महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों की बंपर भरती की तैयारी, पदोन्नति परीक्षा में भी बदलाव होंगे
राज्य सरकार खाली पदों का हिसाब लगाकर बड़े पैमाने पर भर्ती करने जा रही है, वहीं विभागीय पदोन्नति परीक्षाओं को पारदर्शक बनाने के लिए अलग पोर्टल बनाने का विचार चल रहा है।
सरकारी नौकरी की राह देख रहे उम्मीदवारों के लिए महाराष्ट्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के अलग-अलग विभागों में खाली पड़े पदों का जायजा लेकर बड़े स्तर पर भर्ती करने की कवायद शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इशारा दिया है कि इस बार पहले से कहीं ज्यादा संख्या में पद भरे जाएंगे।
इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए होने वाली सीमित विभागीय स्पर्धा परीक्षाओं की प्रक्रिया में भी बदलाव की तैयारी है। इन परीक्षाओं को सुसंगत और पारदर्शक बनाने के लिए एक अलग पोर्टल तैयार करने पर विचार चल रहा है।
साथ ही महानगरपालिका, नगरपालिका, जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्रामपंचायतों में होने वाली भर्ती के लिए भी अलग तंत्र खड़ा करने की योजना है। यानी जो कर्मचारी सरकारी नौकरी या विभागीय पदोन्नति की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए यह घटनाक्रम काफी अहम साबित होने वाला है।
राज्य के विभिन्न विभागों में पदोन्नति के लिए सीमित विभागीय स्पर्धा परीक्षा ली जाती है, जिसे पास कर कर्मचारी वरिष्ठ पद पर पहुंचने का मौका पाते हैं। इसी वजह से हजारों कर्मचारी इस परीक्षा की तैयारी में जुटे रहते हैं। लेकिन देखा गया है कि यह परीक्षा हर विभाग में तय समय के बाद नियमित रूप से नहीं होती, और इसके जरिए ठीक कितने पद भरे जाएंगे, इसकी भी अक्सर साफ जानकारी नहीं होती। इस वजह से योग्य होने के बावजूद कई कर्मचारियों को मौका मिलने में दिक्कत आती है। सूत्रों के मुताबिक इसी वजह से इस पूरी प्रक्रिया को साफ करने के लिए नई पद्धति लाई जाएगी और इसके लिए एक अलग पोर्टल बनाया जाएगा, जिस पर हर विभाग में पदोन्नति से कितने पद और किस समय-सीमा में भरे जाएंगे, यह जानकारी उपलब्ध होगी।
राज्य के विभागों और महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग के बीच बेहतर तालमेल के लिए गुजरात में जो अलग यंत्रणा काम कर रही है, उसका अध्ययन करने सामान्य प्रशासन विभाग की अपर मुख्य सचिव वी. राधा बुधवार को गांधीनगर जाएंगी। गुजरात के इस पैटर्न को समझकर महाराष्ट्र में भी ऐसी ही सुसंगत और पारदर्शक व्यवस्था बनाई जा सकती है या नहीं, इसका जायजा लिया जाएगा। इसी बीच सरकारी भर्ती परीक्षाओं को और पारदर्शक बनाने के लिए वी. राधा की अध्यक्षता में बना उच्चस्तरीय टास्क फोर्स भी अध्ययन कर रहा है और यह समिति परीक्षा प्रक्रिया में सुधार को लेकर सरकार को सिफारिशें देगी।
राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं, जिनकी जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों से मांगी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि राज्य में रिकॉर्ड संख्या में भर्ती की जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी विभागों से मिलने वाली खाली पदों की जानकारी इकट्ठा कर बड़े स्तर पर भर्ती की जाएगी। हर कैबिनेट बैठक में 5 विभाग खाली पदों को लेकर प्रेजेंटेशन दे रहे हैं, और सारी जानकारी जुटाने के बाद एक साथ बड़े पैमाने पर पद भरने की प्रक्रिया चलाने का सरकार का इरादा है। भर्ती के लिए जरूरी जानकारी पोर्टल पर डालना अनिवार्य किए जाने से प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की कोशिश हो रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया था कि MPSC के जरिए पहले से कहीं ज्यादा संख्या में पद उपलब्ध कराए जाएंगे।
महानगरपालिका, नगरपालिका, जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्रामपंचायतों में भर्ती के लिए भी अलग यंत्रणा बनाने पर सरकार विचार कर रही है। महानगरपालिका और नगरपालिका का कामकाज नगरविकास विभाग के अंडर आता है, जबकि जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्रामपंचायत ग्रामविकास विभाग के अंडर आते हैं। देखा गया है कि इन संस्थाओं में फिलहाल इस्तेमाल हो रही भर्ती पद्धति में संस्था के हिसाब से फर्क है, और भर्ती के नियम व प्रक्रिया में भी एकरूपता नहीं है। गुजरात समेत कुछ राज्यों में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की भर्ती के लिए अलग यंत्रणा काम कर रही है, इसलिए इस व्यवस्था का भी सामान्य प्रशासन विभाग अध्ययन करेगा। राज्य के विभागों से खाली पदों की मांग आने के बाद MPSC के जरिए साझा तौर पर भर्ती प्रक्रिया चलाई जाती है, उसी तर्ज पर स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की भर्ती के लिए भी साझा पद्धति लागू की जा सकती है या नहीं, इस पर गंभीरता से विचार चल रहा है।
राज्य के अलग-अलग विभागों में कितने पद खाली हैं और उनमें से कितने पद तुरंत भरना जरूरी है, इसकी जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग ने करीब 7 महीने पहले ही मांगी थी, लेकिन कई विभागों से उम्मीद के मुताबिक जवाब नहीं मिल रहा। इस वजह से खाली पदों की संख्या, उनकी जरूरत और भर्ती की प्रक्रिया में रुकावट आ रही है। कुछ अधिकारी और मंत्री नियमित भर्ती की जगह बाहरी एजेंसियों के जरिए कॉन्ट्रैक्ट पर मैनपावर लेने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं, ऐसा भी बताया जा रहा है। नियमित भर्ती में कितने पद भरने हैं और पदोन्नति के जरिए कितने पद भरने हैं, इसका अनुपात तय होता है, लेकिन अक्सर इस अनुपात का पालन नहीं होने की बात भी सामने आई है।
सरकारी भर्ती की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और समय पर पूरा करने के लिए परीक्षा पद्धति से लेकर खाली पदों की रजिस्ट्री तक, कई स्तरों पर सुधार की कोशिश जारी है। भर्ती परीक्षा को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए उच्चस्तरीय टास्क फोर्स उम्मीदवारों के सुझाव और शिकायतें भी सुन रहा है। इसलिए आने वाले वक्त में राज्य में सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया में कुछ अहम बदलाव होने की संभावना है। एक तरफ बड़े पैमाने पर खाली पद भरने की तैयारी चल रही है, तो दूसरी तरफ पदोन्नति की विभागीय परीक्षाओं में सुसंगति लाने की कवायद भी जारी है। इसी वजह से सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के साथ-साथ अभी सेवा में मौजूद कर्मचारियों की भी नजर इन बदलावों पर टिकी है।