारों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं, इसलिए इस वापसी पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर टिकी है।

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