महाराष्ट्र में शिक्षकों की सैलरी और छुट्टियों के नियमों में सरकार का बड़ा बदलाव
उच्च शिक्षा विभाग ने वेतन, अर्जित छुट्टी और मेडिकल रीइंबर्समेंट के नए नियम जारी किए, जबकि नाशिक में 426 टीचरों की सैलरी अटकी हुई है।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के गैर-सरकारी अनुदानित कॉलेजों और गैर-कृषि यूनिवर्सिटीज में काम करने वाले करीब 65 हजार प्रोफेसरों और स्टाफ के लिए एक राहत भरा फैसला लिया है। उच्च शिक्षण संचालक डॉ. शैलेंद्र देवळाणकर ने डिविजनल सह-संचालकों को साफ निर्देश दिए हैं कि सभी टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की रेगुलर सैलरी हर महीने की 1 तारीख को ही सीधे बैंक खाते में जमा की जाएगी। इसके अलावा छुट्टियों के रोकेशन (रोखीकरण) और मेडिकल खर्च की रीइंबर्समेंट को लेकर भी नई नियमावली सामने आई है।
प्रशासनिक देरी न हो और वेतन टाइम पर मिले, इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने एक शेड्यूल तय किया है। इसके तहत सभी अनुदानित कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज को रेगुलर सैलरी, तासिका (CHB) बेसिस पर पढ़ाने वाले टीचरों का मानधन, अर्जित छुट्टी के रोकेशन और मेडिकल रीइंबर्समेंट के लिए जरूरी अनुदान की मांग हर महीने की 20 तारीख तक संचालनालय को भेजनी होगी। यह सारी जानकारी ऑफिस हेड के सिग्नेचर के साथ ही सबमिट करनी होगी, ताकि सरकार के 'बीडीएस' (BDS) सिस्टम के जरिए अनुदान टाइम पर मंजूर हो सके।
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अर्जित छुट्टी के रोकेशन और मेडिकल खर्च से जुड़े मंजूरी ऑर्डर भी साथ अटैच करना जरूरी होगा। तासिका बेसिस पर पढ़ाने वाले प्रोफेसरों को मानधन देने के बाद उसका कॉलेजवार पूरा डिटेल भी हर महीने भेजना होगा।
छत्रपती संभाजीनगर डिवीजन में इस फैसले पर अमल शुरू हो चुका है और अगस्त महीने की सैलरी सितंबर की 1 तारीख को ही जमा कर दी गई है। यह जानकारी डिविजनल सह-संचालक डॉ. पंकजा वाघमारे ने दी।
वहीं दूसरी ओर, नाशिक जिले में प्रशासनिक लापरवाही की वजह से 426 टीचरों के सामने भूखे रहने जैसी नौबत आ गई है। जब उच्च शिक्षा विभाग टाइम पर सैलरी का नियम लागू कर रहा है, ठीक उसी समय नाशिक की 52 अनुदानित और आंशिक अनुदानित प्राइमरी स्कूलों के टीचरों को सितंबर महीने की सैलरी अब तक नहीं मिली है। सरकार ने तीन महीने का टाइम दिया था, फिर भी शिक्षण विभाग 'पोस्ट शिफ्टिंग' का काम टाइम पर पूरा नहीं कर पाया। इसके अलावा शिक्षणाधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर में आई टेक्निकल दिक्कतों की वजह से भी यह मसला खड़ा हुआ है। त्योहारों के सीजन में सैलरी अटकने से खासगी प्राथमिक शिक्षक महासंघ ने आक्रामक रुख अपनाते हुए शिक्षण विभाग के कामकाज पर तीखा गुस्सा जताया है।